जंगखोर, आतंकी, युद्ध अपराधी अमरीका की साजिश के नतीजे

संपादकीय
11 अप्रैल 2013
पाकिस्तान में कल फिर धर्मान्ध आतंकियों ने पोलियो के टीके पिला रहे कर्मचारियों पर गोलियां चलाईं, उनके साथ चल रहा एक पुलिसवाला मारा गया और दूसरा घायल हो गया। पिछले एक बरस में ऐसे कई मौके आए जब वहां के कट्टरपंथियों ने टीकाकरण न करने की धमकी दी, और डॉक्टरों को, स्वास्थ्य कर्मचारियों को मारा। दिसंबर में पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग हमलों में नौ पोलियो-कर्मचारी मार डाले गए और तब से बंदूकों के पुलिसिया साये में टीकाकरण चल रहा है। पाकिस्तानी आतंकी उग्रवादी इस आधार पर टीकों का विरोध करते हैं कि स्वास्थ्य कर्मचारी अमरीका के जासूस हैं और इन टीकों से मुस्लिम बच्चों का मां-बाप बनना बंद हो जाएगा। 
पाठकों को याद होगा कि ओसामा-बिन-लादेन की तलाश करते हुए अमरीकी खुफिया एजेंसियों ने उसके डीएनए से मिलान करने के लिए टीकाकरण अभियान में पाकिस्तानी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को जासूस की तरह इस्तेमाल किया था, और टीकाकरण के नाम पर लोगों के डीएनए नमूने लिए गए थे। इसी तरह से पाकिस्तान के उस मकान में लादेन के होने की जानकारी पुख्ता हुई थी, जिसके बाद पाकिस्तान सरकार को बताए बिना अमरीकियों ने उस घर पर हमला करके लादेन को मारने का दावा किया था। उस वक्त भी जिस डॉक्टर ने अमरीका की ऐसी जासूसी हरकत में मदद की थी, उसे पाकिस्तान की सरकार ने गिरफ्तार भी किया था। हमारे नियमित पाठकों को यह याद होगा कि उस जानकारी के आते ही हमने इसी जगह कई बार अमरीका की उस हरकत के खिलाफ लिखा था जिसमें टीकाकरण अभियान को जासूसी की साजिश में इस्तेमाल किया गया था। उस वक्त भी हमने यह लिखा था कि इससे टीकाकरण की विश्वसनीयता खत्म होगी और ऐसे देशों के बच्चे पोलियो से बचाव नहीं पा सकेंगे। 
दुनिया में जंग के दौरान भी डॉक्टरों, एम्बुलेंसों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का इस्तेमाल जासूसी या फौजी कार्रवाई में करने पर कड़ी रोक है, और उसे युद्ध अपराध माना जाता है। ऐसा इसलिए कि अगर एम्बुलेंस की साख नहीं रहेगी, तो वह जंग के इलाके में जख्मियों को लेकर नहीं जा सकेगी, और रास्ते में उड़ा दी जाएगी। इसलिए अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस के नियम बहुत कड़े हैं, और जंग के अलावा भी जिस इलाके में किसी भी तरह का सशस्त्र संघर्ष चलता है, वहां पर रेडक्रॉस जैसे संगठनों को किसी भी तरफ भागीदार बनने से रोका जाता है। यही हाल टीकाकरण का है, यही हाल इलाज के बाकी हिस्सों का है। लेकिन अमरीका ने दुनिया के सबसे बड़े जंगखोर और हमलावर की तरह जब झूठे बहाने गिनाकर एक के बाद दूसरे मुस्लिम देशों पर हमला करना शुरू किया, तो मुस्लिम दुनिया में उसकी नीयत एक मजहब पर हमला करने वाले की कायम हो गई। उसने जिस अंदाज में हवाई हमलों में बेकसूर लोगों को मारकर यह कोशिश की कि शायद इन हमलों में कोई आतंकी भी मारे जाएं, वह अपने आपमें एक युद्ध अपराध है, लेकिन आज जब दुनिया का सबसे बड़ा मुजरिम ही दुनिया का सबसे बड़ा जज भी बन बैठा है, तो फिर दुनिया में महज उन्हीं लोगों को जिंदा रहने का हक बाकी रह गया है, जिनको अमरीका मारना नहीं चाहता। 
पाठकों को कुछ बरस पहले हिन्दुस्तान के उत्तरप्रदेश की कुछ खबरें याद होंगी जिनमें मुस्लिम समाज के भीतर यह अफवाह फैल गई थी कि अमरीका में बने हुए टीके मुस्लिम बच्चों को अगली पीढ़ी के लिए नाकाबिल बना देंगे, और मुस्लिम आबादी खत्म करने की यह एक साजिश है। उसके चलते भी उत्तरप्रदेश में पोलियो  पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाया था। ऐसा न मानने के हमारे पास कोई कारण नहीं हैं कि अमरीका की ऐसी हरकतों के पीछे आतंकियों को पकडऩे के अलावा, या साथ-साथ, ऐसी बाजारू नीयत नहीं है कि इस तरह पोलियो अगर बाकी रहेगा, तो टीके बनाने वाली अमरीकी कंपनियां भी मुनाफा कमाती रहेगी। आज पाकिस्तान में टीकाकरण पर से लोगों का भरोसा उठ जाने का यह नतीजा हो रहा है, हो चुका है, कि इस काम में लगे लोग मारे जा रहे हैं। और यह भी तय है कि ऐसी गोलीबारी की दहशत में बहुत से मां-बाप अपने बच्चों को टीकों से दूर रखेंगे। और बहुत से मां-बाप अपने बच्चों को इसलिए भी टीके नहीं लगवाएंगे कि अगली पीढ़ी आना बंद न हो जाए। 
आज अमरीका के खिलाफ दुनिया में एक ऐसी जागरूकता पैदा होने की जरूरत है कि आतंक को खत्म करने के बहाने से वह दुनिया पर कब्जा करने के लिए बेकसूरों को लाशों को बिछाकर अपनी राह बना रहा है। आज यह पाकिस्तान है, कल निशाने पर हिन्दुस्तान रहेगा, और हिन्दुस्तान के अमरीकापरस्त नेता अपने लोगों के लहू से रंगा लाल कालीन बिछाकर अमरीका का स्वागत करेंगे।

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