सरकारी नौकरियां बेचने का मुलायमी समाजवाद

9 मई 2014
संपादकीय
भांडाफोड़ करने के लिए एक मशहूर समाचार वेबसाईट कोबरा पोस्ट ने आज उत्तरप्रदेश में सरकार भर्ती में चल रही भारी धांधली और रिश्वतखोरी के स्टिंग ऑपरेशन से सत्ता के करीबी लोगों को उजागर किया गया है। इसमें मंत्री स्तर के लोग, विधायक और भूतपूर्व विधायक जैसे समाजवादी पार्टी के नेता लाखों रूपए लेकर नियुक्ति करवाने की बात करते पकड़ाए हैं। लोगों को याद होगा कि हरियाणा का कुख्यात चौटाला परिवार सरकारी नियुक्तियों में अपनी सत्ता के दौरान भारी भ्रष्टाचार के मामलों में सजा काटते हुए जेल में है। और इस तरह का काम देश के बहुत से प्रदेशों में आए दिन होते रहता है, और सरकार भी नालायक लोगों से भर जाती है, और लायक लोग बेरोजगार घूमते रहते हैं। 
स्टिंग ऑपरेशनों की वजह से देश में कई जगह कुछ इस्तीफे हुए हैं, कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं, और कुछ को सजा भी हुई है। बहुत से सांसदों की सदस्यता भी रिश्वत के स्टिंग ऑपरेशन के चलते खत्म हुई है। लेकिन सरकारी नौकरियों में नियुक्ति का मामला छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में भी भारी भ्रष्टाचार का शिकार रहते आया है, और राज्य लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्य जैसे लोग ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों में सुबूत सामने आने के बाद भी दस बरस से अधिक से बिना किसी सजा, मजा करते घूम रहे हैं। जोगी सरकार के वक्त के ऐसे लोग, रमन सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी पकड़ से बाहर हैं। 
आज देश-प्रदेश में एक सरकारी नौकरी के लिए हजारों बेरोजगार कतार में रहते हैं। ऐसे में जब रिश्वत लेकर किसी नालायक को नौकरी दे दी जाती है, तो हजारों बेरोजगारों का भरोसा ऐसे लोकतंत्र पर से उठ जाता है। जनता के पैसों से मिलने वाली तनख्वाह एक ऐसे नालायक को मिलती है जो कि पूंजीनिवेश करके नौकरी में आया है, और जिसे बेईमानी करके अपने इस निवेश से कमाई करनी रहती है। ऐसे में रिश्वत लेकर नौकरी देने से, न सिर्फ काबिल का हक छिनता है, बल्कि सरकारी नौकरियों में रिश्वतखोरी की गारंटी भी हो जाती है। छोटे-छोटे से शिक्षाकर्मी जैसी नौकरियों में भी लाखों रूपए की रिश्वत चलते छत्तीसगढ़ में ही देखा गया है। 
हमारा ख्याल है कि सत्ता से जुड़े हुए लोग जब कभी किसी जुर्म में पकड़ाते हैं, तो उनके लिए उस जुर्म के लिए तय अधिकतम संभव सजा से भी खासी अधिक सजा का इंतजाम किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है कि जब मुजरिम ताकतवर होते हैं, और वे बिना किसी बेबसी के हजारों बेरोजगारों का हक छीनते हैं, तो मुजरिम और उसके जुर्म के शिकार के बीच ताकत का इतना बड़ा फर्क होता है, कि उसके लिए एक बहुत बड़ी सजा जरूरी है। आज हरियाणा में जिस तरह चौटाला कुनबा कल के मुख्यमंत्री पद से आज की जेल तक पहुंचा है, उसकी वजह से बहुत से कलेजों को ठंडक पहुंची होगी, और कम से कम कुछ लोगों को तो सबक-नसीहत का फायदा होगा। उत्तरप्रदेश का जो मामला सामने आया है, उसे चुनाव से जोड़कर देखना ठीक नहीं है, और उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तुरंत इस स्टिंग ऑपरेशन पर खुद होकर कार्रवाई करनी चाहिए। जब समाजवादी पार्टी की सरकार से जुड़े हुए बड़े-बड़े लोग ऐसे भ्रष्टाचार में लगे हैं, तो वहां की पुलिस से खुद होकर किसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे में अदालत को अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए।

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