23 अप्रैल
आज के वक्त में बच्चों को सावधान
और परिपक्व बनाने की जरूरत
हिन्दुस्तान में इन दिनों जितने तरह के सेक्स-अपराध की खबरें भरी हुई हैं, उनको देखते हुए हर किसी की यह जिम्मेदारी है कि अपने आसपास के कम उम्र के लोगों को दो तरह से सावधान करके रखे। एक तो जिन पर ऐसे अपराधों का खतरा हो, उन्हें खतरों की नौबत गिनाते हुए उनसे बचने की सलाह देनी चाहिए। दूसरी तरफ आसपास के जो नौजवान ऐसी उम्र में हैं कि उनसे सेक्स संबंधों को लेकर कोई चूक हो सकती है, कोई जबर्दस्ती हो सकती है, उनको सावधान करने की जरूरत है कि वे किसी पर भी कोई ज्यादती करने से बचें, किसी तरह की छूट दूसरों से न लें, यह मानते हुए कि किसी साथी की सहमति है देह संबंध बनाने के लिए। देश का कानून लोगों को ऐसी छूट लेने की इजाजत नहीं देता।
अपने छोटे बच्चों से लेकर अपने जवान बच्चों तक, सबसे इस बारे में जरूरत के मुताबिक खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें सावधान करना चाहिए। वे न तो सेक्स-अपराधों के शिकार बनें, न ही वे सेक्स-अपराधी बनें। छोटे बच्चों से लेकर जवान बच्चों तक, अलग-अलग पर इस तरह के कई खतरे रहते हैं, और सावधानी ही अकेला बचाव हो सकती है। कानून तो अपना काम बाद में करते रहता है, लेकिन समय रहते अपने बच्चों को समझदार बनाना, जागरूक बनाना, जिम्मेदार और सावधान बनाना ही उनकी हिफाजत है। आज के जमाने में छोटे बच्चों से लेकर जवानों तक को कई तरह की जगहों पर, कई तरह की स्थितियों से गुजरना होता है। ऐसे में उनके भीतर परिपक्वता और सावधानी ही उन्हें बचाकर रख सकते हैं।
-सुनील कुमार
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