छोटी सी बात

छोटी सी बात
किसी बात को करना ही हो, तो उसे लिखकर सामने रखें। याददाश्त एक सीमा से अधिक काम नहीं आती। फिर इंसानी याददाश्त जिस रफ्तार से बढ़ती है, उससे हजार गुना रफ्तार से पिछली सदी में काम बढ़े।

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