28 अपै्रल 2013
संपादकीय
छत्तीसगढ़ में आज शाम होने जा रहा आईपीएल का क्रिकेट मैच इस राज्य के अस्तित्व में आने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा खेल आयोजन भी है, और किसी भी किस्म का सबसे बड़ा कार्यक्रम भी है। इससे एकमुश्त इस राज्य का नाम दुनिया के उन तमाम देशों में कम से कम इस हफ्ते के लिए तो लिया ही जाएगा, जहां पर लोग क्रिकेट को शौक से देखते हैं। इसमें राज्य सरकार के कई करोड़ रुपये तो लग रहे हैं, लेकिन इस खर्च का न्यायसंगत और तर्कसंगत आधार यह है कि इससे छत्तीसगढ़ में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की एक शुरूआत हो रही है।
यह बात सही है कि एक नए राज्य को दुनिया की नजरों में आने के लिए बहुत सी कोशिशें करनी पड़ती हैं। यह राज्य न तो समंदर के किनारे बसा हुआ है कि जहां समुद्री व्यापार और दूसरी वजहों से उसका नाम चर्चा में रहे। और न ही यह किसी अंतरराष्ट्रीय तीर्थ जैसा है कि जिसकी वजह से लोग यहां पर आएं। यहां पर ताजमहल भी नहीं है, और न ही बुद्ध ने यहां का कोई पेड़ छांटा था। ऐसे में इस नए और छोटे राज्य, अविभाजित मध्यप्रदेश की गुलामी से आजाद हुए राज्य, को देश के भीतर ही अपनी मौजूदगी के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। बिजली के मोर्चे पर कामयाबी से लेकर, गरीबों के राशन के हक को देश में सबसे अधिक मजबूती से उन तक पहुंचाने को लेकर इस राज्य को खबरों में जगह मिली, जिनमें आमतौर पर भोपाल से विरासत में मिली हुई नक्सल हिंसा ही छाई रहती थी। आज भी भारत के भीतर हाल यह है कि बहुत से लोग छत्तीसगढ़ और झारखंड को लेकर, इनकी राजधानियों को लेकर गलतफहमी में रहते हैं। भारत सरकार की सैकड़ों वेबसाईटों पर, देश की कपंनियों की वेबसाईटों पर छत्तीसगढ़ के अंगे्रजी हिज्जे गलत चलते हैं, और उसका नुकसान कम नहीं होता है। इसलिए इस राज्य में जब क्रिकेट जैसे बाजारू बनाए गए खेल का भी एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय जलसा हो रहा है, जिसे लेकर पूरी दुनिया में कम से कम कुछ दिनों के लिए इस राज्य और इस राजधानी का नाम लिया जाएगा, तो यह खर्च जायज है।
आज के जमाने में किसी राज्य का ढांचा सिर्फ सड़कों, बिजली के तारों, और नहरों से नहीं बनता। सूचना के बाजार में उसकी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी भी जरूरी होती है, और यह काम रातों-रात नहीं हो सकता, कितना भी खर्च करने पर नहीं हो सकता। इसके लिए एक दूरदृष्टि की जरूरत भी पड़ती है, और इसमें सरकार से परे भी कई बाहरी लोगों का योगदान सरकार के खुद के काम के मुकाबले अधिक काम का हो सकता है। छत्तीसगढ़ में आईपीएल के इस क्रिकेट मुकाबले का होना इसी तरह का है, छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने सरकार से परे भी कोशिश करके यह मेजबानी हासिल की है, और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की टीम मेजबानी पाने का यह मैच एक कड़े मुकाबले में जीत भी चुकी है। उनके मुख्यमंत्री रहने का यह दसवां साल चल रहा है, और वे क्रिकेट में हैट्रिक की तरह छत्तीसगढ़ की चुनावी राजनीति में भी हैट्रिक की उम्मीद कर रहे हैं। इस आयोजन से अगर विधानसभा चुनाव पर कोई असर होगा, तो वह क्रिकेट चाहने वाले लोगों से कुछ फायदा मिलने का ही होगा।
लेकिन इस मौके पर एक बात कहे बिना यह मुद्दा अधूरा रह जाएगा। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में खेल के मैदानों पर गैरखेल आयोजन रात-दिन चलते हैं। जो राजधानी मीडिया की नजरों में सबसे अधिक रहती है, वहां भी मैदान सिमटते चले गए हैं, और छोटे रह गए मैदानों पर भी तरह-तरह की प्रदर्शनियां लगी रहती हैं। अगर छत्तीसगढ़ के इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में आगे कभी खेलने के लिए इस राज्य के खिलाडिय़ों को भी सपना देखना है, तो उनके लिए अपने गांव, कस्बे और शहर के खेल मैदान भी पाना जरूरी होगा। इस मौके पर राज्य सरकार को यह पक्का इरादा घोषित करना चाहिए कि खेल के मैदानों पर कोई भी गैरखेल आयोजन नहीं होने दिया जाएगा। उसके बिना यह राज्य खिलाड़ी नहीं बनेगा, दर्शक ही बना रहेगा। बड़े मौके बड़े इरादों को तय करने के लिए भी इस्तेमाल करने चाहिए, और आज का मौका छत्तीसगढ़ और डॉ. रमन सिंह के लिए ऐसा ही है।

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