20 नवंबर 2011
संपादकीय
एक लंबी सी, छोटी सी बात
पाकिस्तान में मोबाईल फोन पर आने-जाने वाले एसएमएस के लिए डेढ़ हजार शब्दों को प्रतिबंधित कर दिया है। फोन कंपनियों को आदेश जारी हो गए हैं कि जो मैसेज इन शब्दों वाले हों, उन्हें कंपनियां ही रोक लें और आगे न जाने दें। पाकिस्तान की तहजीब जिस किस्म की जुबान और तौर-तरीकों को बुरा मानती है, उसे रोकने की नीयत से वहां की सरकार ने यह कदम उठाया है, लेकिन जैसा कि पूरी दुनिया में रोक का तजुर्बा रहते आया है, इस मामले में भी वहां की सरकार में बैठे लोगों ने ऐसे-ऐसे शब्दों को इस लंबी लिस्ट में जोड़ दिया है जिसका कि सेक्स या अश्लीलता से परे भी साधारण बातचीत में इस्तेमाल होता है। अब वहां डिपाजिट, टैक्सी, जीभ, पिछला दरवाजा, मूर्ख, छेद, शैतान, गुलाम, थूक, बंधक, कंडोम, समलैंगिक, के अलावा, एथलीट्स फुट जैसे मुहावरे भी रोक दिए गए हैं। ऐसे बड़े शब्द जिनका कोई हिस्सा किसी छोटे प्रतिबंधित शब्द वाला हो, उसे भी टेलीफोन आने-जाने नहीं देंगे।
यह रोक कुछ अधिक दूरी तक चली गई है और जिन जगहों पर किसी मजहब के आधार पर रोक लगती है तो वहां अतिउत्साही अफसर या नेता रोक को आसमान तक ले जाने की कोशिश करते हैं। लेकिन धर्म के अलावा भी कई किस्म की विचारधाराएं प्रतिबंधों का क्या हाल करती हैं यह भारत में भी आपातकाल के दौरान देखा जा चुका है जब आजादी और लोकतंत्र को लेकर गांधी और नेहरू की कही बातों को भी अगर अखबार अपने संपादकीय कॉलम में छापते थे तो उन्हें सरकार के खिलाफ बगावत मानकर उनके खिलाफ सेंसरशिप का कानून इस्तेमाल किया जाता था। आज भी हम भारत में हुसैन की पेंटिंग्स, महाराष्ट्र के पांडुलिपि-संग्रहालय, शोध संस्थान, दिल्ली में पाठ्यपुस्तक के लेख, जैसी बहुत सी बातों को प्रतिबंध का शिकार होते देखते हैं। लेकिन आज हम सेंसरशिप या गैरजरूरी रोक से परे की कुछ बात यहां करना चाहते हैं और पाकिस्तान की इस ताजा एसएमएस-रोक को हम इस चर्चा के शुरू करने का एक बहाना ही मान रहे हैं।
आज भारत में भी हम देखते हैं कि उम्र, ओहदे और रिश्ते से परे लोगों के बीच तरह-तरह के अश्लील या सेक्स-आधारित संदेश, लतीफे खुलकर आते-जाते हैं। जिन लोगों के बीच कभी रूबरू ऐसी मजाक का रिश्ता न रहा हो, वे लोग भी कहीं से आए हुए सेक्सी लतीफे को ज्यों का त्यों आगे बढ़ाते हुए दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते। यही हाल ई-मेल पर तस्वीरों को आगे बढ़ाते हुए होता है और तरह-तरह की सेक्स-आधारित वीडियो क्लिप सारे वक्त एक फोन से दूसरे फोन तैरते रहती है। टेक्नालॉजी ने लोगों के बीच रिश्तों के तौर-तरीकों को उलट-पुलटकर रख दिया है। हमारे अखबार को जो लोग लगातार पढ़ते हैं उन्होंने देखा होगा कि रोज छपने वाली एक छोटी सी नसीहत या सलाह में हम हर कुछ हफ्तों में इस बारे में लिखते हैं कि किस तरह लोगों को अपने मोबाईल फोन से सभी खराब या गलत बातों को, तस्वीरों को मिटाते चलना चाहिए क्योंकि कब उनका फोन अपने बच्चों या अपने बड़ों के हाथों में चला जाए, उसका कोई ठिकाना तो रहता नहीं। नतीजा यह होता है कि दो पीढिय़ों के बीच, या लिहाज वाले रिश्तों के