रावण के कुछ सिर क्यों नहीं दिखते?

5 सितंबर 2011
कर्नाटक से कुख्यात रेड्डी भाईयों की गिरफ्तारी उस समय हुई जब वे जनता के हक की लोहा खदानों को बरसों से लूटकर शायद हजारों करोड़ रुपए जीम चुके हैं। उनको भाजपा से विधायक बनाने फिर मंत्री बनाने और फिर उन्हें लूटने का मौका देने के जुर्म से भाजपा अपने-आपको उसी तरह बरी नहीं कर सकती जिस तरह राजा या कलमाड़ी के जुर्म से मनमोहन सिंह अपने-आपको अलग नहीं कर सकते। लेकिन हम इस बात को देखकर हैरान हैं कि राजनीतिक दलों से परे जो लोग इस देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ मशालें लेकर निकले हुए हैं उन्हें कर्नाटक की राजधानी जाने के बाद भी वहां के इस भयानक भ्रष्टाचार के बारे में, चोरी और डकैती के बारे में कहने को कुछ नहीं मिला। पूरे देश में नेताओं और अफसरों को भ्रष्ट कहते हुए, संसद को फिजूल करार देते हुए जो अन्ना हजारे शहादत के अंदाज में लगे हुए थे उनका मुंह भी इस भ्रष्टाचार पर कर्नाटक जाने पर भी नहीं खुला। वहां पहुंचकर इस गांधीवादी को मंच पर यह कहना तो सूझा कि मनमोहन सिंह तो भले हैं लेकिन उनके पीछे एक रिमोट कंट्रोल है, लेकिन उन्हें अपने ही साथी जस्टिस संतोष हेगड़े के पाए हुए इन सुबूतों पर मानो भरोसा ही नहीं था कि कर्नाटक में रेड्डी गिरोह की अगुवाई में सोलह हजार करोड़ रुपए से अधिक की लौह अयस्क की चोरी के सुबूत तो मिल गए हैं। यही जस्टिस हेगड़े अन्नाटोली के एक खास सदस्य हैं, लेकिन कर्नाटक के इस लोकायुक्त की रिपोर्ट पर अन्नाटोली में से किसी का मुंह नहीं खुला। इसी तरह कर्नाटक की इसी राजधानी बेंगलुरू में बसे हुए आर्ट ऑफ लिविंग के गुरू रविशंकर दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचकर तो अगुवाई करते रहे लेकिन अपने ही शहर में बसे डकैतों के बारे में उनका मुंह नहीं खुला। इसी तरह देश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक आंदोलन का नारा देने वाले बाबा रामदेव ने कर्नाटक के इन भाजपा मंत्रियों के इस भयानक बड़े भ्रष्टाचार पर कुछ कहा हो ऐसा दिखाई नहीं पड़ता।
भ्रष्टाचार के किसी भी सरकार का हो, किसी भी पार्टी का हो, उसके पीछे के जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और हमारा तो यह भी मानना है कि अगर इस देश में मौत की सजा खत्म नहीं ही होना है तो फिर उसके तहत उन भ्रष्ट लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए जिनके भ्रष्टाचार से सबसे गरीब और बेसहारा लोग मर जाते हैं। लेकिन अभी हम बात उन आंदोलनकारियों की कर रहे हैं जो सरकार के, संसद के सभी किस्म के नोटिसों से अपने और अपने लोगों को ऊपर रखना चाहते हैं, प्रधानमंत्री को लोकपाल के नीचे रखना चाहते हैं और जो खुलकर भ्रष्ट लोगों में से छांट-छांटकर चुनिंदा लोगों पर, पार्टियों और सरकारों पर हमले करते हैं, और मनचाहे लोगों को अनदेखा करते हैं। यह सिलसिला बहुत भयानक है और जनता का जो कमसमझ तबका है वह नारों के हल्ले के बीच यह समझ भी नहीं पाता कि रावण के कुछ चुनिंदा सिरों पर ही तीर क्यों चल रहे हैं।
हमने कुछ दिन पहले भी यह बात उठाई थी कि देश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे आंदोलनों को एक तरफ तो भाजपा समर्थन देती है और दूसरी तरफ कर्नाटक में उसने भ्रष्टाचार के लिए एक ऐसा आसमान छूता बर्दाश्त दिखाया है कि उसके चलते ही हजारों करोड़, या दसियों हजार करोड़ की चोरी बढ़ गई। जब रेड्डी भाईयों की करतूतें खुलकर सामने आ चुकी थीं उस वक्त भी उनको हटाना या तो भाजपा के बस से बाहर का हो चुका था, क्योंकि उनके पैसों की ताकत के आगे एक तरफ तो कर्नाटक के भाजपा विधायक उनकी जेब में जाकर बैठे हुए थे और दूसरी तरफ दिल्ली में भाजपा की लीडरशिप अपने-आपको बेबस पा रही थी। हम अपनी पहले की लिखी हुई एक बात फिर दुहराना चाहेंगे कि राजनीति में जो पार्टी अपने कुछ छंटैल  लोगों को दबंग बाहुबली बनने देंगे तो फिर वे दबंग ही पार्टी लीडरशिप की बांह मरोड़कर अपनी मर्जी का भ्रष्टाचार चलाते रहेंगे। ऐसा ठीक पड़ोस के आंध्र में भी देखने मिल रहा है जहां कांगे्रस के गुजर चुके पिछले मुख्यमंत्री वायएसआर का बेटा जगन मोहन अपने बाप के राज में इक_ा किए गए धनबल से आज कांगे्रस की खाट खड़ी किया हुआ है।
यह बात तो हुई राजनीतिक दलों की, लेकिन हम इस मौके पर समाज के समझदार तबके से यह भी चाहते हैं कि वे हर सार्वजनिक मंच पर अपने हाथों माथे पर शहादत का तिलक लगाकर घूमने वाले अन्ना-बाबा जैसे लोगों से इतना जरूर पूछें कि उन्हें रावण के कुछ सिर क्यों नहीं दिखते?

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