छोटी सी बात

12 अप्रैल 2013
बचाव से बड़ा इलाज नहीं
बीमारी के चलते परिवार के लोग बहुत निराश हो जाते हैं। और ऐसी निराशा बीमार का नुकसान अधिक करती हैं। अगर किसी बीमारी का इलाज है, और उस इलाज तक पहुंच है, खर्च उठाने की ताकत है, तो ऐसे लोगों को बिल्कुल निराश नहीं होना चाहिए। अगर इलाज है तो उसे खरीदने की ताकत है, और अगर नहीं है तो निराशा और फिक्र से क्या हो जाएगा? 
अब सवाल उठता है कि जिनके पास इलाज की ताकत नहीं है, वे क्या करें? यहीं पर दो बातों का ख्याल करना चाहिए। पहली बात तो यह कि बीमारी से बचाव करें। एक सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं, बुरी आदतों से दूर रहें। गरीब के लिए यह और अधिक जरूरी है, क्योंकि उसके पास इलाज तो दूर, महंगी जांच की ताकत भी नहीं रहती। दूसरी बात यह कि किसी भी बीमारी के आसार दिखने पर जांच जल्द से जल्द करवाएं। समय रहते बीमारी का पता लगे, तो उसका इलाज आसान होता है, सस्ता होता है, और ठीक होने की उम्मीद अधिक होती है। 
और गरीब या अमीर, सबके लिए जरूरी यह रहता है कि अपनी जांच के कागज, दवाओं के पर्चे, इन सबको एक फाईल में सम्हालकर रखना। ऐसा न होने पर कई बार बीमारी का पकड़ में आना भी मुश्किल हो जाता है, और गैरजरूरी जांच दुबारा करवानी पड़ती है। 
लाख रूपये की बात यह है कि बीमारी से, किसी हादसे से बचा जाए। हर बार पैसा बचा नहीं पाता।
-सुनील कुमार

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