03 जनवरी 2012
संपादकीय
नए साल की पहली सुबह देश की राजधानी दिल्ली में चापलूसी की एक नई ऊंचाई, या गहराई, के साथ देखी। एक बड़े नामी-गिरामी अखबार, द हिन्दू, का पहला पूरा पेज सोनिया गांधी के लिए एक कांग्रेसी नेता के दिए हुए इश्तहार का था। तमिलनाडु के एक कांग्रेस नेता और एक टीवी चैनल के मालिक, कारोबारी, ने यह विज्ञापन दिया था जिसका पूरे पेज पर बिखरा हुआ बड़ा सा नारा था- 'हम हमेशा आपके चरणों में पड़े रहेंगे।Ó इसका संदर्भ भी विज्ञापन लिखा हुआ था- 'राज्याभिषेक के बाद श्रीरामचन्द्रजी ने हनुमान से पूछा था- तुम क्या पुरस्कार पसंद करोगे?... निष्ठावान सेवक हनुमान का विनम्र जवाब था- मुझे हमेशा अपने चरणों में पड़े रहने देंÓ।
कांग्रेस की चापलूसी की लंबी परंपरा रही है और आपातकाल में इस देश में कांग्रेस के तानाशाह, नेहरू-गांधी कुनबे के संजय गांधी के किसी सरकारी कुर्सी पर न रहते हुए भी उनके लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल अपने कपड़ों से कुर्सियां पोंछते जनसभाओं के मंचों पर नजर आते थे, उनकी चप्पलें उठाते दिखते थे और कांग्रेस पार्टी और उनके चापलूसों को संजय गांधी ने इस विशाल और महान लोकतंत्र का भविष्य दिखता था। कांग्रेस पार्टी के इस विधायक रहे तमिल नेता के टीवी चैनल का उद्घाटन सोनिया गांधी ने तीन-चार बरस पहले दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय से किया था, इसलिए इसे कोई छोटा-मोटा और अनजान नेता मानना ठीक नहीं होगा। वैसे भी दिल्ली के एक महंगे अखबार में दसियों लाख रूपए का ऐसा इश्तहार सोनिया गांधी की नजरों से अछूता तो रहा नहीं होगा और अब तक हमें इस चापलूसी पर पार्टी हाईकमान या उनकी ओर से किसी और की नाराजगी की बात कहीं पढऩे नहीं मिली है।कल ही एक समाचार चैनल पर मायावती के एक मंत्री रहे ऐसे नेता जोर-जोर से रोते दिख रहे थे जिनकी टिकट भी इस विधानसभा चुनाव के लिए कट गई है। मायावती ने कांग्रेस की चापलूसी की परंपरा को सौ कदम और आगे बढ़ाते हुए लोगों के लिए यह मौका ही नहीं छोड़ा कि वे उनकी चापलूसी करें। दसियों लाख की माला वे खुद अपने गले में डलवा लेती हैं, सैकड़ों करोड़ के अपने बुत वे खुद बनवा लेती हैं और संजय गांधी सरीखे तानाशाह अंदाज में वे राज करते हुए, दलित की बेटी होने की रियायत भी ले लेती हैं। इस तरह की कुछ लालू चालीसाएं भी बाजार में आ जाती हैं, कहीं किसी नेता के मंदिर बनने लगते हैं, किसी के मरने पर राज्य में अलग-अलग वजहों से होने वाली मौतों को भी सदमा-मौत में गिनने के लिए साजिश हो जाती है और कहीं पर लोग नेताओं के बच्चों में पार्टी और देश-प्रदेश का भविष्य देखने लगते हैं। यह सिलसिला सिर्फ हिन्दुस्तान में हो, ऐसा भी नहीं। बेनजीर के मरने के बाद उनके कॉलेज पढ़ रहे बेटे बिलावल भुट्टो को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसी कई जगहों पर कुनबापरस्ती देखने मिली जो कि चापलूसी की ही एक शक्ल है।
लेकिन सोनिया गांधी के चरणों में पड़े रहने की अतृप्त लालसा रखने वाले इस कलयुगी हनुमान को सोनिया खुद बर्दाश्त करेंगी, ऐसा हमें नहीं लग रहा था। इस पर कम से कम उनकी तरफ से एक जाहिर नाखुशी या नाराजगी सामने आई होती, तो भी कांग्रेस के बाकी लोगों को आगे इस किस्म की चापलूसी से बचने का एक इशारा मिलता। आज एक अरबपति चरणों में पड़े रहना चाहता है, इसे देखकर कल कोई दूसरा इन्हीं चरणों के तले रेंगने का इश्तहार दे सकता है। यह सिलसिला बहुत खतरनाक है और जब ऐसी सार्वजनिक चापलूसी पर कोई नाराजगी सामने नहीं आती, तो वह चापलूसी पार्टी की संस्कृति मान ली जाती है, और बाकी लोगों के लिए मार्गदर्शक भी। जिस पार्टी में नेहरू की बेटी ने अपने बददिमाग बेटे को देश का भविष्य मान लिया था, उस पार्टी को आज भी जारी कुनबापरस्ती के बीच अपनी सोच को खुशामदखोरों से दूर रखना चाहिए। सोनिया गांधी ने हो चुके राज्याभिषेक को छोड़कर अपने सिर पर धरा गया ताज मनमोहन सिंह के सिर पर रखा था। सत्ता के मोह को इस हद तक छोड़कर, और साथ-साथ राजनीतिक समझदारी का एक फैसला लेते हुए सोनिया गांधी जब पार्टी के तमाम लोगों की अपील को विनम्रता से खारिज कर दिया था, तो आज राम के राज्याभिषेक और उनके सेवक हनुमान से तुलना वाले ऐसे विज्ञापन को भी उन्हें खारिज कर देना चाहिए, ऐसी चापलूसी से उनका नुकसान छोड़ और कुछ नहीं हो रहा।

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