आजम की खुशफहमी से रश्क ही हो सकता है


29 अप्रैल 2013
अमरीका जाने पर हिंदुस्तान के लोगों को होने वाली परेशानियों में एक ताजा नाम जुड़ गया है, उत्तरप्रदेश के एक मंत्री आजम खान का। उनको अमरीका पहुंचने पर एयरपोर्ट पर रोककर एक कमरे में बिठाया गया, और पौन घंटे बाद वहां से जाने दिया गया। उनका आरोप है कि यह काम उत्तरप्रदेश के कांगे्रस के उनके एक विरोधी नेता, और आज हिंदुस्तान के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का किया हुआ है। इसे लेकर उन्होंने अमरीका से ही इतने बयान दिए, कि यहां का मीडिया उससे पट गया। 
खबरों के मुताबिक-आजम खान ने कहा, खुर्शीद ने मेरे खिलाफ साजिश रची। उनके इशारे पर ही मुझसे पूछताछ की गई। आजम ने कहा कि कि हमारी पार्टी के मुखिया जानते हैं कि वास्तव में क्या हुआ और इस घटना के पीछे कौन है। यूपीए को समर्थन पर वह जल्द ही कोई फैसला लेंगे। खान ने कहा, जब एयरपोर्ट पर मुझे अलग ले जाकर पूछताछ की जा रही थी तब हमें रिसीव करने पहुचे भारतीय दूतावास के अधिकारी हमारे साथ अजनबियों जैसा व्यवहार कर रहे थे। वे बिल्कुल खामोश और अलग-थलग थे। मुझे लगता है कि भारतीय दूतावास के अधिकारियों को उनके सीनियर्स ने पहले से ही अलग रहने का निर्देश दे दिया था। आजम खान ने कहा, अमरीका रवाना होने से 24 घंटे पहले अमरीका ने मुझे, मेरी पत्नी और बच्चों को 10 साल का वीजा दिया था। क्या पहले पता नहीं किया गया था कि मैं आतंकी हूं या नहीं? मुझे शक है कि दोनों सरकारों की सहमति से मेरा अपमान हुआ। ये जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज लगती है, क्योंकि देश में अपमान की कोशिशें नाकाम रही हैं।
आजम खान के बारे में इस बयान के बाद दो में से एक ही बात हो सकती है। एक तो यह कि वे मूर्ख हैं। और दूसरी यह कि वे अपने अलावा दुनिया के सारे लोगों को मूर्ख समझते हैं। एक तीसरी बात यह भी हो सकती है कि ये दोनों ही चीजें एक साथ लागू हो रही हों। 
भारत के बहुत से लोगों की दिक्कत यह है कि वे अपने एक मकसद के साथ जीते हैं, ऐसा करते हुए वे किसी को भगवान और किसी को हैवान बताते चलते हैं, यह एक और बात है कि राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से वे कभी अपने भगवान को हैवान बना देते हैं, और कभी किसी हैवान को भगवान बना लेते हैं, और वल्दियत के कॉलम में उसका नाम लिखने लगते हैं। पार्टी और नेता को छोडऩे वाले बहुत से लोग रहते हैं, जिनकी मोहब्बत नफरत की हद तक चली जाती है। ऐसी राजनीति में लोग राजनीतिक वजहों से किसी मुद्दे को उठाएं, वह तो समझ आता है, जब आजम खान जैसे लोग अमरीका जाकर भी अपने पसंदीदा प्रादेशिक, घरेलू और मजहबी वोटों का हिसाब चुकता करने के लिए इतना फूहड़ बयान देते हैं, तो हो सकता है कि अमरीका इस पर कुछ न कहे। मूर्खों के बारे में यह कहा जाता है कि उनसे बहस में उलझना नहीं चाहिए क्योंकि वे पहले समझदार को मूर्खता के अपने स्तर पर उतार लेते हैं, और फिर मूर्खता के अपने अनुभव और हुनर से वे समझदार को पछाड़ देते हैं। इसलिए आज इस आरोप और तर्क का कोई जवाब अमरीका या हिंदुस्तान की सरकार के पास नहीं हो सकता कि आजम खान को अमरीकी हवाई अड्डे पर रोकना भारत-अमरीका की संयुक्त मिलिट्री एक्सरसाइज लगती है। 
अगर सचमुच ऐसी बातों से आजम खान कुछ लोगों पर असर डाल सकते हैं, तो वैसे लोग तरस के हकदार हैं, हमदर्दी के हकदार हैं। और हमको उम्मीद है, आजम खान के वोटर, चाहे वे उनके पीछे ही खड़े हों, उनके मुकाबले अधिक समझदार होंगे, या कम से कम इनकी बातों के मुकाबले अधिक समझदार होंगे। कल के दिन आजम खान यह कहने लगे कि भारतीय उपग्रह अमरीकी जासूसी एजेंसी सीआईए के साथ मिलकर उनके घर के ऊपर नजर रख रहे हैं, ताकि छत पर उनके पहुंचते ही आसमान से उन पर गोलियां दागकर मिलिट्री एक्सरसाइज की जाए, तो हमको पक्का भरोसा है कि आजम खान के किसी भी समर्थक को उस पर भरोसा नहीं होगा। 
