कम पढ़े-लिखे, और अधिक पढ़े-लिखे का इतिहास कांग्रेस याद रखे

28 मई 2014
संपादकीय
मोदी सरकार में मानव संसाधन मंत्री बनाई गई स्मृति जुबीन ईरानी को लेकर कांग्रेस ने हमला बोला है कि वे बारहवीं पास हैं, और देश की उच्च शिक्षा अब उनके मातहत रहेगी। लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की इस ओछी बात का विरोध कांग्रेस के ही एक दूसरे प्रवक्ता रहे मनीष तिवारी ने किया है, और मोदी सरकार से कल ही खासे नाखुश हुए कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी कांग्रेस की आलोचना के खिलाफ लिखते हुए पूछा है कि क्या विमानन मंत्री बनने के लिए पायलट होना जरूरी होता है? 
दरअसल कांग्रेस अपनी बददिमागी, और बदजुबानी की वजह से चुनाव में इतनी बुरी तरह, और पूरी तरह, शिकस्त पाने के बाद भी अपना दिमाग सुधार नहीं पा रही है। किसी मंत्रालय को चलाने के लिए उस मंत्री की पढ़ाई-लिखाई को अगर एक शर्त बना लिया जाए, तो कांग्रेस के पिछले बहुत से मंत्री और प्रधानमंत्री ऐसे रहे हैं, जिनकी पढ़ाई-लिखाई उनको किसी मंत्रालय के लायक नहीं बनाती थी। लेकिन देश ने कभी ऐसे ऊटपटांग सवाल खड़े नहीं किए थे। इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहते हुए अपने पास प्रतीकात्मक रूप से जो गिने-चुने मंत्रालय रखती थीं, उनमें परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे विभाग रहते थे। इंदिरा गांधी की पढ़ाई-लिखाई का और उनकी वैज्ञानिक समझ का ऐसे तकनीकी मामलों से क्या लेना-देना था? हमने इंटरनेट पर इंदिरा, राजीव, और कांग्रेस के कुछ दूसरे नेताओं की पढ़ाई-लिखाई की काबीलियत को तलाशा, तो लगा कि अभिषेक मनु सिंघवी को ओछी बात कहने के पहले कांग्रेस नेताओं की डिग्रियों को तौल लेना था। हम स्मृति ईरानी को यह मंत्रालय देने की वकालत नहीं कर रहे, लेकिन इतना जरूर समझ रहे हैं कि जिस तरह बहुत पढ़े-लिखे और विद्वान समझे जाने वाले, सबसे अधिक अनुभवी लोगों में से एक, अर्जुन सिंह ने इस मंत्रालय का मंत्री रहते हुए जैसी नौबत झेली थी, वैसी नौबत स्मृति ईरानी के साथ न आए वह जरूरी होगा। हमारे पाठकों को याद होगा कि अर्जुन सिंह के वक्त इस अखबार में एक रिपोर्ट छपी थी कि किस तरह उनकी बेटी ने इस मंत्रालय में जाकर बिस्किट निर्माताओं की तरफदारी की थी, और स्कूलों में दोपहर की भोजन की जगह बिस्किट करवाने की कोशिश की थी। पांच बरस में पैंसठ हजार करोड़ से अधिक का वह कारोबार निजी उद्योगों को दिलवाने की ऐसी कोशिश किसी अनपढ़ या कमपढ़ ने नहीं की थी। 
कांग्रेस के कुछ नेताओं की पढ़ाई-लिखाई देखें, तो विकीपीडिया के मुताबिक इंदिरा गांधी की स्कूल की पढ़ाई भी अधिकतर घर पर हुई थी, और बाद में वे कुछ समय के लिए विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांति निकेतन में पढ़ीं। लेकिन अपनी बीमार मां का साथ देने के लिए उन्होंने एक बरस बाद ही विश्व भारती छोड़ दिया और मां के इलाज के लिए योरप गईं। वहां रहते हुए उन्होंने ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की, और कुछ अरसा वे बैंडमिंटन स्कूल और सॉमरविले कॉलेज में पढ़ीं। इस दौरान वे खुद भी बीमार रहीं, एक पर्चे में उनके नंबर कम रहे और विश्व युद्ध के उस दौर में 1941 में वे ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई अधूरी छोड़कर हिंदुस्तान लौट आईं। बाद में विश्वविद्यालय ने उन्हें एक मानद उपाधि दी।
