24 मार्च 13
हासिल को छोड़ हसरत के पीछे
किसी और की लिखी हुई बात को जो लोग अपने नाम से आगे बढ़ाते हैं, उनकी चोरी पकड़ाना इन दिनों आसान हो गया है। इंटरनेट पर ऐसी बात डाली जाए या कहीं छपने के लिए दी जाए, कुछ लोग ऐसी बातों के चुनिंदा शब्द लेकर इंटरनेट पर उसकी असल ढूंढ सकते हैं। और चोरी करने वालों के नाम की मिट्टी पलीद हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि आपको अच्छी लगी हुई बात, उसके लिखने वालों या कहने वालों के नाम के साथ ही आप आगे बढ़ाएं। जब आप ऐसी किसी बात को फेसबुक या ट्विटर पर पोस्ट करते हैं तो यह माना जाता है कि यह आपकी ही कही हुई बात है, इसलिए वहां पर या तो उसे अज्ञात नाम के साथ डालें, या नाम मालूम हो तो उसके साथ लिखें।
आपको चाहे अच्छा लिखना न आता हो, अच्छी चीजों को छांटना भी आता है, तो भी आप एक पारखी तो माने ही जाते हैं। और पारखी हुनरमंद हों, या न हों, पारखी के रूप में उनकी इज्जत होती ही हैं। इसलिए आप जिस इज्जत के हकदार हैं, उसे छोड़कर उस इज्जत के पीछे न भागें, जिसके कि आप हकदार नहीं हैं। ऐसी ही बात के लिए किसी समय मैंने लिखा था कि लोग हासिल को छोड़, हसरत के पीछे भागते हैं।
सुनील कुमार
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