छोटी सी बात

1 अप्रैल 2013
डिजिटल सलीका
इन दिनों मोबाइल फोन से लेकर कम्प्यूटरों तक लोगों की बहुत सी निजी बातें दर्ज रहती हैं। अगर कोई ऐसी नौबत आती है कि आप किसी परिचित के फोन से एक कॉल करते हैं, या उनके कम्प्यूटर का इस्तेमाल कुछ देर के लिए करते हैं, तो याद रखें कि उसका इस्तेमाल उतना ही करें। कोशिश करें कि उनके सामने ही आप रहें। उनके फोन या कम्प्यूटर पर बाकी चीजों को देखना, बहुत बड़ी बदतमीजी मानी जाती है, और यह लोगों की निजी जिंदगी में दखल भी रहती है। 
आज का जमाना ऐसा है कि आप अपने परिवार के बाकी लोगों के भी फोन और कम्प्यूटर में ताक-झांक करें, बैठे ठाले उससे खिलवाड़ करें, इसे कोई पसंद नहीं करता। एक वक्त लोगों की जिंदगी में निजी बातों के लिए डायरी हुआ करती थी, आज उसकी जगह फोन-लैपटॉप जैसी चीजों ने ले ली है। आज के डिजिटल-जमाने का सलीका यह भी कहता है कि आप किसी दूसरे की कम्प्यूटर स्क्रीन को देखते हुए भी खड़े न रहें, बैठे न रहें। 
इसी तरह आपको अगर कोई दूसरे लोग ई-मेल या एसएमएस पर, या किसी और तरीके से कोई बात या तस्वीर भेजते हैं, तो उसे आगे बढ़ाते हुए आपको भेजने वालों के नाम हटा देने चाहिए। इसी तरह जब आप किसी वयस्क मजाक या मनोरंजन को आगे बढ़ाते हैं तो पाने वालों के नाम ई-मेल में एक साथ लिख देने से वे लोग यह भी देख लेते हैं कि आपने वह ई-मेल किन-किन लोगों को भेजा है। इस तरह उन तमाम लोगों से आपके वयस्क-मजाक के संबंध उजागर हो जाते हैं। ऐसे ई-मेल अलग-अलग ही भेजें, एक साथ थोक में कई लोगों को ई-मेल न करें। 
- सुनील कुमार 

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