15 मार्च 2013
संपादकीय
भारत में स्टिंग ऑपरेशनों के लिए विख्यात एक वेबसाईट कोबरा पोस्ट की ताजा रिपोर्ट दिल दहलाने वाली है, और दिल से भी अधिक इस देश की अर्थव्यवस्था को दहलाने वाली है। इसने ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से यह साबित किया है कि हिंदुस्तान के निजी क्षेत्र के तीन सबसे बड़े और मशहूर (?) बैंकों में उन तमाम मुजरिमों का लाल कालीन बिछाकर स्वागत किया जाता है जो अपने दो नंबर के पैसों को लेकर वहां जाते हैं। स्टिंग ऑपरेशन के मुताबिक कालेधन के लिए ये बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस और एचडीएफसी हर तरह की जालसाजी और धोखाधड़ी करने के लिए तैयार बैठे मिले हैं। इन बैंकों की कई महानगरों की ब्रांच में जाकर कोबरा पोस्ट के लोगों ने जब बातचीत की, तो जालसाजी के तरीकों की लंबी लिस्ट लेकर बैठे हुए बैंक अफसर मिले। और जितना खुलकर वे काले को सफेद करने की लॉन्ड्री चलाते दिखे, उससे जाहिर है कि बैंक नीचे से ऊपर तक इस जालसाजी में शामिल हैं। और यह मामला सिर्फ रिजर्व बैंक के नियमों के खिलाफ जाकर जालसाजी का नहीं है, यह इस देश को खोखला करने की साजिश है जिसे बैंकों का नाम दिया गया है।
एक तरफ जब भारत में यह बात मुद्दा बनी हुई है कि स्विस बैंकों में भारत का कितना कालाधन जमा है, और उसे किस तरह से भारत वापिस लाया जाए, तो उसी समय यह बात सामने आ रही है कि कालेधन के लिए इस देश के मुजरिमों को दूसरे देश जाने की जरूरत नहीं है, यहीं पर निजी क्षेत्र के नामी-गिरामी बैंकों में ठीक स्विस बैंक की तरह घर आकर नगदी ले जाने की सहूलियत भी रखी है, और फर्जी खातों से हर किस्म की जालसाजी करने, काले को सफेद करने के तरह-तरह के पैकेज बनाकर रखे हैं। इस बात को कोई मूर्ख ही मानेगा कि बैंक के ब्रांच मैनेजर अपने स्तर पर आज के कम्प्यूटरों में ऐसा इंतजाम कर लेंगे जो कि उन्हीं के बैंक को पकड़ नहीं आएगा। और यहां पर यह भी याद करने की जरूरत है कि कुछ अरसा पहले अरविंद केजरीवाल ने भी भारत में काम कर रहे एक निजी बैंक की हरकतें किस तरह की जालसाजी वाली और गैरकानूनी थीं। चूंकि यूपीए सरकार को अरविंद केजरीवाल पसंद नहीं हैं, इसलिए उनकी कही बातों पर कोई जांच भी हुई हो ऐसा सुनाई नहीं पड़ा लेकिन अब यह ताजा भांडाफोड़ उस कोबरा पोस्ट का है, जिसने सांसदों के सवाल पूछने के लिए रिश्वत लेने को उजागर किया था, और भ्रष्ट सांसदों की रोजी-रोटी (?) खाई थी। इसलिए इस बार की स्टिंग ऑपरेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग को सरकार अनदेखा करते हुए चुप नहीं बैठ सकती।
भारत की जनता के ऐसा सोचने के पर्याप्त कारण हैं कि इस देश की सत्ता हांकते हुए लोग बैंकों की ऐसी जालसाजी और धोखाधड़ी को इसलिए बचाकर रखते हैं, कि वे अपना कालाधन इन्हीं ड्राइक्लीनिंग दूकानों से बेदाग करवा सकें। यह मामला सरकारी एजेंसियों के तुरंत दखल देने का है ताकि जालसाज बैंक अपने रिकॉर्डों में हेराफेरी न कर सकें, और जरूरत हो तो सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल देकर इस जांच को सरकारी दखल और पहुंच से बाहर करवा देना चाहिए। बैंक जब कालेधन को इतने संगठित तरीके से सफेद करने का कारोबार कर रहे हैं, तो हमारे हिसाब से यह देशद्रोह का एक मामला बनता है। यह किसी करदाता द्वारा टैक्स चोरी और कालेधन जैसा कम खतरनाक जुर्म नहीं है। यह देश के साथ गद्दारी वाला जुर्म है, और इस देश के लोगों को ऐसे बैंकों से अपने खाते खत्म भी करने चाहिए। जब तक इनकी जांच नहीं होती है, तब तक भी भारत के लोगों को चाहिए कि इन बैंकों से अपना लेन-देन कम से कम रखें। बाजार के चोरों के पेट पर लात पडऩे का यही एक तरीका रहता है कि उनके कारोबार को हटाया जाए। धीरे-धीरे भारत के लोगों को यह समझ आ रहा है कि बैंक और बीमा जैसे मामलों के निजीकरण के क्या-क्या खतरे हो सकते हैं। आगे जाकर हो सकता है कि कुछ संदिग्ध किस्म की एयरलाइंस भी तरह-तरह के जुर्म करती मिले।
फिलहाल इस मामले में देश की सबसे ऊंचे दर्जे की जांच बिना देर किए शुरू करने की जरूरत है, और तब तक लोगों को चाहिए कि ऐसे संदिग्ध बैंकों का सामाजिक-कारोबारी बहिष्कार करें।

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