मोदी के मुकाबले की कुछ शर्तें

20 सितंबर 11
गुजरात में भाजपा से बड़े भाजपा के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिनों का उपवास भाजपा और एनडीए के लिए चाहे जैसी परेशानी खड़ी करे, इससे देश के मीडिया को चार दिनों का एक तमाशा मिल गया और अगर भूकंप की खबरों को लेना मजबूरी नहीं होता तो मोदी-पुराण कुछ और दिनों तक चलती। दरअसल नरेंद्र मोदी का कद किसी को रावण के पुतले की तरह ऊंचा लग सकता है और किसी को अयोध्या में आस्था की बुनियाद पर बनाने की जिद की तरह ऊंचा, लेकिन उनका कद खबरों के लिहाज से और भाजपा के भीतर की राजनीतिक के लिहाज से किसी भी दूसरे भाजपाई से ऊंचा है। हम यहां पर दूसरी पार्टियों के नेताओं से उनकी तुलना इसलिए करना नहीं चाहते क्योंकि अभी मोदी को राष्ट्रीय राजनीति में पांव रखने के पहले अपनी पार्टी की एक मंजूरी तो लगेगी ही, और उनकी पार्टी को एनडीए के भीतर तब तक एक सहमति लगेगी जब तक वह राममंदिर के मुद्दे को लेकर अकेले आगे बढऩा तय नहीं कर लेगी। सिर्फ उसी हालत में वह एनडीए के भागीदारों की हेठी करके मोदी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में पेश कर सकती है, हालांकि उससे भाजपा के बहुत से दूसरे नेताओं के सपने चूर-चूर हो जाएंगे जो कि दिल्ली की राजनीति करते हुए दशकों से यह सपना पाले हुए हैं। एक दिन प्रधानमंत्री के पद पर दावेदारी का उनका भी आएगा।
लेकिन आज की बातचीत भाजपा को लेकर नहीं है और शायद अकेले मोदी को लेकर भी नहीं है। यह समझने की जरूरत है कि संघ परिवार के कई बड़े संगठनों के साथ हिकारत का रिश्ता पाले हुए भी नरेंद्र मोदी किस तरह गुजरात में हिंदुओं के सबसे बड़े नेता तो बने हुए हैं ही, वे एक कामयाब कारोबारी राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दुबारा चुनाव जीतकर आने वाले नेता भी साबित हो चुके हैं। ऐसे में जब कांगे्रस पार्टी के एक बहुत ही कमजोर साख वाले नेता शंकर सिंह वाघेला मोदी के सद्भावना-मिशन नाम के इस उपवास के जवाब में एक उपवास को लेकर एक अलग शामियाने में बैठ गए, तो वे मजाक का सामान बन गए। दरअसल मुख्यमंत्री की कुर्सी बरसों तक संभालने के बाद किसी बड़े घोटाले में नाम फंसे बिना, राज्य में आमतौर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों के बिना, खासे कामयाब आर्थिक विकास वाले तो नरेंद्र मोदी भाजपा के इतने बड़े मुख्यमंत्री हैं कि उनके मुकाबले ऐसी खूबियों के साथ कांगे्रस किसी को जवाबी मोर्चे पर पेश कर नहीं सकती थी। हजारों मुसलमानों के कत्ल के साम्प्रदायिक इतिहास वाले मोदी-राज के बावजूद अगर उस राज्य में देश-विदेश से लोग पूंजी-निवेश के लिए पहुंच रहे हैं और मशालों और त्रिशूलों की नोंक पर अगर 2002 से अब तक राज्य में साम्प्रदायिक अमन-चैन कायम रखने में मोदी कामयाब रहे हैं तो बहुत से लोग 2002 को भूलकर आगे बढऩे के हिमायती हैं। ऐसे में मोदी का राष्ट्रीय स्तर पर सामना करने की बात तो आगे की है, आज गुजरात में मोदी का मुकाबला करने के लिए न संघ परिवार के भीतर कोई है, न भाजपा के भीतर कोई है, और न ही गुजरात में विपक्षी कांगे्रस के पास कोई है। महाराष्ट्र में शिवसेना के मुखिया बाल ठाकरे ने चाहे मोदी के खिलाफ गोल-मोल शब्दों में इतना ही लिखा हो कि मोदी आगे-आगे हैं और भाजपा उनके पीछे-पीछे, यह बात फिलहाल तो ठीक ही लगती है।
हम यहां पर देश की जनता के एक बड़े हिस्से, ऐसे बड़े हिस्से जिसने कि 2002 के दंगों में कुछ खोया नहीं है, उस हिस्से की सोच का अंदाज लगाना चाहते हैं जिसे लगता है कि मोदी को देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए। उनकी सोच के तर्क अगर देखें तो यह साफ है कि मोदी की निजी आर्थिक-ईमानदारी की छवि उनके काम आ रही है और उनके राज्य के आर्थिक विकास, बहुत कम भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड भी उनके काम आ रहा है। इन दो बातों का साम्प्रदायिकता से परे भी मुमकिन होना नामुमकिन नहीं है। क्यों कोई धर्मनिरपेक्ष या साम्प्रदायिकता-विरोधी मुख्यमंत्री या मंत्री ईमानदार नहीं हो सकते? क्यों वे कोई एक कामयाब सरकार नहीं चला सकते, क्यों अपने मंत्रालय, विभाग या प्रदेश को भ्रष्टाचार से परे नहीं रख सकते? एनडीए के भीतर ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मोदी की साम्प्रदायिकता के भयानक खिलाफ रहते हुए भी अपने राज्य को ईमानदारी के साथ विकास की तरफ ले जा रहे हैं। और यह भी याद रखने की जरूरत है कि उन्हें लालू-राज के पन्द्रह बरसों में खंडहर हो चुका राज मिला था। लेकिन हम फिर मोदी को छोड़ नीतीश कुमार में उलझना नहीं चाहते। आज हमारा सवाल कांगे्रस पार्टी से यह है कि वह क्यों अपनी और अपने नेताओं की लकीरों को लंबा नहीं कर पाती? वह कब तक धर्मनिरपेक्षता को भुनाने के लिए साम्प्रदायिकता-विरोध को काफी बड़ा हथियार माना जाएगा? चूंकि मोदी के आगे बढऩे की एक चर्चा है इसलिए कांगे्रस को यह याद दिलाने की आज जरूरत है कि उसकी मौजूदा लकीरें मोदी की लकीरों से बड़ी नहीं हो पाएंगी और ठोस काम का जवाब ठोस काम से ही हो सकता है, ईमानदारी का मुकाबला ईमानदारी से ही हो सकता है।

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