ऐेसे सामूहिक बलात्कार पर सोचने की कुछ और बातें

17 जुलाई 2011
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नई राजधानी के लिए जो इलाका तय हुआ है वहां के एक सुनसान पड़े हिस्से में गांव की एक लड़की अपने दोस्त के साथ घूम रही थी कि कुछ गुंडों ने उन्हें घेरा और उस लड़की से वहीं सामूहिक बलात्कार किया। यह घटना चूंकि राजधानी की है इसलिए यह एक बहुत बड़ा अपराध लग रही है, और चूंकि उत्तरप्रदेश और दिल्ली में आए दिन सामूहिक बलात्कार की खबरें खड़ी हो रही हैं इसलिए भी रायपुर की यह खबर अधिक सनसनीखेज लग रही है। लेकिन इस घटना के पुलिस-पहलू से परे भी इसे देखना होगा तभी जाकर आगे ऐसे हादसे रूक सकेंगे।
शहर से बाहर एक सुनसान इलाके में अगर कोई जवान लड़का-लड़की घूम रहे हैं तो उससे उन्हें वहां एक अकेला वक्त तो मिल रहा है लेकिन वह बिना खतरे के नहीं आता। भारत में अधिकांश जगहों पर ऐसे जोड़ों को खतरा झेलना पड़ सकता है क्योंकि वहां से अगर बदमाश लोगों की टोली निकल रही है तो उनके इरादे खतरनाक हो सकते हैं। ऐसी नौबत के पीछे ऐसे जवान बदमाशों की इस जरूरत को भी समझना होगा कि अपने सुख के लिए उन्हें कानूनी रूप से कोई देह खरीदना मुमकिन नहीं है क्योंकि वेश्यावृत्ति भारत में एक अपराध है। लड़के-लड़कियों का साथ में उठना-बैठना या किसी बंद कमरे में मिलना कस्बाई छत्तीसगढ़ में तब तक मुमकिन नहीं है जब तक कि ऐसे लोगों को अपने खुद के घर कभी हासिल हों। लेकिन अपने सूने घर से परे अगर जवान लड़के-लड़कियां कहीं मिलना चाहते हैं तो न तो उनके लिए होटलों कमरे आसानी से मिल सकते, वहां पुलिस छापामार कर उन्हें वेश्यावृत्ति के मामले में गिरफ्तार कर सकती है, न ही वे शहर के बाग-बगीचों में ठीक से मिल सकते, जहां पर कि बाकी लोगों को उनका करीब बैठना अश्लील लग सकता है। मतलब यह कि जब समाज प्रेम के साधारण प्रदर्शन को भी बर्दाश्त नहीं करता, करना नहीं चाहता तो जवान लोगों को सुनसान जगहों पर जाने की जरूरत भी लगेगी और उन्हें वैसी सुनसान जगहों पर देखकर कुछ लोगों का एक जुर्म करने का हौसला भी पैदा होगा।
इस ताजा घटना को लेकर हम यही कह सकते हैं कि पुलिस का कितना भी दबाव, अदालत का कितना भी डर ऐसे अपराधों को नहीं रोक सकता जो इंसानी जरूरतों के  इंसानी दुस्साहस के साथ जुड़ जाने के बाद पैदा होते हैं। न ही सुनसान इलाकों की ऐसी पुलिस चौकसी हो सकती कि हर जोड़े की हिफाजत की जा सके। इसलिए समझदारी की बात यही है कि समाज अपने नजरिए को हकीकत को मानने वाला बनाए। आज जब इस देश की संस्कृति में जवान लड़के-लड़कियों का मिलना रोका नहीं जा सकता, वे जब साथ-साथ पढ़ रहे हैं, काम कर रहे हैं, मोबाइल और मोबाइक के जमाने में उनका घूमना-फिरना एक आम बात हो गई है, तो उनकी आज के जमाने की जरूरतों को एक कानूनी और सुरक्षित तरीके से पूरा करने की जरूरत है। इसके बिना समाज में बलात्कार, आसपास के लोगों का दूसरे किस्म का देहशोषण, बच्चों के साथ बुरा सुलूक, वेश्याओं के साथ असुरक्षित संबंध जैसे बहुत से खतरे बढ़ते चल रहे हैं। भारत का आज का गैरमहानगरीय इलाका बहुत ही पाखंडी मानसिकता के साथ जी रहा है जहां पर कि कुछ लोग यह मानकर, और साबित करते हुए चल रहे हैं कि भारत की संस्कृति में प्रेम कभी था ही नहीं। जबकि यहां का इतिहास और पुराण कृष्ण की तरह-तरह की रासलीलाओं से लेकर वात्सायन के विस्तृत सेक्स-ग्रंथ तक से भरा है और श्रृंगार रस का साहित्य भारत के एक युग में पहाड़ सा पैदा हुआ है। ऐसे देश में एक राजनीतिक सोच भारतीय संस्कृति के एक फर्जी इतिहास का दावा करते हुए प्रेम के खिलाफ हिंसक आंदोलन चलाती है। हिन्दू धर्म के ठेकेदार बनते हुए लाठियां लेकर ये लोग वेलेंटाइन डे पर, नए साल पर जिस तरह से प्रेमी-प्रेमिकाओं पर, दोस्त लड़के-लड़कियों पर हमले करते हैं उनको रोकने में सरकारों की भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखती। यह माहौल आज की नौजवान पीढ़ी को ऐसे लठैतों की नजरों से बचने पर मजबूर करता है। और चूंकि परिवारों के लोग भी अपने जवान बच्चों की जरूरतों को नहीं समझते इसलिए यह पीढ़ी कहीं कोने ढूंढती है तो कहीं कोई दूसरी खाली जगहें। हम यहां पर यह भी लिखना चाहते हैं कि एक नौजवान पीढ़ी की शारीरिक और मानसिक जरूरतों को कुचलते हुए अगर कोई समाज अपने आपको बहुत शुद्धता पर टिका समाज मानता है तो वह ऐसी पीढ़ी के सामाजिक योगदान भी संभावनाओं को पहले कुचलता है। अपनी अपूरित जरूरतों के साथ भड़ास और कुंठा से जीने वाले नौजवान अपने समाज और देश-प्रदेश में अपनी पूरी क्षमता से कुछ नहीं जोड़ पाते। इंसानी ताकत से दुनिया के जो देश आगे बढ़े हैं उन सब में इंसान को बहुत बड़ी निजी आजादी मिलने का इतिहास है। जो देश वर्तमान की जरूरत को नहीं समझता, उस देश का भविष्य कभी उसकी संभावनाओं जितना अच्छा नहीं हो सकता। भारत का छत्तीसगढ़ जैसा इलाका इसी तरह अपनी संभावनाओं को खो रहा है। अपनी जवान पीढ़ी में अगर भड़ास बोई जा रही है, तो उससे कभी बहुत मीठे फल मिल भी नहीं सकते।

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