कल से टीवी के परदों पर एक दिलचस्प खबर चल रही है कि शराब बनाने वाली एक कंपनी के एक एक इश्तहार को लेकर क्रिकेट खिलाड़ी हरभजन सिंह की मां ने कंपनी को नोटिस दिया है कि इस विज्ञापन में भज्जी का मजाक उड़ाया गया है। इस विज्ञापन में महेंद्र सिंह धोनी भी हैं और इन दोनों के बीच धोनी, भज्जी का मजाक उड़ा रहे हैं ऐसा भज्जी की मां का मानना है। इस खबर से भारतीय क्रिकेट खिलाडिय़ों के इश्तहारों से कमाई के कारोबार की तरफ ध्यान खिंचता है और साथ ही यह भी लगता है कि दारू कंपनी के एक लुके-छुपे इश्तहार को करने के पहले क्या इस क्रिकेट खिलाड़ी को यह समझ नहीं आया कि उससे उसकी इज्जत बढऩे वाली है या घटने वाली है? अब यह झगड़ा कुछ और आगे तक इसलिए चलते दिख रहा है कि खेलकूद के धंधे के एक बड़े मालिक और इस शराब कंपनी के मालिक, सांसद और खबरों में बने रहने के शौकीन विजय माल्या ने इस विज्ञापन को हटाने से मना कर दिया है। कल के दिन हमें जरा भी हैरानी नहीं होगी अगर यह पता लगेगा कि यह पूरा टंटा हरभजन और माल्या ने मिलकर और सोच-समझकर किया था ताकि इश्तहार की चर्चा से सामान और अधिक बिके। जो बात आज यहां प्रासंगिक नहीं है लेकिन फिर भी उसे हम यहां एक लाईन में लिख देना चाहते हैं वह यह कि सिगरेट और शराब के इश्तहारों पर लगी रोक के बावजूद उसी ब्रांड से कुछ ऐसे सामानों की बिक्री का नाटक करते हुए इश्तहार दिए जाते हैं जिनका कोई बाजार नहीं है। अगर है भी तो भी इन सामानों पर उतना ही टैक्स लगना चाहिए जितना कि उसी कंपनी की बनाई हुई शराब पर लगता है। लेकिन जो कारोबार ताकतवर होता है वह सरकार की टैक्स नीति को बनवाता है, बिगड़वाता है और जेब में लेकर चलता है। इसलिए अब हम इस विज्ञापन की बात पर लौटें।
जब इस देश के क्रिकेट खिलाडिय़ों ने अपने बाजार के लिए अपने एजेंट तैनात कर रखे हैं और वे यह तय करते हैं कि खिलाड़ी कहीं आटोग्राफ भी देंगे या नहीं, तो फिर किसी विज्ञापन से उनका अपमान हो रहा है या नहीं यह तो पहले से तय हो जाने वाली बात है। कल ही की बात है कि युवराज सिंह ने ट्विटर पर यह लिखा कि वे लंदन में आक्सफोर्ड स्ट्रीट पर एचएमवी की दूकान पर शाम एक घंटा रहेंगे और वे सिर्फ वल्र्ड कप की अधिकृत डीवीडी पर ही आटोग्राफ देंगे, इसलिए लोग किसी और चीज पर उनसे आटोग्राफ न लें। इस तरह जब कंपनियां अपने सामान को बेचने के लिए क्रिकेट खिलाडिय़ों को ढेर-ढेर पैसा देती हैं तो एग्रीमेंट के समय ही यह तय हो जाता होगा कि उन्हें कैसे नाचना है या क्या गाना है। यह लेकिन एक बहुत ही अजीब बात है कि एक वयस्क खिलाड़ी हरभजन सिंह खुद मामला-मुकदमा लडऩे के बजाय अपनी मां से विजय माल्य की कंपनी को नोटिस दिलवा रहे हैं, या वे खुद दे रही हैं।
आज टीवी के बहुत से रियलिटी शो देखें तो उसमें ये तमाम क्रिकेट खिलाड़ी नाचते-गाते दिखते हैं और इनमें से हर बात के लिए वे ढेरों पैसा भी लेते हैं। देश के बाकी तमाम खेलों और खिलाडिय़ों को कुचलते हुए क्रिकेट ने जो सुलूक दूसरे खेलों और दूसरे खिलाडिय़ों के साथ किया है उसकी वजह से अब क्रिकेट के शौकीन लोग मशहूर खिलाडिय़ों की वाहवाही चाहे करें उनके बाजारू धंधों को लेकर शायद ही किसी की हमदर्दी होगी। और एक इश्तहार को लेकर मान और अपमान का नोटिस जब रवाना हो चुका है तो लग रहा है कि यह क्रिकेट खिलाड़ी झगड़ालू होने की अपनी पुरानी इमेज के मुताबिक ही अभी भी चल रहा है। लोगों को याद होगा किस तरह साइमंड्स से मैदान पर बहस होने पर भज्जी ने उसे एक बंदर करार देते हुए उस तरह चिढ़ाया था। एक आदिवासी मूल के खिलाड़ी का वैसा मजाक करना एक नस्लवादी हरकत भी थी लेकिन वह बात भी एक मामूली कार्रवाई