18 जुलाई 2012
संपादकीय
कांगे्रस पार्टी, उसकी सरकारें और देश की संवैधानिक संस्थाओं में बिठाए गए उसके पसंदीदा कांगे्रसी, ये सब देश में एक तंग नजरिए वाली कट्टरता के हिमायती दिख रहे हैं। पिछले बरसों में मुंबई में डांस बार बंद किए गए और हजारों लड़कियों को एक अपेक्षाकृत सुरक्षित वयस्क मनोरंजन के पेशे से हटाकर बेरोजगारी या देह के धंधे की तरफ धकेल दिया गया। तब से लेकर अब तक महाराष्ट्र में कांगे्रस की गठबंधन सरकार वही रूख दिखा रही है और अब तो पार्टियों पर छापे मारकर एक पुलिस अफसर जो चाहे वह कर रहा है, शराबखाने जल्द बंद करवाए जा रहे हैं और कांगे्रस इस बात को भूल रही है कि मुंबई अब एक टापू जैसा शहर नहीं है वह पूरी दुनिया के कारोबार का एक हिस्सा है और उसे अपनी इस भूमिका के साथ जुड़ी हुई अंतरराष्ट्रीय उम्मीदें पूरी भी करनी हैं।
दूसरी तरफ पाठकों को याद होगा कि कुछ महीने पहले राष्ट्रीय महिला आयोग की कांगे्रसी अध्यक्ष ममता शर्मा ने देश की लड़कियों के लिए एक बेहूदा बयान दिया था कि उन्हें सेक्सी कहलाने पर बुरा नहीं मानना चाहिए। एक नया शब्दकोष गढ़ते हुए इस कांगे्रस नेता ने संवैधानिक पद पर बैठकर सेक्सी और सुंदर को एक बराबर करार दिया था। उस बयान पर हुए हंगामे के बाद कल इन्हीं ममता शर्मा का एक बयान आया है कि देश की महिलाओं को अपने कपड़ों के बारे में सावधान रहना चाहिए क्योंकि उन पर जितने हमले हो रहे हैं वे पश्चिम की अंधी नकल करने की वजह से हो रहे हैं। यह बात उन्होंने कांगे्रस राज वाले असम की राजधानी गुवाहाटी में हुए एक सार्वजनिक हमले के बारे में चर्चा करते हुए कही। इसी हमले की जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की जो टीम असम पहुंची थी, पहले तो वहां पहुंचते ही राज्य के परंपरागत स्वागत की बड़ी सी टोपी पहनकर इस टीम की महिलाएं देर तक खिलखिलाते हुए तस्वीरें खिंचवाती रहीं, और फिर जांच के बाद इस टीम की एक महिला ने सार्वजनिक सेक्स-हिंसा की शिकार लड़की का नाम उजागर करने का गैरजिम्मेदारी का काम भी भरी पे्रस कांफे्रंस में किया। इसके बाद मानवाधिकार आयोग को अपनी इस सदस्या को इस जांच से अलग करना पड़ा क्योंकि पूरे देश के मीडिया ने इस पर एक साथ थू-थू किया और इस सदस्या के खंडन को झुठलाते हुए उसके बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग प्रसारित की। लगे हाथों हम कांगे्रस पार्टी को यह भी याद दिलाना चाहेंगे कि हरियाणा में जब खाप पंचायतें पे्रमी जोड़ों की हत्याओं के फतवे जारी कर रही थीं, तब इस पार्टी का नौजवान, अमरीका-शिक्षित सांसद नवीन जिंदल इन पंचायतों का सार्वजनिक हिमायती बनकर सामने आया था। इंदिरा और सोनिया की अध्यक्षता वाली कांगे्रस पार्टी का यह कौन सा रूख है? आज से पौन सदी पहले इस पार्टी के सबसे बड़े नेता जवाहर लाल नेहरू अपनी अंतरराष्ट्रीय समझ की वजह से जिस तरह की उदार जिंदगी के हिमायती थे, वह पूरा सिलसिला उसी तरह कूड़ेदान में फेंक दिया गया है जिस तरह नेहरू की आर्थिक नीतियों को फेंक दिया गया है। आज इस पार्टी की मनोनीत, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष जिस तरह की गैरजिम्मेदारी के बयान दे रही है, उन बयानों को अगर नेहरू युग की महिलाओं पर लागू किया जाए तो उनमें से बहुतों के साथ तो फिर रोजाना ही छेड़छाड़ जायज ठहराई जाती।
