दुनिया को बेहतर बनाने के लिए


किसी ने अगर आपकी एक छोटी सी भी मदद की है, तो आपकी जिम्मेदारी यह बनती है कि उसे एक बड़ी सी गांठ बनाकर अपनी याद में रख लें। ऐसा अगर आप नहीं करते हैं, तो जिससे आपको एक मदद मिली है, वह शायद उससे मिलने वाली आखिरी मदद भी हो। इस बात को कोई पसंद नहीं करते कि वे लोगों पर कोई अहसान करें, या उनकी कोई चाहे मामूली ही मदद करें, और उसे लोग भुला दें। 
सही बात तो यह होती है कि किसी के उपकार के जवाब में आप अपनी क्षमता का कुछ ऐसा जवाबी काम करें कि आपकी बड़ी मदद करने वाले लोगों को भी आपकी किसी छोटी सी बात से यह लगे कि आप अच्छे इंसान हैं जो मदद को याद रखते हैं। इससे सिर्फ आपका फायदा नहीं होता, मददगार लोगों को इससे और लोगों की मदद करने का हौसला भी मिलता है। दरियादिली के जवाब में अगर फायदा पाने वाले लोग याद भी न रखें तो ऐसा दरिया धीरे-धीरे सूख भी सकता है, और फिर वह न आपके काम आएगा न किसी और के। 
यह कहीं जरूरी नहीं होता कि कोई सक्षम, संपन्न या ताकतवर व्यक्ति आपके किसी बड़े काम आए तो आप भी उतना ही बड़ा काम उनके लिए करें। आपकी कृतज्ञता की भावना उतनी बड़ी रहे, वही काफी होता है। अपने बच्चों को भी यह बात हमेशा सिखाते रहें कि अहसानमंद रहना एक बड़ी खूबी की बात है, और किसी के अहसान को भुला देना एक बहुत बड़ी खामी है। इस पर जरा सा सोचकर देखें, और बच्चों को यह बात सिखाते-सिखाते आपको खुद भी ऐसा करने की आदत पड़ जाएगी जो दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में मदद करेगी। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें