10 मार्च2013
छुट्टी के दिन की योजना
साल में बहुत से ऐसे दिन होते हैं जब लोगों को किसी जन्मतिथि, पुण्यतिथि या त्यौहार की वजह से छुट्टी मिलती है। ऐसे दिन पहले से तय रहते हैं। इनका इस्तेमाल अगर लोग अपने परिवार या दोस्तों के साथ अच्छी तरह मनाने में न लगाएं, तो छुट्टी का मकसद बेकार हो जाता है। कामकाज से लदी हुई जिंदगी में छुट्टियों का काम बैटरी को दुबारा चार्ज करना भी होता है। इसलिए ऐसे दिन के इस्तेमाल के बारे में पहले से सोचकर रखें। इसके लिए बहुत अधिक खर्च जरूरी नहीं होता, करीब-करीब बिना खर्च भी परिवार सहित किसी बगीचे जाकर कुछ समय मोबाइल फोन और टीवी से दूर, बिना इंटरनेट के गुजारा जा सकता है। और ऐसे दिन के लिए अगर पहले से कैमरा तैयार न रखें, तो छुट्टी भी बेकार जाती है, और कैमरा भी। इसलिए छुट्टी सिर्फ आराम से पड़े रहने के लिए नहीं होती, और छुट्टी के दिन टीवी-इंटरनेट को भी छुट्टी देना बेहतर होता है। सोचकर देखें, घर के बाकी लोगों से बात करें, शायद बात उन्हें भी जंचे। काम के दिनों की अधिक योजना नहीं बनानी पड़ती, लेकिन छुट्टी के दिन भी अधिक योजना बनानी पड़ती है।
- सुनील कुमार
छुट्टी के दिन की योजना
साल में बहुत से ऐसे दिन होते हैं जब लोगों को किसी जन्मतिथि, पुण्यतिथि या त्यौहार की वजह से छुट्टी मिलती है। ऐसे दिन पहले से तय रहते हैं। इनका इस्तेमाल अगर लोग अपने परिवार या दोस्तों के साथ अच्छी तरह मनाने में न लगाएं, तो छुट्टी का मकसद बेकार हो जाता है। कामकाज से लदी हुई जिंदगी में छुट्टियों का काम बैटरी को दुबारा चार्ज करना भी होता है। इसलिए ऐसे दिन के इस्तेमाल के बारे में पहले से सोचकर रखें। इसके लिए बहुत अधिक खर्च जरूरी नहीं होता, करीब-करीब बिना खर्च भी परिवार सहित किसी बगीचे जाकर कुछ समय मोबाइल फोन और टीवी से दूर, बिना इंटरनेट के गुजारा जा सकता है। और ऐसे दिन के लिए अगर पहले से कैमरा तैयार न रखें, तो छुट्टी भी बेकार जाती है, और कैमरा भी। इसलिए छुट्टी सिर्फ आराम से पड़े रहने के लिए नहीं होती, और छुट्टी के दिन टीवी-इंटरनेट को भी छुट्टी देना बेहतर होता है। सोचकर देखें, घर के बाकी लोगों से बात करें, शायद बात उन्हें भी जंचे। काम के दिनों की अधिक योजना नहीं बनानी पड़ती, लेकिन छुट्टी के दिन भी अधिक योजना बनानी पड़ती है।
- सुनील कुमार
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