छोटी सी बात

19 मार्च 2013
सोचें, फिर पोस्ट करें
पहले लोग कहते थे कि आपकी पहचान इससे होती है कि आपके दोस्त कैसे हैं। अब आपकी पहचान इससे होती है कि फेसबुक या ट्विटर पर कैसे लोग आपके दोस्त हैं, आप वहां पर क्या लिखते हैं या पोस्ट करते हैं, आपके दोस्त आपकी बातों पर क्या लिखते हैं। इंटरनेट की मेहरबानी से आज किसी के बारे में भी कुछ पता लगाना हो, तो लोग ऐसी सोशल वेबसाईटों पर चले जाते हैं, और आपकी साख वहीं पर बनती या बिगड़ती है। बड़ी कंपनियों में लोग किसी को काम पर रखने के पहले इंटरनेट पर उसके हालचाल को ठोक बजा लेते हैं, और लोगों को नौकरी न मिलने पर  यह भी पता नहीं लग पाता कि उन्होंने किस वजह से मौका खोया। इसी तरह शादी-ब्याह के रिश्ते भी कुछ गंदी या गलत बातों को आपके पन्ने पर देखकर होते-होते रह जाते हैं। 
दोस्तों के बीच इंटरनेट पर जो बात होती है, उस दौरान लोग यह भूल जाते हैं कि इन बातों को कई पीढिय़ां देख सकती हैं, और आपकी वजह से आपके आगे-पीछे के लोगों को भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ सकती है। 
इंटरनेट की तकनीक ऐसी है कि कई बार बिना अधिक सोचे लोग पोस्ट कर देते हैं, और वह बात हाथ से निकल जाती है।
सुनील कुमार

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