बीच एक-दूसरे की नजरों में गिर जाने का एक खतरा हो जाता है या फिर उनके बीच लिहाज के रिश्ते खत्म होकर बेतकल्लुफी के रिश्ते बन जाते हैं जो कि पारिवारिक ढांचे के तहत ठीक नहीं होते। हम दो वयस्क दोस्तों के बीच मजाक या मजे के एसएमएस में किसी रोक-टोक को ठीक नहीं मानते इसलिए पाकिस्तान में इस रोक से बराबरी के दोस्ताना रिश्ते के मजाक का एक तरीका खत्म होने जा रहा है, इसलिए हम वैसी किसी रोक के बजाय लोगों के अपने-आप पर ऐसे काबू की चर्चा कर रहे हैं जो बेतकल्लुफ दोस्तों से परे के बाकी रिश्तों के मामले में इस्तेमाल होना चाहिए।
जब समाज ने रिश्तों को ऐसी शक्ल में नहीं ढाला है कि लोग एक-दूसरे से हर किस्म का मजाक कर सकें, तब सिर्फ तकनीकी सहूलियत के चलते रिश्तों की परिभाषा और उनका अंदाज इस तरह बदल जाए यह ठीक नहीं है। आज भी अगर भारत के लोग एक-दूसरे के मोबाईल फोन घर के भीतर अचानक किसी जरूरत से इस्तेमाल करने लगें और पिछले आए-गए संदेशों को देखें, फोन में जमा वीडिया क्लिप देखें तो एक-दूसरे की नजरों में गिरने की नौबत आ सकती है। भारत में एक अधिक उदार लोकतंत्र के चलते ऐसी भाषा पर रोक तो किसी कानून के तहत नहीं आएगी, लेकिन हम सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर लोगों से सावधानी बरतने की बात जरूर कहेंगे। हर कुछ हफ्तों में छोटी सी बात कहकर हम जो सलाह देते आए हैं उसे आज यहां इस बड़े कॉलम में दे रहे हैं क्योंकि हमारा मानना है कि यह राष्ट्रीय महत्व के किसी मुद्दे से कम अहमियत की बात नहीं है।
संपादकीय
एक लंबी सी, छोटी सी बात
पाकिस्तान में मोबाईल फोन पर आने-जाने वाले एसएमएस के लिए डेढ़ हजार शब्दों को प्रतिबंधित कर दिया है। फोन कंपनियों को आदेश जारी हो गए हैं कि जो मैसेज इन शब्दों वाले हों, उन्हें कंपनियां ही रोक लें और आगे न जाने दें। पाकिस्तान की तहजीब जिस किस्म की जुबान और तौर-तरीकों को बुरा मानती है, उसे रोकने की नीयत से वहां की सरकार ने यह कदम उठाया है, लेकिन जैसा कि पूरी दुनिया में रोक का तजुर्बा रहते आया है, इस मामले में भी वहां की सरकार में बैठे लोगों ने ऐसे-ऐसे शब्दों को इस लंबी लिस्ट में जोड़ दिया है जिसका कि सेक्स या अश्लीलता से परे भी साधारण बातचीत में इस्तेमाल होता है। अब वहां डिपाजिट, टैक्सी, जीभ, पिछला दरवाजा, मूर्ख, छेद, शैतान, गुलाम, थूक, बंधक, कंडोम, समलैंगिक, के अलावा, एथलीट्स फुट जैसे मुहावरे भी रोक दिए गए हैं। ऐसे बड़े शब्द जिनका कोई हिस्सा किसी छोटे प्रतिबंधित शब्द वाला हो, उसे भी टेलीफोन आने-जाने नहीं देंगे।
यह रोक कुछ अधिक दूरी तक चली गई है और जिन जगहों पर किसी मजहब के आधार पर रोक लगती है तो वहां अतिउत्साही अफसर या नेता रोक को आसमान तक ले जाने की कोशिश करते हैं। लेकिन धर्म के अलावा भी कई किस्म की विचारधाराएं प्रतिबंधों का क्या हाल करती हैं यह भारत में भी आपातकाल के दौरान देखा जा चुका है जब आजादी और लोकतंत्र को लेकर गांधी और नेहरू की कही बातों को भी अगर अखबार अपने संपादकीय कॉलम में छापते थे तो उन्हें सरकार के खिलाफ बगावत मानकर उनके खिलाफ सेंसरशिप का कानून इस्तेमाल किया जाता था। आज भी हम भारत में हुसैन की पेंटिंग्स, महाराष्ट्र के पांडुलिपि-संग्रहालय, शोध संस्थान, दिल्ली में पाठ्यपुस्तक के लेख, जैसी बहुत सी बातों को प्रतिबंध का शिकार होते देखते हैं। लेकिन आज हम सेंसरशिप या गैरजरूरी रोक से परे की कुछ बात यहां करना चाहते हैं और पाकिस्तान की इस ताजा एसएमएस-रोक को हम इस चर्चा के शुरू करने का एक बहाना ही मान रहे हैं।
