29 जुलाई 2012
संपादकीय
कर्नाटक से कल निकली वीडियो खबरों को देखें तो लगता है कि भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले इस आधुनिक कम्प्यूटर-राज्य को सत्तारूढ़ भाजपा की छत्रछाया में आक्रामक और हिंसक अपराधी हिंदू संगठन गुफा की तरफ ले जा रहे हैं। एक पर्यटन केंद्र के रिसॉर्ट में पार्टी मनाने को ठहरे हुए युवक-युवतियों पर हिंदू जागरण वेदिका के कार्यकर्ताओं ने टीवी कैमरों के साथ जाकर हिंसक हमले किए और कमरों के भीतर घुसकर, बाथरूम में घुसकर लड़कियों को निकला और उन्हें बुरी तरह मारा। ऐसा करते हुए उन्होंने एक तरफ कांगे्रस राज वाले असम की राजधानी गुवाहाटी में पिछले दिनों सड़क पर हुए इसी किस्म के हमले की याद दिला दी और कुछ बरस पहले कर्नाटक में ही एक दूसरे हिंसक अपराधी हिंदू संगठन श्रीराम सेना के किए गए हमलों की याद भी दिला दी जिनमें लड़कियों को पब से निकालकर दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया था। इन सभी मामलों में मीडिया ने भी बहुत हिंसक तरीके से हमलावरों का साथ दिया और बेकसूर लड़के-लड़कियों के चेहरों को शर्मनाक तरीके से टीवी पर, इंटरनेट पर डालकर उनके लिए सामाजिक तिरस्कार की गारंटी कर दी। हमारा यह मानना है कि ऐसे सामाजिक प्रताडऩा करने वाले मीडिया को भी अपराधी मानकर उसके जुर्म पर भी मुकदमा चलना चाहिए। गुवाहाटी में ऐसा शुरू भी हो गया है, और यह खुद मीडिया के समझने की बात है कि किसी के अपराधी साबित होने से पहले उसकी शर्मिंदगी में ऐसा भागीदार बनना उसके लिए कितना सही है? टीवी चैनलों के एक-दूसरे से आगे बढऩे की होड़ उन्हें हैवान भी बना रही है, मुजरिम भी बना रही है, और कई मामलों में यह सामने आया है कि ऐसी हिंसा को बढ़ावा देने का काम भी चैनलों ने किया है ताकि उन्हें सनसनीखेज रिकॉर्डिंग मिल सके।
अब देश के बहुत से राज्यों में लड़कियों और महिलाओं पर ऐसे हमले हो चुके हैं जो भारतीय संस्कृति के नाम पर किए जा रहे हैं और ऐसे लोग बरस-दर-बरस किसी सजा से दूर लगातार हिंसक काम कर रहे हैं। कर्नाटक में ही 2009 में ऐसे हमले करने वाले श्रीराम सेना के मुखिया को आज भी मीडिया के सामने बयानबाजी करते देखा जा सकता है जबकि इस गिरोह के गुंडों के चेहरे वीडियो रिकॉर्डिंग में साफ नजर आ चुके थे। पुलिस एक खानापूरी की तरह इनमें से कुछ लोगों की गिरफ्तारी करके इन्हें अदालत में पेश करती है और वहां से ये लोग जमानत पर बाहर आ जाते हैं। बेकसूर लड़कियों पर ऐसे हमले करने वाले गिरोह को, ऐसी हिंसक भीड़ को जमानत क्यों मिलनी चाहिए? ये जिस संस्कृति और विचारधारा की बात करते हुए दूसरों पर हमले करते हैं, उस सोच के मुताबिक वे बाकी समाज पर भी हमेशा के लिए खतरा रहेंगे, और कम से कम उनके मामले पर फैसला हो जाने तक उन्हें जेल में ही रखना चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का सारा कानून बेकसूर को बेहक बनाने वाला भी होता है और सारे मुजरिमों को लोकतंत्र का हर फायदा देने वाला भी। ऐसे में गुंडों के हौसले बढ़ते चलते हैं और बेकसूरों के हक छिनते चले जाते हैं। हिंदुस्तान की एक ऐसी तस्वीर दुनिया भर में सामने आ रही है जो सती प्रथा के दिनों जैसी ज्यादती वाली बदनामी देश को दुनिया भर में दिला रही है। और यह उस समय एक बहुत ही तकलीफदेह विरोधाभास लगता है जब याद पड़ता है कि कोई आधी सदी पहले से इस देश में एक महिला प्रधानमंत्री रहते आई है, और आज भी एक महिला इस देश की सत्ता की मुखिया है। फिर जिस कर्नाटक में जिस भाजपा का राज है, वह गऊ और भारत को दोनों को माता कहती है, और उसके समर्थक साम्प्रदायिक गुंडा-संगठन लगातार इस तरह की हिंसा करते हैं।
