छोटी सी बात

15 मार्च 2013
लतीफों के मामले में सावधान रहें कि...
बहुत लंबे समय से बोलचाल की जुबान में कई किस्म के लतीफे और चटपटी कहानियां किसी जाति, धर्म, प्रांत या रूप-रंग को लेकर  प्रचलन में हैं। इनको सुनाते हुए लोगों को यह ध्यान भी नहीं रहता कि सुनने वालों में से किसी को इनमें अपना अपमान लग रहा होगा। इसी तरह बहुत से लतीफे महिलाओं को निशाना बनाते हुए रहते हैं, जो उन्हें लालची, कायर, चुगलखोर साबित करने वाले रहते हैं। अब दुनिया में लोकतंत्र की समझ बढऩे के साथ-साथ ऐसे कानून भी अमल में आने लगे हैं जिनमें ऐसी अपमानजनक बात कहने वाले मंत्रियों को भी इस्तीफा देने की नौबत आ जाती है। ऐसी बकवास की रिकॉर्डिंग करके कोई आपको पुलिस या अदालत तक घसीट सकते हैं, और कई मामलों में सजा भी हो सकती है। इसलिए लतीफे सिर्फ मजे के लिए नहीं होते, और लापरवाही से आगे बढ़ाने के लिए नहीं होते। इनके साथ एक सामाजिक अन्याय भी जुड़ा हो सकता है, और ऐसी बातों को आज के डिजिटल जमाने में आगे बढ़ाते हुए भी सावधान रहें। जो मानवाधिकारवादी और लोकतांत्रिक संगठन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सड़कों तक लड़ाई लड़ते हैं, उनमें से कोई भी सामाजिक अन्याय की बात करने वालों को बचाने के लिए सामने नहीं आएंगे। 
-सुनील कुमार

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