सपा की शर्मनाक गुंडागर्दी, लंबी नाम, शर्म जरा भी नहीं

26 सितंबर 2013
संपादकीय
कई समाचार चैनलों पर एक खबर देखें तो लगता है कि केन्द्र सरकार को गिरने से बचाने के एवज में समाजवादी पार्टी देश की राजधानी दिल्ली में परले दर्जे की गुंडागर्दी कर सकती है, और केन्द्र सरकार की पुलिस देश की राजधानी में सुप्रीम कोर्ट की नाक तले इसे अनदेखा कर सकती है। इस टीवी खबर को देखें तो एक दवा-दूकान में एक दवा न होने पर खरीदने आया ड्राइवर अपनी मालकिन से फोन पर दूकानदार की बात करवाता है जो कि गालियां बकना शुरू कर देती है। कुछ ही देर में उत्तरप्रदेश पुलिस की वर्दी में स्टेनगन लिए हुए लोग उस ड्राइवर के साथ आते हैं, और दवा दूकानदार को बुरी तरह मारते हैं। यह सब कुछ दूकान के वीडियो कैमरे पर रिकॉर्ड हुआ, फोन नंबर से पता लग गया कि वह समाजवादी पार्टी के सांसद मुलायम सिंह यादव के भाई, रामगोपाल यादव की बहू का है। इसके बाद दिल्ली पुलिस को लकवा मार गया।
सत्ता की गुंडागर्दी के लिए उत्तरप्रदेश और समाजवादी पार्टी खासे बदनाम हैं। अब अगर मुलायम कुनबे की बहुओं की ओर से उत्तरप्रदेश की हथियारबंद पुलिस देश की राजधानी के भरे बाजार में इस तरह गुंडागर्दी करते कैमरे पर कैद होती है तो यह शर्मनाक बात है। दिक्कत यह है कि यह दिल्ली पुलिस के लिए भी इतना ही शर्मनाक है कि वह इस जुर्म के हफ्ते भर बाद भी कोई कार्रवाई करने से मुंह चुराए। लेकिन उत्तरप्रदेश से लेकर केन्द्र सरकार तक, सरकारों के पास अब न शर्म रह गई है, न नाक रह गई है। इसलिए सत्ता की एक शर्मनाक वारदात के बाद दूसरी शर्मनाक वारदात के बीच कुछ दिनों का फासला भी नहीं रह जाता। कार्टूनिस्टों की नजर में मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव तक की जो लंबी, पैनी नाक दिखती है, वह है कहां?
केंद्र सरकार के मातहत काम करने वाली दिल्ली पुलिस को यह समझ नहीं आ रहा कि वीडियो कैमरों पर कैद और विभिन्न समाचार चैनलों पर आ चुकी इस गुंडागर्दी के बाद हो सकता है कि कोई अदालत दखल दे और दिल्ली पुलिस को उसकी साजिशी चुप्पी पर नोटिस जारी करे। अगर समाजवादी पार्टी के नेता यह समझते हैं कि उनकी और उनके कुनबों की ऐसी हरकतों के बाद भी उनके राज में उत्तरप्रदेश का विकास हो सकेगा, तो वे खुशफहमी में हैं। कोई भी कारोबार कारखानेदार या पेशेवर लोग ऐसे राज में काम करना क्यों चाहेंगे जहां सत्ता की ऐसी गुंडागर्दी चलती हो, जहां समाजवादी पार्टी के मंत्री रात-दिन साम्प्रदायिकता की बात करते हों? जहां ईमानदार अफसर सूली पर चढ़ाए जाते हों? जहां सत्ता की बददिमागी और बेदिमागी एक दूसरे से गलाकाट मुकाबला करते हों।
उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी समाजवाद के नाम पर कलंक साबित हो रही है। राम मनोहर लोहिया ने कभी ऐसे कुनबाकेंद्रित समाजवाद की कल्पना भी नहीं की होगी, कभी यह नहीं सोचा होगा कि उनका नाम लेकर समाजवाद की दूकान चलाने वाले लोग अनुपातहीन संपत्ति के मामले में अदालती कटघरों में चोर-सिपाही का खेल खेलेंगे।
यह मुलायम कुनबे की अनुपातहीन सम्पत्ति का मामला नहीं है, यह यूपीए सरकार की अनुपातहीन कमजोरी का मामला है, यह मुलायम जैसे लोगों पर यूपीए की अनुपातहीन बेबसी का मामला है। अनुपातहीन सम्पत्ति के साथ-साथ देश की सरकार पर अनुपातहीन शिकंजा और ऐसे में अपने घर के बच्चे के हाथ में उत्तरप्रदेश का झुनझुना। बेदिमागों को बददिमागी के लिए और क्या लगता है?

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