छोटी सी बात

9 मार्च
मन, वचन और कर्म साफ रखने का समय
दुनिया के एक छोटे ही सही, लेकिन महत्वपूर्ण तबके में सामाजिक न्याय को महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्म, जाति, क्षेत्रीयता और रंग को लेकर, गरीबी या बीमारी को लेकर लापरवाही से कही गई बातें ऐसे तबकों में तुरंत खटक जाती हैं, और आपकी साख खराब करती हैं। किसी जाति को लेकर अगर आपकी बातचीत हिकारत रहती है, तो आसपास के बच्चे उसे सीखते हुए ही बड़े होते हैं। इसी तरह किसी गरीब को नीचा समझना, औरत को मूर्ख समझना, किसी देश-प्रदेश के लोगों को अपराधी या जाहिल समझना, यह गलत भी है, और इसका अगली पीढ़ी पर असर और गलत होता है। आने वाला समय इतने कड़े मुकाबले का रहेगा, कि ऐसी सामाजिक सोच आपकी अगली पीढ़ी को कई जगहों पर बाहर का रास्ता दिखा देगी। आज भी कानून इतने कड़े हैं कि भारत में कोई अगर किसी दलित या आदिवासी के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करते हैं, तो उस पर उन्हें काफी लंबी कैद हो सकती है। इसी तरह किसी महिला से बात करते हुए अगर आपसे चूक होती है, या आप गंदी जुबान इस्तेमाल करते हैं, तो खासी बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं। और सावधानी किसी खास मौके पर अचानक नहीं लाई जा सकती। इसलिए बेहतर यही है कि अपने मन, वचन और कर्म को साफ-सुथरा रखें। ऐसा न करने से जो खतरे खड़े हो सकते हैं, वे आज के डिजिटल जमाने में खासे खतरनाक हो सकते हैं। आज चारों तरफ लोग मोबाइल फोन लिए चलते हैं, और उनमें बातचीत की रिकॉर्डिंग सीधे अदालत तक ले जा सकती है।
- सुनील कुमार

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