राजीव गांधी देहरादून की सबसे महंगी दो स्कूलों में पढ़े। वेलहम ब्यॉज स्कूल और दून स्कूल। इसके बाद वे ब्रिटेन में कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में इंजीनियरिंग पढऩे गए, वहां वे 1962 से 1965 तक रहे, लेकिन उन्होंने डिग्री पूरी नहीं की। वर्ष 1966 में वे इंपीरियल कॉलेज, लंदन में पढऩे गए, लेकिन एक बरस बाद वहां से भी बिना डिग्री छोड़कर आ गए।
छत्तीसगढ़ में कांगे्रस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, और बकौल राहुल गांधी, भावी मुख्यमंत्री नंद कुमार पटेल पहले मप्र और छत्तीसगढ़ के मंत्री रह चुके थे। और अगर प्रदेश में कांगे्रस की सरकार आई होती, और उसके पहले नक्सल हमले में वे गुजर नहीं गए होते, तो वे राज्य के मुख्यमंत्री हो सकते थे। उनकी पढ़ाई सिर्फ स्कूल तक की थी, और स्मृति ईरानी की 12वीं से भी कम तक की थी। 
दूसरी तरफ टेलीकॉम घोटाले के लिए लंबे समय तक जेल में बंद, और आज भी अदालती कटघरे में खड़े हुए यूपीए के मंत्री रहे ए राजा का परिचय पढ़ें, तो वे साइंस गे्रजुएट हैं, और कानून में भी उन्होंने गे्रजुएशन के बाद पोस्टगे्रजुएट डिग्री हासिल की है। राजा की पार्टी की ही यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं कनिमोझी एक कॉवेंट स्कूल में पढ़ीं, और फिर अर्थशास्त्र में पोस्ट गे्रजुएशन किया। वे पत्रकार और कविताकार भी रहीं, लेकिन फिलहाल वे भ्रष्टाचार के मुकदमों में जेल, अदालत और जमानत के बीच कहीं पर हैं।
राष्ट्रमंडल खेलों के घोटालों में लंबे समय तक जेल में रहे सुरेश कलमाड़ी पूना के सेंट विसेंट हाईस्कूल में पढ़े और फिर पुणे के विख्यात फग्र्युसन कॉलेज में पढ़े। बाद में वे राष्ट्रीय प्रतिरक्षा अकादमी में पढ़े, और फिर एयरफोर्स फ्लाइंग कॉलेज, जोधपुर और इलाहाबाद में पढ़कर भारतीय वायुसेना में पायलट रहे। इसके बाद वे राष्ट्रीय प्रतिरक्षा अकादमी में दो साल पढ़ाते भी रहे, और 1965, और 1971 के युद्ध के बाद उन्हें आठ मैडल भी मिले थे।
हिंदुस्तान के संसदीय इतिहास में जिस पहले सांसद को सुप्रीम कोर्ट ने कुसूरवार पाकर संसद की सदस्यता से हटा दिया, वे रशीद मसूद देश की आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को पैदा हुए थे। और इन दिनों वे चार बरस की कैद काट रहे हैं क्योंकि उन्होंने कांगे्रस सांसद रहते हुए एमबीबीएस सीटों के आबंटन में घोटाला किया। और सीबीआई अदालत की सुनाई गई कैद के बाद उनकी संसद सदस्यता खत्म हुई। गांधी टोपी और खादी भी उनको इस जुर्म से नहीं रोक पाईं, और न ही बीएससी और एलएलएम की पढ़ाई ने उनको ऐसे घोटाले से रोका वे वीपी सिंह की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके थे, और लगातार लोकसभा, राज्यसभा में रहते आए थे।
इसलिए कांग्रेस कम से कम अब सुधर जाए, और अपनी ओछी जुबान को लेकर अभिषेक मनु सिंघवी जैसे लोग या तो अदालत जाएं और अपने पेशे का काम करें, या अपने घर बैठें। आज देश में कांग्रेस की बकवास को सुनने का जनता का कोई इरादा नहीं है, और अब इस पार्टी को विनम्रता के साथ चुप बैठकर मोदी सरकार को काम करने का मौका देना चाहिए, और इस सरकार से गलतियों और गलत कामों की उम्मीद करना चाहिए। उम्मीद पर दुनिया जिंदा रहती है, कांग्रेस भी कुछ बरस यही काम करे। 

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