भ्रष्टाचार के लिए मर्दों से बच्चे पैदा करवाने वाली सरकारें...

24 जुलाई 11
राजस्थान की एक खबर है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों और डॉक्टरों ने मिलकर केंद्र सरकार की योजना में घपला करते हुए प्रसूति के झूठे मामले बनाए जिनमें मर्दों को भी मां बना दिया, बूढ़ी महिलाओं के बच्चे पैदा करवा दिए और एक महिला को साल भर में चौबीस बार मां बनना दिखा दिया। यह वह देश है जहां पर गरीबों को इलाज नसीब होने में दिक्कत जा रही है। दूसरी तरफ देश भर में जगह-जगह स्वास्थ्य विभाग का काम हर किस्म के भ्रष्टाचार का शिकार है। उत्तरप्रदेश में तो एक के बाद एक कई स्वास्थ्य अधिकारियों की हत्याएं हुईं ताकि शायद वहां हुए हजारों करोड़ के घोटाले दबे रहें। मायावती सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़ा माहौल स्वास्थ्य घोटाले से बना है। छत्तीसगढ़ में भी पिछले बरसों में लगातार इस विभाग में भ्रष्टाचार ने रिकॉर्ड तोड़ दिए और बड़े-बड़े भ्रष्ट अफसर आयकर छापों का शिकार हुए, सीबीआई की जांच चली, फरार रहे और उनके पास सैकड़ों करोड़ का कालाधन मिलने की बात जांच एजेंसियों ने सामने रखी।
इस देश में धर्म और ईश्वर का इतना बोलबाला है और लगभग पूरा देश आस्तिक और आस्थावान है इसलिए कभी-कभी यह हैरानी होती है कि गरीबों से पटे हुए इस देश में ऐसे आस्तिक लोग इतने बेबस-बीमारों का हक कैसे खाते हैं? लेकिन फिर हमारी स्थाई समझ काम आती है कि धर्म और ईश्वर पर आस्था किसी को भी अपराध करने से नहीं रोकते बल्कि उन्हें कुछ दान करके, कुछ पूजा-पाठ करके अपराधबोध से मुक्त हो जाने की छूट जुटा देते हैं। लेकिन इस बात से परे अगर हम यह देखें कि केंद्र सरकार से आए हुए हजारों करोड़ रुपए अगर गरीबों के इलाज के बजाय सत्ता हांक रहे लोगों की जेबों में चले जाएं तो इस देश के गरीब तबके को वक्त के कितने पहले मर जाना होता है? और इतनी काली कमाई करने वाला तबका फिर सत्ता को अपनी जेब में रखने की ताकत उसी तरह हासिल कर लेता है जिस तरह कर्नाटक में कुछ मंत्रियों ने अपनी पार्टी के भीतर हासिल की हुई है। भ्रष्टाचार के एक सीमा से बढ़ जाने के बाद उसमें अपने-आपको बचाने के लिए ढाल खड़ी कर लेने की आर्थिक ताकत और आ जाती है।
केंद्र सरकार को उसकी सौ फीसदी रकम से राज्यों में चलने वाली योजनाओं पर सीधी निगरानी रखनी चाहिए और इसमें हम केंद्र-राज्य संबंधों में कोई टकराव नहीं देखते। राज्यों के पास केंद्र की योजनाओं पर अपने अमले के हाथों अमल की सहूलियत तो रहती ही है, इन पर अगर कोई केंद्रीय जांच एजेंसी भी नजर रखे तो उसमें हम कोई बुराई नहीं देखते। छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की राशन-रियायत जितनी कामयाबी से गरीब तक पहुंच रही है, वैसा देश के बहुत कम राज्यों में हो रहा है और लाखों करोड़ रुपए साल की सबसिडी कई राज्यों में उन लोगों के हाथों जा रही है जो बाद में चुनाव में उसका इस्तेमाल करके किसी भी ईमानदार विरोधी के खिलाफ जीत खरीद लेने की हालत में आ जाते हैं या फिर अगर वे अफसर हैं तो वे अपने लिए किसी कमाऊ कुर्सी को खरीदने की ताकत बची पूरी नौकरी के लिए पा लेते हैं। इसलिए हम सरकारी भ्रष्टाचार से करोड़पति या अरबपति बनने वाले नेताओं और अफसरों को सिर्फ देश के इतनी रकम के नुकसान का जिम्मेदार नहीं मानते बल्कि सरकारी कार्रवाई, अदालती मुकदमे और जांच एजेंसियों के काम को खरीद लेने की उनकी ताकत को भी हम आज के भ्रष्टाचार से उपजने वाला पेड़ देखते हैं।
इसलिए केंद्र सरकार को अपनी योजनाओं पर अधिक नजर रखने, उनकी अधिक जांच करने, उन पर सीधे कार्रवाई करने का अधिकार रखना चाहिए। दूसरी बात यह भी है कि जो जनप्रतिनिधि संसद या विधानसभा के लिए चुने जाते हैं वे भी अगर अपने इलाकों में चौकन्ना रहेंगे तो ऐसा भ्रष्टाचार नहीं हो सकता। सरकार में भ्रष्टाचार दबे-छुपे कम होता है, खुलेआम अधिक होता है। इसलिए जब कभी कोई संगठित भ्रष्टाचार सामने आता है तो उससे उस इलाके के जनप्रतिनिधियों पर दो में से एक बात तो लागू होते दिखती ही है। वे या तो लापरवाह रहते हैं या भ्रष्टाचार में हिस्सेदार रहते हैं। राजस्थान में इतने बड़े पैमाने पर मर्दों के बच्चे पैदा होने दिखाया जाए या एक औरत को साल भर में चौबीस बच्चे होते दिखाया जाए और यह बात किसी चौकन्ने जनप्रतिनिधि तक न पहुंचे ऐसा हम नहीं मान सकते। हमारा अनुभव बताता है कि अगर नेता और अफसर अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हैं तो ऐसा भ्रष्टाचार हो ही नहीं सकता। अगर कुछ लोग भ्रष्ट हैं तो कुछ दूसरे लोग ईमानदार जरूर निकल आते हैं जिनसे कि भांडाफोड़ हो सके। लेकिन देश में जगह-जगह इन बरसों में यह भी हुआ है कि भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले लोगों की हत्याएं की गईं और अनगिनत ऐसे मामले हुए जिनमें सरकार ने ऐसे लोगों को प्रताडि़त करने के कई रास्ते निकाल लिए। भारतीय लोकतंत्र में अदालती रास्ता इतना कमअसर है कि वह लोगों की मदद नहीं कर पाता और जब सरकार कहर बनकर किसी पर टूट पडऩा चाहती है तो वह अपने-आपको कड़कती बिजली वाले काले अंधेरे आसमान के नीचे पाता है। ऐसे में केंद्र सरकार को अपनी योजनाएं की जांच अधिक दूर तक करना चाहिए और इसके पहले कि उसकी दी गई बहुत बड़ी रियायतें पूरी तरह लुट जाएं, उसे कार्रवाई करना चाहिए। राजस्थान की जिस खबर को लेकर हम यहां लिख रहे हैं, वह केंद्र सरकार के लिए भी शर्मनाक है क्योंकि दोनों जगहों पर एक ही पार्टी का राज है।

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