पिछले बरसों में भारत में इतनी बार अमरीका की खबरें छपी हैं कि यहां के लोग अब अच्छी तरह जानते हैं कि वहां के अपने सुरक्षा इंतजाम हैं, जिनसे भारत के रक्षा मंत्री रहते हुए जॉर्ज फर्नांडीज को भी गुजरना पड़ा था, और उस वक्त दिल्ली में खुद जॉर्ज की एनडीए सरकार थी। इसके बाद भूतपूर्व भारतीय राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम को भी अमरीका में जांच का सामना करना पड़ा था। इसलिए वहां जाने वाले लोगों को इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि वहां उनकी कैसी जांच-पड़ताल होगी। कुछ महीने पहले भारतीय फिल्म अभिनेता शाहरूख खान जैसे जाने-पहचाने चेहरे को भी वहां घंटों पूछताछ का सामना करना पड़ा था, और उस वक्त भी केंद्र में यूपीए सरकार थी जिसकी शाहरूख खान से कोई दुश्मनी नहीं थी। 
हमने पहले भी इस बारे में लिखा था कि जांच से बचने की कोशिश किसी को नहीं करनी चाहिए, और अमरीका में ही नहीं, हिंदुस्तान में भी किसी एयरपोर्ट पर या किसी और जगह किसी को जांच से रियायत क्यों मांगनी चाहिए? देश में ऐसे कितने ओहदे हैं, जिन पर बैठे हुए लोग तरह-तरह के जुर्म में शामिल नहीं मिले हैं? बड़े-बड़े जजों से लेकर बड़े-बड़े मंत्रियों तक और मुख्यमंत्रियों तक लोग जेल आते-जाते रहते हैं। ऐसे में किसी ओहदे की वजह से किसी को छूट क्यों मिले? 
और जहां तक किसी सार्वजनिक जगह की बात है, किसी को भी सुरक्षा से छूट देने का मतलब बाकी लोगों की हिफाजत को खतरे में डालना। अपने-आपको दूसरे इंसानों से ऊपर मानना, या किसी दूसरे देश के उसके नियम-कायदों, उसके इंतजाम से ऊपर मानना, एक बददिमागी है। और हिंदुस्तान की राजनीति और सत्ता ऐसे बददिमाग लोगों से भरी पड़ी हैं।
आजम खान बहुत आत्ममुग्ध और खुशफहम इंसान लगते हैं। उनके लिए भारत और अमरीका एक संयुक्त मिलिट्री एक्सरसाइज करें, उनका यह सोचना हैरान करने वाला है और उनकी ऐसी खुशफहमी से हमको रश्क ही होता है। कोई इंसान अपने को इन दो देशों की साझा फौजी कार्रवाई के लायक समझे, ऐसा अभी तक हम सिर्फ ओसामा बिन लादेन के बारे में सोच सकते थे, भारत के किसी एक राज्य के एक मंत्री के बारे में नहीं। 
आजम खान से इस देश के लोगों को, और अमरीका के लोगों को भी दो बातें सीखनी चाहिए, अपने बारे में कोई कितना ऊंचा सोचे, और दूसरों के बारे में कोई कितना नीचा सोचे, ये पैमाने दोनों देश और उनके लोग उनसे सीख सकते हैं। 
आजम खान ने ऐसी बातें कहकर सबसे पहले अपने प्रदेश के लोगों, अपने साथ के लोगों की बेइज्जती की है कि वे इतने मूर्ख हैं कि ऐसी बातों पर भरोसा करेंगे। दूसरी बेइज्जती उन्होंने अपनी पार्टी की की है, जिसको उन्होंने ऐसी बेबुनियाद बातों में झोंका है। और इस देश की भी उन्होंने बेइज्जती की है, कि यहां के किसी राज्य का कोई मंत्री अपने-आपको भारत और अमरीका की मिली-जुली मिलिट्री एक्सरसाइज के लायक मानता है। इसके साथ-साथ एक बेइज्जती उन्होंने अपनी खुद की भी की है, क्योंकि हम मामूली अक्ल वाले किसी इंसान से भी ऐसी बात की उम्मीद नहीं करते थे।
कुछ हफ्ते पहले एक इंटरव्यू में आजम खान ने कहा था-जब दिल्ली की सड़कों पर सामूहिक बलात्कार के मामले को लेकर सारे हिंदुस्तान का नौजवान पंजों पर खड़ा हो जाता है और सरकार से एक मजबूत कानून की मांग करते है और और ये लगने लगता है केंद्र सरकार को कि तहरीर चौक की तरह कोई इंकलाब आ जाए। तभी सरहदों पर अचानक दो सर उतर जाते हैं। और अगले दिन कोई मामला नहीं रहता और बात खत्म हो जाती है। हमने ये बात उस वक्त भी कही लेकिन हमारी बात का किसी ने नोटिस लिया ही नहीं। खामोश हो गए।
उनके इस बयान को लेकर उनकी समझ को समझा जा सकता है, और शायद उनकी खुद की पार्टी उनकी गैरजिम्मेदारी की हरकतों के साथ खड़ी नहीं रहेगी।

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