अगले चुनाव में कहीं से भी पानी जुटाओ और पीकर जाकर इस पर मूतकर आओ

8 अपै्रल 2013
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और सिंचाई विभाग के मंत्री अजित पवार ने कल सार्वजनिक मंच से माईक पर कहा कि पचपन दिनों से कोई एक देशमुख या किसी नाम का आदमी पानी के लिए अनशन पर बैठा है। उन्होंने कहा- पानी नहीं है तो कहां से दे दें, क्या पेशाब पहुंचा दें?
यह बात उस महाराष्ट्र में है जहां के कुछ हिस्सों में पन्द्रह दिनों में एक बार पानी मिल रहा है। यह बात उस महाराष्ट्र में है जहां पर सूखे के शिकार दीवालिया किसान आत्महत्या कर रहे हैं, रेल लाईन के किनारे के लोग गाडिय़ों में चढ़कर वहां के पखाने से पानी लाकर पी रहे हैं, जहां पर आने वाले दिन और भयानक हैं। यह उस महाराष्ट्र की बात भी है जहां के बारे में ऐसी रिपोर्ट हैं कि नेताओं ने अपने शक्कर कारखानों की कमाई जारी रखने के लिए गन्ने के खेतों को पानी देना जारी रखा और लोगों के पीने तक को पानी नहीं बचा। यह बात उस महाराष्ट्र की भी है जहां के औरंगाबाद से खबर है कि जेलों में अब कैदियों को रोज नहाने नहीं मिलेगा, क्योंकि पानी नहीं है। और यह खबर उस महाराष्ट्र की भी है जहां पर दोनों बड़ी पार्टियों के बड़े-बड़े ठेकेदार सिंचाई के ठेकों में अरबों रूपये की लूटमार में लगे हुए हैं। 
इस महाराष्ट्र की ऐसी बातों की और भी लंबी लिस्ट है, लेकिन फिलहाल अजीत पवार की बात पर लिखने के लिए इन बातों के अलावा एक ही बात और लिखना काफी है कि इस पवार के बंगले पर पिछले एक बरस में बयालीस लाख लीटर पानी इस्तेमाल हुआ। देवगिरी नाम के इस आलीशान बंगले का पानी का बिल भी पिछले एक बरस में नहीं दिया गया है। इतने पानी का मतलब यह होता है कि हर दिन इस बंगले पर दस हजार लीटर से अधिक पानी इस्तेमाल किया गया। जिस प्रदेश में गरीब और ग्रामीण महिलाएं पूरे-पूरे दिन पानी की कतार में लगी रहती हैं, कई मील का सफर करती हैं वहां पर इस किस्म की हैवानियत का बयान सत्ता के उस नशे में ही कोई दे सकता है जिस नशे को बिना पानी मिलाए खालिस किया जाता है। 
और टीवी की खबरों में अजित पवार के इस भाषण को देखते-सुनते हुए यह भी नजर आता है कि वहां मौजूद लोग उनकी इस अश्लील और हिंसक बात पर कितने जोरों से हंसे। उनका हंसना ठकुरसुहाती का हंसना भी रहा होगा, और ऐसा भी लगता है कि इस मंत्री के सामने बैठे सुनने वालों में पानी की कमी को झेलने वाले लोग नहीं रहे होंगे, वरना जूते तो प्यासों के पांव में भी होते ही हैं।
एक दूसरी सभा में अजित पवार ने कहा कि रात को बिजली नहीं आती इसलिए आबादी बढ़ रही है। 
उन्होंने इस बात को लेकर कल जब हंगामा हुआ और राज ठाकरे ने बहुत ही साफ और एकदम सही जुबान में यह कहा कि अगले चुनाव में महाराष्ट्र की जनता अजित पवार को मत नहीं मूत देगी, और पेशाब के सैलाब में वे बह जाएंगे, तो शाम तक पवार का माफीनामा जारी हुआ। 
सत्ता लोगों को हैवान बना रही है। जिस सरकार को लोगों के ऐसे भयानक हाल पर पहले चुल्लू भर पानी के मिलते ही डूब मरना था, वह सरकार इस जनता पर मूत रही है। मतदाता और मत पर मूतना कानून के भीतर की एक बड़ी हैवानियत है। अलग-अलग वक्त पर अलग-अलग पार्टियोंं के लोग यह काम कर रहे हैं, और इनके खिलाफ किसी संगठन या व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए कि ये लोग संविधान की शपथ के खिलाफ काम कर रहे हैं, और ऐसी शपथ के बाद मिलने वाले पद से इनको हटाया जाए। 
दुनिया भर में फ्रांस की एक राजकुमारी मेरी एन्टोइनेट के नाम के साथ एक बयान इतिहास में जुड़ा चला आ रहा है कि गरीबों के पास अगर खाने को डबलरोटी नहीं है, तो वे केक क्यों नहीं खाते। इतिहास के कुछ दूसरे जानकारों का मानना है कि राजकुमारी ने यह बयान कभी दिया नहीं था और उनके आलोचकों ने उनके नाम के साथ इसे चस्पा कर दिया। लेकिन आज गनीमत यह है कि वीडियो तकनीक के चलते अजित पवार को अपने बयान से मुकरने का मौका नहीं है, और आज की भारतीय राजनीति के इतिहासकारों को इन बयानों पर बहस का मौका नहीं रहेगा।
महाराष्ट्र में अजित पवार की राष्ट्रवादी कांगे्रस पार्टी का कांगे्रस के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन है। इसलिए ऐसा लगता है कि कांगे्रस की कुछ बातों का असर भी राष्ट्रवादी कांगे्रस पार्टी पर हो रहा है। दिल्ली में जिस तरह बेनी प्रसाद वर्मा से लेकर कपिल सिब्बल तक यूपीए के मददगार लोगों के बढ़े हुए हाथों पर मूत रहे हैं, कुछ उसी तरह का काम महाराष्ट्र के मतदाताओं के साथ अजित पवार ने किया है। मुझे राज ठाकरे की बात, उनके शब्द और उनकी भावना सब एकदम ही सही लग रहे हैं। महाराष्ट्र के हर मतदाता को चुनाव के दिन कहीं से भी पानी जुटाकर कुछ पेशाब का इंतजाम करना चाहिए, और जाकर इस सरकार पर मूतकर आना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें