फौजी ताकत से इंसानियत फिर शर्मसार



संपादकीय 
13 जनवरी 2012
अफगानिस्तान में तालिबानियों की लाशों के साथ अमरीकी फौजियों के आपत्तिजनक बर्ताव की दुनिया भर में निंदा हो रही है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई, और अमरीकी रक्षा मंत्री लेओन पनेटा ने अमरीकी फौजियों की इस हरकत की कड़ी निंदा की है। पनेटा ने कहा है कि यह हरकत करने वाले अमरीकी फौजियों से इसका पूरा जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने अमरीकी, और नाटो सेना के कमांडर की अगुवाई में इस घटना की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। यह फूटेज बहुत ही संवेदनशील समय में आया है। यह ऐसे समय में आया है, जब नाटो की सेना 2014 में अफगानिस्तान से चले जाने का ऐलान कर चुकी है। अफगानिस्तान में उसके बाद हालात बिगड़े नहीं, इसके लिए नाटो और अफगान सरकार तालिबानियों के साथ बातचीत शुरू कर रही है। अब तक पिछले दरवाजों से हो रही यह कोशिशें, अब कतार में तालिबानियों को बातचीत के लिये एक दफ्तर जुट जाने के बाद से खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में जब तालिबानियों को बस 2014 तक अपनी ताकत सम्हाल कर इंतज़ार ही करना, और उसके बाद कमजोर अफगान तंत्र पर टूट पडऩा भर बाकी रह जाता था। इस वीडियो का सामने आना अफगानिस्तान में सामान्य स्थिति की बहाली के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस वीडियो में खून से लथपथ एक तालिबानी लाश के साथ होने वाला दुव्र्यवहार अफगानिस्तान में तालिबानियों को नए लड़ाके जुटाने के लिए काफी हो सकता है। वहीं दूसरी ओर नाटो के दूसरे सदस्य देशों की नाराजगी, जिनेवा घोषणा और युद्ध के अंतरराष्ट्रीय नियम तोडऩे का इल्जाम अमरीका पर लग सकता है, वह अलग।

इसलिए अमरीकी रक्षा प्रतिष्ठानों ने तुरत-फुरत इस फूटेज में दिखाई गई घटना की निंदा कर डाली है। अबु गरीब जैसी घटनाओं के समय अमरीकी फौज की ज्यादतियों पर खामोश रहने वाले अमरीकी मीडिया का एक हिस्सा अब यह भी कह रहा है कि अच्छे बुरे लोग सब जगह होते हंै, सो फौज में भी हैं। ऐसी बातें भी कही जा रही हंै कि यह हरकत उन युवाओं ने की है, जिनके माता-पिता ने उन्हें सही परवरिश नहीं दी।  लेकिन इन सबके बीच एक बात जो गौर करने जैसी लग रही है, वह है किसी फौज की, किसी जगह लंबे समय तक तैनाती के मानसिक स्थितियों की। जब एक फौज किसी इलाके में तैनात की जाती है तो जाहिर तौर पर उस इलाके के लोगों को यह जताया जाता है कि वह कानून के दायरे में नहीं रहते, और उन्हें सही रास्ते पर रखने के लिए, या किसी विदेशी, बाहरी खतरे से उन्हें बचाने के नाम पर वहां फौज की तैनाती की गई है। ऐसी फौजों को किसी न किसी कारण लगातर हिंसा करनी पड़ती है, और कही न कहीं इंसानियत के प्रति फौजियों की संवेदनशीलता कम होते जाने की बहुत सी मिसालें दुनिया में जगह-जगह देखने को मिलती हैं। मारे गए तालिबानियों के साथ अमरीकी युवा फौजियों की हरकत ऐसी ही मानसिकता की मिसाल है। इसका फायदा दुनिया में अमरीकियों को निशाना बनाने के लिए उठाया जा सकता है। एक तालिबानी प्रवक्ता ने अमरीकियों पर अपने हमलों को जायज ठहराते हुए कहा भी है कि ऐसी हरकत अमरीकियों ने पहली बार नहीं की है, और उनके खिलाफ तालिबानियों के हमले जारी रहेंगे। अमरीकी ड्रोन हमलों के निशाने से ध्वस्त होकर, और अपने बड़े नेताओं के गिरफ्तार हो जाने के बाद टूटी कमर लेकर अमरीका से बात करने को राजी हुए तालिबानी आज तो यह कह रहे हंै कि, इस घटना से उनकी अपने  कैदियों को नाटो की गिरफ्त से छुड़ाने के लिए होने वाली बातचीत पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन क्या इस घटना के बाद तालिबानियों के साथ सौदेबाजी में नाटो का हाथ नीचे नहीं हो जाएगा?
इन सब बातों पर गौर करने पर यह अंदाज भी लगाया जा सकता है कि नाटो-तालिबान के बीच की बातचीत में, नाटो का पक्ष हलका करने के लिए इस समय जानबूझकर यह वीडियो जारी किया गया है। भारत में भी हम देखते हैं कि जब आतंकवादियों में से नर्मपंथियों के साथ सरकार बातचीत का कोई सिरा खोलती है, तो जन भावनाएं भड़काने वाली या सरकार को बचाव की मुद्रा में लाने वाली कोई घटना हो जाया करती है। हालांकि इस घटना में गलती अमरीकी फौज की दिखती है, और खुद अमरीकी विदेश मंत्री इस वीडियो की सच्चाई से  इंकार नहीं कर रहे हैं। अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन भी कह रही हंै कि अमरीका इस घटना के निंदा करता है लेकिन इसके कारण वह किसी दबाव में आकर अपनी नीति नहीं बदलेगा। आज के मुश्किल हालात में जब परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान राजनीतिक अस्थिरता की कगार पर खड़ा है, परमाणु शक्ति से सम्पन्न उत्तरी कोरिया की कमान एक कम उम्र, कम तजुर्बेकार तानाशाह के हाथ में आ गई है, इस वीडियो का सामने आकर ताकत संपन्न देशों को आतंकवादी गुटों के आगे कमज़ोर करना, दुनिया के लिए कोई अच्छे आसार पैदा नहीं करता। भारत के लिए खासकर यह चिंता की बात है कि उसके एक पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता है तो दूसरे में यह वीडियो बम फूटा है।

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