हिंदू साम्प्रदायिक संगठनों का यह नारा है कि भारतीय संस्कृति के खिलाफ जीवनशैली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन खुद हिंदू पौराणिक कथाओं में कृष्ण की रासलीला से लेकर अनगिनत लोगों के गंधर्व विवाह तक की मिसालें हैं, इसी हिंदू धर्म के भारत पर एकाधिकार के युग में लिखी गई श्रृंगार रस की अनगिनत कविताएं हैं, सैक्स पर लिखा गया दुनिया का एक सबसे महान गं्रथ कामशास्त्र है, और यह सब उन दिनों की बातें हैं जब भारत में भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के अलावा किसी और के पांव भी नहीं पड़े थे। और जिन आदिवासियों को यह हिंदू धर्म हमेशा से बंदर मानकर कुचलते रहा, जिनको मनुवादी सामाजिक-शरीर में पांव माना गया, उस आदिवासी समाज में दसियों हजार बरस से लड़के-लड़कियों के उन्मुक्त मेल-जोल की सामाजिक व्यवस्था रही, जो कि आज भी घोटुल की शक्ल में कई जगहों पर जारी है। ऐसे भारत में एक नकली भारतीय संस्कृति की वकालत करने के नाम पर साम्प्रदायिक, कट्टर और धर्मांध गुंडों के ऐसे हमले आज की नौजवान पीढ़ी पर नहीं होते, ये पश्चिमी और ईसाई संस्कृति को बदनाम करने के लिए होते हैं। क्या कोई इनसे यह पूछ सकते हैं कि कृष्ण की रासलीला की सारी कहानियां, कदम-कदम पर होने वाले गंधर्व विवाह क्या किसी पश्चिमी और ईसाई असर के तहत थे? क्या कालिदास और वात्सायन ने पश्चिम के प्रभाव में आकर पे्रम और देह वर्णन किया था?
देश की सबसे बड़ी अदालत को अब सीधा दखल देकर ऐसे तमाम हमलावरों को मुकदमों के फैसलों तक जमानत से दूर रखना चाहिए ताकि देश के अमनपसंद लोग हिफाजत से जी सकें। इसके अलावा ऐसे संगठनों पर कानूनी रोक लगानी चाहिए और इनकी धन-दौलत जब्त करनी चाहिए। तीसरी बात यह कि ऐसे सारे हमलावरों को हिंसा के, अपराध और नफरत के सारे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक तरह की दफाओं के तहत सजा देनी चाहिए। भारत की पे्रस परिषद को ऐसी रिकॉर्डिंग प्रसारित करने वाले चैनलों और ऐसी तस्वीरें दिखाने वाले बाकी मीडिया पर भी कार्रवाई करनी चाहिए जिनसे कि हमलों के शिकार लोगों की निजी जिंदगी उजागर होती है और जिससे कि वे सामाजिक प्रताडऩा के अगले खतरे में भी पड़ जाते हैं। ऐसा हुए बिना यह देश दुनिया की नजरों में लगातार गिरते चल रहा है, और इन हिंसक अपराधियों को यह समझ भी नहीं आ सकता कि एक देश को ऐसी बातों से कितना नुकसान झेलना पड़ रहा है, पड़ते रहेगा। और कर्नाटक के इन गुंडों से हम यह भी पूछना चाहते हैं कि जब इसी प्रदेश में एक हिंदू स्वामी के सेक्स की वीडियो फिल्में बाजार में आईं, तो यह संगठन कहां था और इसके दूसरे भाई-बंधु कहां थे?

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