छोटी सी बात

17 मार्च
पढ़े और आगे बढ़ाएं
जो लोग कोई अखबार या पत्रिका खरीद पाते हैं, वे उसको इस्तेमाल करने के बाद आस-पास के कुछ गरीब और जरूरतमंद लोगों को देकर उनको पढऩे का एक मौका दे सकते हैं। और ऐसा न करके वे महीने के आखिरी में 5-10 रुपए की रद्दी भी बेच सकते हैं। लेकिन कुदरत के दिए हुए पेड़ों को काटकर जो कागज बनता है उसका अधिक से अधिक बार इस्तेमाल होना हर किसी की जिम्मेदारी है। कई लोग पंछियों को दाना देने से लेकर चीटियों को आटा देने तक, बहुत किस्म के काम करके समझते हैं कि वे दान-धर्म का कोई काम कर रहे हैं, या समाज सेवा कर रहे हैं। इससे ज्यादा अच्छा और जरूरी यह है कि वे ज्ञान दान करें, और आस-पास के लोगों को पढऩे का एक मौका दें। अच्छे अखबार और अच्छी पत्रिकाओं को लोग अगर दूसरों तक देते हैं, तो उनके पुराने अंक भी लोगों के काम तो आते ही हैं। 
इसी तरह अपनी पढ़ी हुई उन किताबों को दूसरों को देने की दरियादिली दिखाने का हौसला भी दिखाएं, जिन किताबों की जरूरत आपको दुबारा नहीं पडऩे वाली है। किस्से-कहानियों या कविताओं की बहुत सी ऐसी किताबें हो सकती हैं जो आपको डिक्शनरी या इनसाइक्लोपीडिया की तरह रखना जरूरी न हो। ऐसी किताबों को दूसरों को देने से लोगों का पढऩा बढ़ेगा और इन किताबों का जीवन भी सार्थक होगा।
-सुनील कुमार

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें