8 मार्च
नकली नोट हमेशा नहीं खपते
आपकी बातचीत अगर तर्कसंगत नहीं है, न्यायसंगत नहीं है, तो कोई मूर्ख ही उसके झांसे में आ सकते हैं। समझदार के सामने न तो मूर्खता टिकती, और न दुष्टता छुपी रहती। इसलिए बातचीत में कुतर्क के बजाय न्यायसंगत तर्कों का ही इस्तेमाल करें। कुछ लोग किसी साफ सवाल के जवाब में भी घुमा फिराकर एक धुंधला जवाब देने की कोशिश करते हैं, जिसके पीछे या तो उनका अज्ञान होता है, या फिर सच को छुपाने की नीयत। लेकिन ऐसी बातें समझदारों के सामने नहीं खपतीं। इसलिए यह मानकर न चलें कि हर बार आपका पाला सिर्फ मूर्खों से पड़ेगा। अपने आपको ऐसी नौबत के लिए तैयार रखें कि समझदार को भी संतुष्ट कर सकें। झांसे के जवाब नकली नोट की तरह होते हैं, जो लालटेन की रौशनी वाले गांव के बाजार में कमजोर नजरों वाले फेरीवालों में तो खप जाते हैं, लेकिन ठीक-ठाक आंख वाले उन्हें तुरंत पकड़ लेते हैं।
- सुनील कुमार
नकली नोट हमेशा नहीं खपते
आपकी बातचीत अगर तर्कसंगत नहीं है, न्यायसंगत नहीं है, तो कोई मूर्ख ही उसके झांसे में आ सकते हैं। समझदार के सामने न तो मूर्खता टिकती, और न दुष्टता छुपी रहती। इसलिए बातचीत में कुतर्क के बजाय न्यायसंगत तर्कों का ही इस्तेमाल करें। कुछ लोग किसी साफ सवाल के जवाब में भी घुमा फिराकर एक धुंधला जवाब देने की कोशिश करते हैं, जिसके पीछे या तो उनका अज्ञान होता है, या फिर सच को छुपाने की नीयत। लेकिन ऐसी बातें समझदारों के सामने नहीं खपतीं। इसलिए यह मानकर न चलें कि हर बार आपका पाला सिर्फ मूर्खों से पड़ेगा। अपने आपको ऐसी नौबत के लिए तैयार रखें कि समझदार को भी संतुष्ट कर सकें। झांसे के जवाब नकली नोट की तरह होते हैं, जो लालटेन की रौशनी वाले गांव के बाजार में कमजोर नजरों वाले फेरीवालों में तो खप जाते हैं, लेकिन ठीक-ठाक आंख वाले उन्हें तुरंत पकड़ लेते हैं।
- सुनील कुमार
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