डॉ. चिश्ती को अब पूरी तरह बिदा करें


10 मई 2012
संपादकीय
पाकिस्तान से अजमेर आए हुए और हत्या के एक मामले में फंस गए डॉ. खलील चिश्ती को सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान जाने की इजाजत दे दी है। उन्हें एक निचली अदालत से अठारह बरस चले मुकदमे के बाद उम्रकैद सुनाई गई थी और वे जेल में थे, जहां से उन्हें सेहत की वजह से जमानत मिली थी। बहुत खस्ता हाल में चल रहे डॉ. चिश्ती की रिहाई के लिए इन दोनों देशों के अलावा दुनिया भर से लोगों ने अपील की थी। अब कुछ शर्तों के साथ अदालत ने उन्हें पाकिस्तान जाने की छूट दी है और कुछ महीने बाद उन्हें पेशी पर वापिस आना होगा। आज भी वे बिना सहारे चल-फिर नहीं पाते। इसके साथ-साथ पाकिस्तान की जेल में तीस बरस से बंद सरबजीत नाम के एक हिंदुस्तानी कैदी की रिहाई की बात फिर जोर पकड़ रही है जिसके लिए पाकिस्तान के ही एक मानवाधिकार पे्रमी मंत्री बरसों से कोशिश कर रहे हैं। 
इन दोनों देशों में चौथाई सदी से अधिक से भी कैदी बंद हैं और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर बड़ी नाराजगी जाहिर की थी कि भारतीय जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदी रिहा करने के बारे में सरकार क्या कर रही है? कल तक जो एक देश था वह अब दो देश बनकर आपस में एक-दूसरे के लिए इस कदर शक-शुबहे से घिरे हुए हैं कि एक-दूसरे के चरवाहे और एक-दूसरे के मछुआरे भी जब पकड़ा जाते हैं तो उनकी शायद पूरी जिंदगी ही जेलों में कट जाती है। आज लगातार भारत और पाकिस्तान के बीच सद्भावना की एक मांग चल रही है। जनता दोनों तरफ यह चाहती है कि सरहद के आरपार एक ऐसा अमनचैन कायम रहे कि फौज पर पैसों की बर्बादी रूके और सियाचिन जैसे इलाके में तैनात फौजियों की निहायत गैरजरूरी बर्फीली मौत का सिलसिला खत्म हो। दोनों देशों में गरीबी और भुखमरी बहुत अधिक है और कुपोषण के शिकार बच्चों से खुद सरकारी आंकड़े लबालब हैं। ऐसे में तनाव को कम करने के लिए जो कुछ हो सकता है, वह होना चाहिए। सरकारों में बैठे हुए लोग तो कई तरह की औपचारिकताओं के शिकार रहते हैं, इसलिए जनता के बीच के लोगों को यह कोशिश करनी होगी कि हर दिन कोई न कोई ऐसी वजह सामने आए जिससे सरहद के एक तरफ का भरोसा सरहद के दूसरी तरफ बढ़ सके। 
दोनों देशों से अगर बहुत छोटे-छोटे शक में जेलों में बंद कर दिए गए दूसरे देश के लोग कानूनी रास्ता निकालकर या माफी देने के विशेषाधिकार का उपयोग करके छोड़े जाते हैं, तो ऐसे छोटे-छोटे लोग अपने घर-गांव लौटकर एक सद्भावना का वातावरण बना सकेंगे। इसके बिना जंग की बात और दहशतगर्दी की बात करने वाले कट्टर और युद्धोन्मादी लोग तो अपना काम करते ही रहेंगे, हथियारों के सौदागर लड़ाई को भड़काने में लगे ही रहेंगे, और ऐसे में अमनपसंद लोगों को मीडिया में जाकर, अदालतों में जाकर और सरकारों से अपील करके माहौल को सुधारने में भी मेहनत करनी होगी क्योंकि जिस बिरादरी में शरीफ घर बैठे जाते हैं वहां पर गुंडे-मवालियों का राज कायम हो जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच एक अच्छी बात यह है कि दोनों तरफ बहुत से लेखक, पत्रकार, कलाकार और इसी किस्म के दूसरे गैरसरकारी लोग बड़ी संख्या में हैं, वे बहुत मेहनत भी करते हैं और रिश्तों को गाढ़े बनाते चलने के लिए लगातार लगे रहते हैं। आज इंटरनेट जैसी चौबीसों घंटे की बातचीत के चलते यह सिलसिला बढ़ भी रहा है। हमारा मानना है कि सरकारों में बैठे जो लोग आज दरियादिली की बात करेंगे, उनका नाम भी इतिहास में दर्ज होगा। सरकारों को अपनी जेलों में बेकसूरों या मामूली कुसूरवारों को रखने और सौदेबाजी करने से बाज आना चाहिए। बिना गिनती का सौदा किए, भीड़ भरी जेलों को खाली करना चाहिए ताकि इंसान अपने घर-कुनबे के साथ रहने जा सकें। इससे ही हवा सुधरेगी और हथियारों की दौड़ कम हो सकेगी। जब तक सद्भावना नहीं बढ़ेगी तब तक आतंकी शक बढ़ाने की हरकतें करते रहेंगे।
आज डॉ. चिश्ती को अदालत ने जाने की छूट दी है। हमारा यह मानना है कि भारत सरकार को कुछ उदारता दिखाकर सरकारी विशेषाधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए और इतने बुजुर्ग और इतने कमजोर हो चुके इंसान को, तकरीबन बीस बरस इस देश में फंसे हुए गुजारने के बाद अब पूरी तरह से बिदा करना चाहिए, उससे न सिर्फ सरकार बल्कि देश की इज्जत भी बढ़ेगी।

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