24 जुलाई 2012
संपादकीय
आज अपना कार्यकाल पूरा कर रहीं भारत की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का जी विवादों से भरा नहीं है। अंधाधुंध और अभूतपूर्व महंगे और कुनबे से पटे विदेश प्रवासों को लेकर कड़वी खबरें आती रहीं, और उसके बाद उन्होंने पुणे में सैनिकों के लिए रखी जगह में से पांच एकड़ पर अपने लिए सरकारी मकान बनवाना शुरू कर दिया। मानो वह भी काफी नहीं था कि आज यह खबर है कि वे महाराष्ट्र के अपने गृहनगर अमरावती में एक संग्रहालय शुरू करने जा रही हैं जिनमें वे राष्ट्रपति की हैसियत से उन्हें दूसरे देशों के प्रमुखों एवं अन्य लोगों से मिले डेढ़ सौ तोहफे रखेंगी। यह संग्रहालय उनके परिवार के एक ट्रस्ट विद्या भारतीय प्रसारक मंडल की देखरेख में चलेगा। राष्ट्रपति भवन का इस बारे में कहना है कि ट्रस्ट ने इसके लिए अर्जी दी थी, और राष्ट्रपति भवन की संपत्ति को एक लिखित समझौते के तहत इस ट्रस्ट को उधार दिया जा रहा है, जिन्हें राष्ट्रपति भवन चाहेगा तो वापिस ले सकेगा। राष्ट्रपति भवन में जिस लिखित समझौते के तहत ये सामान दिए हैं, उसमें किसी समय-सीमा का कोई जिक्र नहीं है।
अब तक देश में परंपरा यह रही है कि सार्वजनिक पदों पर जो लोग रहते हैं, वे कार्यकाल के दौरान पद की वजह से उन्हें मिली तमाम किस्म की भेंट अपने दफ्तर में ही छोड़ जाते हैं, और वह सरकारी संपत्ति में गिनी जाती है, और उन्हें तोषखाना में रखा जाता है। ऐसे सामानों में से डेढ़ सौ सामान रिटायर हो रही राष्ट्रपति के पारिवारिक ट्रस्ट को इस तरह से उधार बताकर दे देना, एक बहुत ही गलत परंपरा की शुरूआत है क्योंकि आने वाले तमाम राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों के गृहनगर तो अलग-अलग जगहों पर होंगे ही, और इस तरह से बिखरे हुए संग्रहालय देश के किस काम के होंगे?
पाठकों को याद होगा कि इसी अमरावती में कुछ महीने पहले जब चुनाव हुए तो करोड़ या करोड़ों की नगदी के साथ राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बेटे की गाड़ी पकड़ाई थी। उसके बाद उसका क्या हुआ यह खबर याद नहीं पड़ती है, लेकिन ऐसी कई और छोटी-छोटी अप्रिय बातें उनके साथ जुड़ी रहीं। यह सिलसिला राष्ट्रपति के पद को आलोचना से परे रखने के तर्क को नाजायज ठहराता है। अभी-अभी हमने कल ही इस बारे में लिखा है कि किसी कुर्सी या दफ्तर के किसी अतिरिक्त सम्मान का हकदार नहीं बनाना चाहिए और उस जगह के कामकाज को देखकर ही सम्मान तय करना चाहिए। प्रतिभा पाटिल के ऐसे फैसले पर उनका क्या सम्मान बढ़ेगा? आज ही प्रतिभा पाटिल को लेकर यह कार्टून आया है कि वे दिल्ली से अपने शहर जाने के लिए बाली, ताहिती, होनोलुलु, वेंकुवर, रोम वगैरह होते हुए जाएंगी। इसी तरह की बातें रहीं जिनकी वजह से एक कार्यकाल के बाद दूसरे कार्यकाल के लिए प्रतिभा पाटिल का नाम तक किसी ने नहीं लिया। जिस यूपीए गठबंधन ने उन्हें राष्ट्रपति बनाया था, उसी की सत्ता जारी रहते हुए भी उनके दूसरे कार्यकाल पर कोई विचार तक नहीं किया गया। पिछले कुछ दिनों से एक दूसरी बात भी राष्ट्रपति पद के बारे में हो रही है कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका सम्मान किसी पद से बढ़ता है, और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनसे किसी पद का सम्मान बढ़ता है। अब प्रतिभा पाटिल के बारे में इन दो बातों में से कौन सी बात लागू होती है यह तय करना क्या कोई मुश्किल बात है?

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