कुछ साम्प्रदायिक ताकतें भारत में एक ऐसी पश्चिम-विरोधी, ईसाई-विरोधी संस्कृति को खड़ा करना चाहती हैं, जैसी पाखंडी संस्कृति इस देश में कभी नहीं रही। सैकड़ों बरस पहले बने हुए खजुराहो के मंदिर देखें, सैकड़ों बरस पहले वात्सायन के लिखे कामशास्त्र को देखें, श्रृंगार रस की संस्कृत से लेकर हिंदी तक की कविताओं में सुंदरता और पे्रम रस के मादक वर्णन को देखें, सैकड़ों बरस पुरानी भारतीय चित्रकला में नारीदेह की खूबसूरती देखें, हिंदू मंदिरों में देवी-देवताओं तक की मूर्तियों में देह-वर्णन देखें, इतिहास और साहित्य में सामाजिक जीवन का चित्रण देखें, किसी भी कोने से यह देश दकियानूसी और पाखंडी नहीं था। बाद में मुगलकाल से लेकर अंगे्रज राज तक, इस्लाम और ईसाईयत के असर में इस देश में कई तरह की तंगदिली समाज में लाई गर्इं, जो इन मजहबों के यहां आने के पहले तक नहीं थीं।
आज सोनिया गांधी की अगुवाई में कांगे्रस पार्टी को एक तरफ तो यह तोहमत झेलनी पड़ती है कि सवा अरब के देश में उसे हिंदुस्तानी मूल के कोई नेता प्रधानमंत्री बनाने के लिए नहीं सूझ रहे थे? और यह कि देश की सबसे पुरानी पार्टी को आज दूसरे देश से आई हुई एक महिला चला रही है। दूसरी तरफ इस महिला की जो अंतरराष्ट्रीय समझ होनी चाहिए, वह उसकी पार्टी और उसकी सरकारों में कहीं नहीं झलक रही। मुंबई से लेकर असम तक और राष्ट्रीय महिला आयोग से लेकर इस पार्टी की सरकारों के अफसरों तक, महिलाओं की इज्जत के मामले में इस पार्टी की समझ का दीवाला निकला हुआ है। यह पार्टी एक पुरूषप्रधान हिंसक सोच वाली कट्टर संस्कृति को उसी तरह बढ़ावा दे रही है जिस तरह शिवसेना या श्रीराम सेना देती हैं, जिस तरह से मुस्लिम पंचायतें या खाप पंचायतें फतवे जारी करती हैं।
वोटों को लेकर दहशत में इस कदर जीने से अच्छा है कि सही बातों को लेकर, एक सुधारवादी और प्रगतिशील सोच के साथ विपक्ष में बैठना। आज जब कांगे्रस पार्टी अपनी सरकारों के काम और अपने नेताओं के बयान में कोई खामी नहीं देखती तो इतिहास में उसकी यह खामी अच्छी तरह दर्ज होगी। इक्कीसवीं सदी के हिंदुस्तान के अठारवीं सदी की गुफा में ले जाना सोनिया गांधी के कार्यकाल के साथ दर्ज हो रहा है। एक तरफ इस देश में आसमान को चीरते हुए रॉकेट अंतरिक्ष तक उपग्रह ले जाने की शायद चौथाई या आधी सदी पूरी कर रहे हैं, और दूसरी तरफ मानो ये रॉकेट पिछली एक-दो सदी पीछे पहुंचकर देश को गुफा के भीतर ले जाकर छोड़ रहे हैं।
जब पूरा देश लड़कियों और महिलाओं पर हर दिन हजारों हमले देख रहा है, दर्जनों बलात्कार हर दिन दर्ज हो रहे हैं, और सैकड़ों लड़कियां इसका हौसला जुटाए बिना चुप रह जा रही हैं क्योंकि कांगे्रसराज में शिकायत करने पर उसकी मेडिकल जांच बाद में होगी, ममता शर्मा का पैनल उसकी फैशन जांच पहले करेगा। जिस देश में संविधान की कुर्सियों पर इस कदर बेरहम महिलाएं, एक महिला की अध्यक्षता वाली पार्टी बिठा रही है, उस देश में भला हिंसक हमलों की शिकार कौन सी लड़की या महिला इंसाफ की उम्मीद कर सकती है?
पिंकी प्रमाणिक नाम की खिलाड़ी की यह सेक्स-जांच हो रही है कि वह औरत है या मर्द। लेकिन इस देश में बहुत सी महिलाओं के बारे में हम उनके बयान पढ़कर ही यह बता सकते हैं कि वे हिंसक मर्दों के मुकाबले कहीं अधिक मर्द हैं।

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