छोटी सी बात


28 मार्च
ईश्वर बहरा नहीं हो गया है
भारत में नियम-कानून कड़ाई से लागू नहीं होते, इसलिए लोग अपने घर पर पूजा-पाठ से लेकर शादी-ब्याह तक पूरी हैवानियत के साथ शोर करने वाले लाउडस्पीकर लगाते हैं, और आसपास के लोगों की जिंदगी घंटों से लेकर दिनों तक खराब करते हैं। ऐसा करने के पहले इतना जरूर सोच लें, कि आपके अपने बूढ़े और बीमार मां-बाप अगर ऐसे और इतने शोर को बर्दाश्त न कर पाने की हालत में हों, तो पड़ोस का ऐसा शोर आपको कैसा लगेगा? और जिन बच्चों की पढ़ाई ऐसे गैरजरूरी शोर से तबाह होती है, उनकी जगह अपने बच्चों को रखकर देखें, और फिर अखबारों में उन खबरों को देखें कि इम्तिहान में फेल होने पर बच्चे किस तरह जान दे देते हैं। 
यह भी सोचें कि रात भर जिनकी नींद खराब हो रही है, उनकी जगह अगर आप होते, तो शोर करने वालों को कौन-कौन सी गालियां देते, और फिर जहां तक आपके लाउडस्पीकर की आवाज जाती है, वहां तक की आबादी की गिनती से इन गालियों को गुणा करके देखें, और फिर समझें कि आपको क्या मिल रहा है। 
समझदार के लिए कबीर की कही हुई यही बात बहुत है कि ईश्वर बहरा नहीं हो गया है जो कि उसे सुनाने के लिए इतनी जोर की आवाज की जाए। कबीर की एक और बात याद रखनी चाहिए कि बद्दुआ किसी मरे हुए जानवर की भी नहीं लेनी चाहिए, जिसके चमड़े से बनी हुई धौंकनी से चलती भट्टी में लोहा भी पिघल जाता है। 
अपने आसपास के इतने अधिक लोगों की बद्दुआ का आप पर असर होना तय है, आपके शोर का ईश्वर पर असर हो या न हो, इसमें शक है। 
- सुनील कुमार

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