संपादकीय
8 अप्रैल 2013
विकीलीक्स ने हिंदुस्तान में एक बार फिर धमाका किया है। इस बार उसने अमरीकी सरकार के जो भीतरी कूटनीतिक संदेश जारी किए हैं उनमें अमरीका के भारत के कूटनीतिज्ञ अपनी सरकार को बता रहे हैं कि किस तरह इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते वक्त एक पायलट राजीव गांधी स्वीडन की एक कंपनी से फौजी विमान खरीदने के मामले में दखल रख रहे थे। इस सिलसिले में उनको लेकर बिचौलिए जैसे जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, उनसे कांगे्रस के लोगों को जितने जख्म पहुंचेंगे, उससे कहीं अधिक जख्म इस देश की आम जनता को पहुंच रहे हैं कि सरकार में बैठे हुए लोग क्या इसी तरह के काम करते थे? कर रहे हैं? और करते रहेंगे?
आज देश में सवाल यह है कि अगर ऐसे आरोप सही हैं, तो फिर इस लोकतंत्र का क्या मतलब रह गया है? और विकीलीक्स का पिछले कुछ बरसों का इतिहास यह है कि उसके जारी किए हुए संदेश, और बाकी खुफिया बातों में से अभी तक किसी को गलत करार देने का काम किसी सरकार ने नहीं किया है। और भारत के ताजा राजनीतिक इतिहास की जानकारी रखने वाले लोगों को यह भी याद होगा कि इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल में सीआईए के एक एजेंट रहने की चर्चा हमेशा रही। उसे लेकर अलग-अलग मंत्रियों पर शक किया जाता रहा। और अब जो धमाका विकीलीक्स ने किया है, और जिसे देश के एक जिम्मेदार अखबार द हिंदू ने सबसे पहले छापा है, वह कांगे्रस को हिलाने और दहलाने के लिए बहुत है। आज इस पार्टी की साख को लेकर देश में बहुत ही निराशा है। जो लोग मोदी जैसे लोगों को कभी वोट देना नहीं चाहते, उनके सामने भी आज सवाल यह है कि मोदी को वोट न दें, तो कांगे्रस को किस तरह से दें? इस ताजा भांडाफोड़ से एक बार फिर वह पूरा सिलसिला हवा में तैर रहा है जिसके चलते बोफोर्स के धमाके हुए थे, और राजीव गांधी की सरकार गिर गई थी।
अभी तो इटली की कंपनी से हेलिकॉप्टरों की हजारों करोड़ की खरीदी में सैकड़ों करोड़ का भ्रष्टाचार खुद कांगे्रस सरकार की सीबीआई ने मान लिया है। यूपीए के प्रतिरक्षा मंत्री ने यह मान लिया है। और यूपीए सरकार के तहत के इस बड़े भ्रष्टाचार की चार्जशीट भी अदालत में दाखिल हो चुकी है। ऐसे में और कितने धमाके कांगे्रस झेल पाएगी? अभी इस बारे में यह भांडाफोड़ सामने आए हुए आधा दिन गुजर गया है लेकिन कांगे्रस ने अब तक इसके बारे में कोई ठोस बयान नहीं दिया है, सिवाय इसे खारिज कर देने के। देश को इससे अधिक सफाई की जरूरत है, क्योंकि पूरे देश की हवा ऐसी गंदगी से दमघोंटू हो गई है, और ऐसे में बहुत से लोग नक्सल हिंसा को एक हवादान की तरह देखने लगे हैं।
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