और शायद जुर्माने के बाद आई-गई हो गई थी। अब जब एक विज्ञापन को लेकर भज्जी को यह लग रहा है कि उसमें धोनी से उनका मजाक उड़वाया गया है तो यह बात हंसी-मजाक की समझ की कमी भी बताती है। हास्यबोध अगर हो तो कई तरह की बातें टल सकती हैं और खुशवंत सिंह से लेकर नवजोत सिंह सिद्धू तक बहुत से लोग मजाक करते और मजाक झेलते आए हैं। इस फिजूल के विवाद से सिर्फ दारू कंपनी का भला होगा और अगर ऐसा नकली झगड़ा खड़ा करने का कोई सौदा भज्जी ने माल्या से नहीं किया है तो इससे इस खिलाड़ी की इज्जत कोई बढऩे नहीं जा रही है। यह बात तो हर किसी को पहले से मालूम थी कि वे दारू कंपनी के सामान का विज्ञापन करने जा रहे हैं, दारू की बिक्री को बढ़ाने के लिए विज्ञापन करने जा रहे हैं, तो इसे लेकर बहुत रोना-धोना भज्जी को कोई हमदर्दी नहीं दिलाएगा।
जब इस देश के क्रिकेट खिलाडिय़ों ने अपने बाजार के लिए अपने एजेंट तैनात कर रखे हैं और वे यह तय करते हैं कि खिलाड़ी कहीं आटोग्राफ भी देंगे या नहीं, तो फिर किसी विज्ञापन से उनका अपमान हो रहा है या नहीं यह तो पहले से तय हो जाने वाली बात है। कल ही की बात है कि युवराज सिंह ने ट्विटर पर यह लिखा कि वे लंदन में आक्सफोर्ड स्ट्रीट पर एचएमवी की दूकान पर शाम एक घंटा रहेंगे और वे सिर्फ वल्र्ड कप की अधिकृत डीवीडी पर ही आटोग्राफ देंगे, इसलिए लोग किसी और चीज पर उनसे आटोग्राफ न लें। इस तरह जब कंपनियां अपने सामान को बेचने के लिए क्रिकेट खिलाडिय़ों को ढेर-ढेर पैसा देती हैं तो एग्रीमेंट के समय ही यह तय हो जाता होगा कि उन्हें कैसे नाचना है या क्या गाना है। यह लेकिन एक बहुत ही अजीब बात है कि एक वयस्क खिलाड़ी हरभजन सिंह खुद मामला-मुकदमा लडऩे के बजाय अपनी मां से विजय माल्य की कंपनी को नोटिस दिलवा रहे हैं, या वे खुद दे रही हैं।
आज टीवी के बहुत से रियलिटी शो देखें तो उसमें ये तमाम क्रिकेट खिलाड़ी नाचते-गाते दिखते हैं और इनमें से हर बात के लिए वे ढेरों पैसा भी लेते हैं। देश के बाकी तमाम खेलों और खिलाडिय़ों को कुचलते हुए क्रिकेट ने जो सुलूक दूसरे खेलों और दूसरे खिलाडिय़ों के साथ किया है उसकी वजह से अब क्रिकेट के शौकीन लोग मशहूर खिलाडिय़ों की वाहवाही चाहे करें उनके बाजारू धंधों को लेकर शायद ही किसी की हमदर्दी होगी। और एक इश्तहार को लेकर मान और अपमान का नोटिस जब रवाना हो चुका है तो लग रहा है कि यह क्रिकेट खिलाड़ी झगड़ालू होने की अपनी पुरानी इमेज के मुताबिक ही अभी भी चल रहा है। लोगों को याद होगा किस तरह साइमंड्स से मैदान पर बहस होने पर भज्जी ने उसे एक बंदर करार देते हुए उस तरह चिढ़ाया था। एक आदिवासी मूल के खिलाड़ी का वैसा मजाक करना एक नस्लवादी हरकत भी थी लेकिन वह बात भी एक मामूली कार्रवाई और शायद जुर्माने के बाद आई-गई हो गई थी। अब जब एक विज्ञापन को लेकर भज्जी को यह लग रहा है कि उसमें धोनी से उनका मजाक उड़वाया गया है तो यह बात हंसी-मजाक की समझ की कमी भी बताती है। हास्यबोध अगर हो तो कई तरह की बातें टल सकती हैं और खुशवंत सिंह से लेकर नवजोत सिंह सिद्धू तक बहुत से लोग मजाक करते और मजाक झेलते आए हैं। इस फिजूल के विवाद से सिर्फ दारू कंपनी का भला होगा और अगर ऐसा नकली झगड़ा खड़ा करने का कोई सौदा भज्जी ने माल्या से नहीं किया है तो इससे इस खिलाड़ी की इज्जत कोई बढऩे नहीं जा रही है। यह बात तो हर किसी को पहले से मालूम थी कि वे दारू कंपनी के सामान का विज्ञापन करने जा रहे हैं, दारू की बिक्री को बढ़ाने के लिए विज्ञापन करने जा रहे हैं, तो इसे लेकर बहुत रोना-धोना भज्जी को कोई हमदर्दी नहीं दिलाएगा।
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