आज भारत में भी हम देखते हैं कि उम्र, ओहदे और रिश्ते से परे लोगों के बीच तरह-तरह के अश्लील या सेक्स-आधारित संदेश, लतीफे खुलकर आते-जाते हैं। जिन लोगों के बीच कभी रूबरू ऐसी मजाक का रिश्ता न रहा हो, वे लोग भी कहीं से आए हुए सेक्सी लतीफे को ज्यों का त्यों आगे बढ़ाते हुए दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते। यही हाल ई-मेल पर तस्वीरों को आगे बढ़ाते हुए होता है और तरह-तरह की सेक्स-आधारित वीडियो क्लिप सारे वक्त एक फोन से दूसरे फोन तैरते रहती है। टेक्नालॉजी ने लोगों के बीच रिश्तों के तौर-तरीकों को उलट-पुलटकर रख दिया है। हमारे अखबार को जो लोग लगातार पढ़ते हैं उन्होंने देखा होगा कि रोज छपने वाली एक छोटी सी नसीहत या सलाह में हम हर कुछ हफ्तों में इस बारे में लिखते हैं कि किस तरह लोगों को अपने मोबाईल फोन से सभी खराब या गलत बातों को, तस्वीरों को मिटाते चलना चाहिए क्योंकि कब उनका फोन अपने बच्चों या अपने बड़ों के हाथों में चला जाए, उसका कोई ठिकाना तो रहता नहीं। नतीजा यह होता है कि दो पीढिय़ों के बीच, या लिहाज वाले रिश्तों के बीच एक-दूसरे की नजरों में गिर जाने का एक खतरा हो जाता है या फिर उनके बीच लिहाज के रिश्ते खत्म होकर बेतकल्लुफी के रिश्ते बन जाते हैं जो कि पारिवारिक ढांचे के तहत ठीक नहीं होते। हम दो वयस्क दोस्तों के बीच मजाक या मजे के एसएमएस में किसी रोक-टोक को ठीक नहीं मानते इसलिए पाकिस्तान में इस रोक से बराबरी के दोस्ताना रिश्ते के मजाक का एक तरीका खत्म होने जा रहा है, इसलिए हम वैसी किसी रोक के बजाय लोगों के अपने-आप पर ऐसे काबू की चर्चा कर रहे हैं जो बेतकल्लुफ दोस्तों से परे के बाकी रिश्तों के मामले में इस्तेमाल होना चाहिए।
जब समाज ने रिश्तों को ऐसी शक्ल में नहीं ढाला है कि लोग एक-दूसरे से हर किस्म का मजाक कर सकें, तब सिर्फ तकनीकी सहूलियत के चलते रिश्तों की परिभाषा और उनका अंदाज इस तरह बदल जाए यह ठीक नहीं है। आज भी अगर भारत के लोग एक-दूसरे के मोबाईल फोन घर के भीतर अचानक किसी जरूरत से इस्तेमाल करने लगें और पिछले आए-गए संदेशों को देखें, फोन में जमा वीडिया क्लिप देखें तो एक-दूसरे की नजरों में गिरने की नौबत आ सकती है। भारत में एक अधिक उदार लोकतंत्र के चलते ऐसी भाषा पर रोक तो किसी कानून के तहत नहीं आएगी, लेकिन हम सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर लोगों से सावधानी बरतने की बात जरूर कहेंगे। हर कुछ हफ्तों में छोटी सी बात कहकर हम जो सलाह देते आए हैं उसे आज यहां इस बड़े कॉलम में दे रहे हैं क्योंकि हमारा मानना है कि यह राष्ट्रीय महत्व के किसी मुद्दे से कम अहमियत की बात नहीं है।
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