संपादकीय
5 मार्च 2019

पटना से आने वाली, और पटना के बारे में सुप्रीम कोर्ट से आने वाली खबरें दिल दहलाती हैं कि अपने-आपको पाकसाफ सुशासन बाबू प्रचारित करने वाले नीतीश कुमार का बिहार आखिर चल कैसा रहा है। यूं तो हर राज्य में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो वहां की सरकार के लिए डूब मरने लायक होता है, लेकिन भारतीय लोकतंत्र में राजनीति दल और नेता बेशर्मी के ऐसे लाईफबेल्ट थोक में खरीदकर बैठे रहते हैं कि उन्हें डूबने की जरूरत ही नहीं पड़ती। बिहार का हाल इस मामले में बड़ा पुख्ता है, और आज वहां पर नीतीश के साथ भाजपा भी गठबंधन सरकार में शामिल है, और भाजपा का शुचिता का पुराना नारा भी किनारे धरा गया दिखता है।
अभी दो दिन पहले की एक भयानक तस्वीर सामने आई थी जब बिहार का एक बेटा कश्मीर में शहीद होकर ताबूत में बंद पटना एयरपोर्ट पर पहुंचा, तो वहां पर सरकार के कोई मंत्री, सत्तारूढ़ पार्टियों के कोई नेता नहीं पहुंचे थे, क्योंकि वे सब मोदी-एनडीए की उसी वक्त पटना में हो रही रैली में जुटे हुए थे, और बिहार की परंपरा के मुताबिक इस रैली में पहुंचे लोगों का बांधकर रखने के लिए वहां मंच पर एक अधनंगा नाच चल रहा था। इन दो तस्वीरों को साथ रखकर देखें तो ऐसा लगता है कि बेशर्मी के ऐसेे लाईफबेल्ट में छेद करके इन नेताओं को डुबा ही देना चाहिए। लेकिन मानो यह बात काफी नहीं थी, आज एक दूसरी खबर इसी पटना से आई है जिसमें एक और सरकारी बालिकागृह की बच्चियों ने दिल दहलाने वाला खुलासा किया है कि उन्हें किस तरह होटलों मेें ले जाकर देह के खरीददारों को सप्लाई किया जाता था, उनसे रेप किया जाता था। यह बच्चियां जब इस शेल्टर से भागीं, तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ है। और इस ताजा खुलासे को कई महीने पहले, पिछले बरस भांडाफोड़ हुए मुजफ्फरनगर बालिकागृह के संगठित और सामूहिक सरकारी-बलात्कार से जोड़कर देखना होगा जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार पर जुबानी कोड़े बरसाए हैं, सरकार को धिक्कारा है, और जांच राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को दे दी है। जिस अंदाज में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने राज्य के अफसरों ने बेशर्मी दिखाई, नालायकी दिखाई, और अदालत की तौहीन की, उससे यह साबित होता है कि मोटी चमड़ी का बना ऐसा लाईफबेल्ट वहां के अफसर भी पा चुके हैं, और शर्म से डूब मरने का कोई खतरा उनके सामने नहीं है।
इन तमाम बातों के बीच तीन दिन पहले का एक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान भी देखना जरूरी है जो कि बिहार से ही मोदी कैबिनेट में गए हैं। उन्होंने कहा था कि मोदी की पटना रैली में जो लोग नहीं पहुंचेंगे, वे साबित करेंगे कि वे हिंदुस्तान के साथ नहीं, पाकिस्तान के साथ हैं। एक किस्म से उन्होंने मोदी की रैली में न आने वालों को देशद्रोही और गद्दार कहा था, और इस पर उन्हीं के भागीदार, नीतीश कुमार की जेडीयू के नेताओं ने आपत्ति की थी। लेकिन बिहार के इस ताकतवर केंद्रीय मंत्री की साम्प्रदायिक बातें तो बरसों से चली आ रही हैं, और उसके बाद भी नीतीश कुमार लालू को छोड़ भाजपा के साथ गए ही थे। कुल मिलाकर बिहार का सरकारी माहौल, सत्तारूढ़ गठबंधन का माहौल उस राज्य की मिट्टीपलीद करने में लगा हुआ है, और नीतीश कुमार को चाहने वाले मीडिया के लोग उन्हें सुशासन बाबू लिखना जारी रखे हुए हैं।
(Daily Chhattisgarh)
5:00 PM
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