फरवरी-मार्च में दिल्ली में इतनी धुंध क्यों छाई है..?

संपादकीय
6 मार्च 2019



पाकिस्तान के आतंकी कैम्पों पर भारतीय वायुसेना के हमले के दावों में कितनी मौतें हुई हैं, इसे लेकर दिल्ली में जितने मुंह, उतनी बातें। एयरफोर्स, भारत सरकार, सरकार के अलग-अलग मंत्री, भाजपा के अलग-अलग नेता, इन सबने इतने किस्म की बातें कह दी हैं, कि पाकिस्तान में बैठे हुए भारत-विरोधी, या भारत के आलोचकों को खासा मसाला मिल गया है। दूसरी तरफ हिन्दुस्तान के लोगों को यह समझ नहीं पड़ रहा है कि कोई भी मौत न होने की बात कहने वाले भारतीय मंत्री एसएस अहलूवालिया सही कह रहे हैं, या ढाई सौ मौतें बताने वाले भाजपाध्यक्ष अमित शाह? फिर यह भी है कि पाकिस्तान पर बमबारी की अगली दोपहर जब भारतीय विदेश सचिव की दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस हुई, तो उसके कुछ मिनटों के भीतर वह उच्च पदस्थ अधिकारी कौन था जिसने मीडिया को ढाई-तीन सौ मौतों की खबर दी, और कुछ इस तरह दी, कि उसके नाम के बिना वह आंकड़ा मिनटों में देश भर में छा गया, और दिल्ली के मीडिया का मोहताज बाकी देश का बाकी मीडिया उसे ले उड़ा। अब जाकर यह समझ आ रहा है कि जिसे सैकड़ों मौतें कहा जा रहा है, उसका कोई जमीनी सुबूत पाकिस्तान से पश्चिमी मीडिया भी नहीं ढूंढ पा रहा है, और बहुत से पश्चिमी रिपोर्टरों को वहां पहुंचने पर पहाड़ी के सूने हिस्से में बम से बने कुछ गड्ढे मिले, कुछ पेड़ों को नुकसान दिखा, और एक जख्मी की खबर मिली जिसका घरेलू इलाज गांव में ही हो गया, और एक कव्वे की मौत गांव वालों ने मंजूर की। 
फिर मानो सरहद के दोनों तरफ की इतनी अलग-अलग पेश तस्वीरें काफी नहीं थीं, हिन्दुस्तान के बहुत से अलग-अलग नेता अलग-अलग आंकड़े और तस्वीरें पेश करने लगे। हिन्दुस्तान के कुछ सरकारी ओहदों से ऐसे नाम भी जारी किए गए जो कि पाकिस्तान में इस हमले में मारे गए बताए गए। अब कल पाकिस्तान ने जिन लोगों को अपनी जमीन पर आतंकी बताकर गिरफ्तार किया है, उनमें से कुछ ऐसे भी बताए गए हैं जिन्हें दिल्ली ने हमले में मारा हुआ बताया था। दिल्ली में अमूमन दिसंबर के पहले जो धुंध छाई रहती है, जिसमें हाथ को हाथ नहीं सूझता, कुछ वैसी ही धुंध इस बार फरवरी-मार्च में छाई हुई है जिसके चलते लोगों की नीयत जरूर एक चश्मे का काम कर रही है, और यह पुरानी बात सही साबित हो रही है कि जाकी रही भावना जैसी, प्रभू मूरत देखी तिन तैसी। सरहद के दोनों तरफ इस हमले को लेकर लोगों की सोच अपनी-अपनी राष्ट्रवादी, धार्मिक, और राजनीतिक हिसाब से चल रही है, और उसी हिसाब से एक कव्वे से लेकर तीन सौ इंसानी-आतंकियों की मौत के बीच लोगों के अपने-अपने आंकड़े हैं। फिलहाल सबसे ताजा आंकड़ा हिन्दुस्तान के विदेश राज्यमंत्री, और भूतपूर्व आर्मी चीफ जनरल वी.के. सिंह का है, जिन्होंने कहा है कि रात में मच्छर मार दवाई छिड़कने के बाद कोई यह गिनते नहीं बैठते कि कितने मच्छर मरे हैं। 
हिन्दुस्तान का जो पायलट पाकिस्तान में गिरे अपने विमान से जिंदा बच गया था, उसे वहां हिरासत में रखा गया था, और दो दिनों में पाकिस्तान ने खुद होकर उसकी रिहाई की घोषणा अपनी संसद में की थी। अब यह रिहाई कैसे हुई, क्यों हुई, इसे लेकर भी लोग अपने-अपने दावे कर रहे हैं, और कुछ लोग इसे छाती के एक नाप से जोड़कर बता रहे हैं, कुछ लोग सरहद के दूसरी तरफ की एक छाती के भीतर के दिल की रहमदिली बता रहे हैं। कुल मिलाकर एक बहुत गहरी धुंध हर तरफ है कि हिन्दुस्तान के हवाई हमले की एडवांस मुनादी अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे कर दी थी, और फिर सरहद के दूसरी तरफ के इमरानी फैसले की मुनादी भी इसी ट्रंप ने एडवांस में करके बताया था कि कोई अच्छी खबर आने वाली है, इस वक्त तक तो पाकिस्तानी पीएम ने भारतीय पायलट की रिहाई की मुनादी भी नहीं की थी। अब जब चुनावी मुहाने पर खड़े हिन्दुस्तान में जगह-जगह हवाई हमलों की तस्वीरों, और रिहा पायलट अभिनंदन के अभिनंदन के पोस्टर-होर्डिंग लग रहे हैं, और मोदी-भाजपा को जिताने की अपील की जा रही है, तब भी लोगों की समझ पर धुंध छाई दिख रही है कि यह काम वायुसेना ने किया, या भाजपा ने? इसके लिए किसे वाहवाही दी जाए? कई लोगों को यह भी समझ नहीं पड़ रहा है कि आने वाले चुनाव में वोट किसी पार्टी के निशान पर पड़ेंगे, या हवाई जहाज के निशान पर पड़ेंगे? ये सारे सवाल लोगों को बड़ा परेशान कर रहे हैं, और अच्छी बात यही है कि अभी पाकिस्तान में चुनाव नहीं है, महज हिन्दुस्तान में हैं, वरना ऐसे ही कुछ दूसरे पोस्टर-बैनर सरहद के दूसरे तरफ भी वोट मांगते नजर आते, और दिल्ली की धुंध रावलपिंडी तक बिखरी हुई ऐसी नजर आती, कि कुछ नजर नहीं आता। फिलहाल चूंकि सवाल पूछना गद्दारी के दर्जे में आता है, इसलिए लोगों को घर बैठे राह देखनी चाहिए कि जब धुंध साफ होगी, तब हकीकत दिखेगी। हो सकता है कि तब तक हिन्दुस्तान में चुनाव हो चुके रहें, और चुनाव आयोग कोई मौसम वैज्ञानिक तो है नहीं कि वह ऐसी धुंध को मिटा सके, और वोटरों को देखने की ताकत दे सके।  

(Daily Chhattisgarh) 

5:00 PM

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