बाबूलाल के भ्रष्टाचार से राज्य को सबक की जरूरत

संपादकीय
21 फरवरी 2017


बिलासपुर के कुख्यात नसबंदी कांड की हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में यह बात सामने आई कि ऑपरेशन में हुई मौतों के वक्त डो डॉक्टर सरकारी नौकरी में था, उसके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी नहीं ली गई थी, यह नहीं मिली थी, और इस वजह से अदालत में यह मामला आगे नहीं चल सकता। यह ऐसे बहुत से और दूसरे मामलों की कतार में एक और मामला दिखता है, जिसमें सरकार किसी कुसूरवार दिखते अफसर पर मुकदमे की इजाजत नहीं दे रही है। इसके साथ-साथ अभी दूसरी खबर यह आ रही है कि प्रदेश के सबसे भ्रष्ट कार्यकाल वाले स्वास्थ्य विभाग के सचिव रहे, और आज राज्य सरकार के प्रमुख सचिव बने हुए बाबूलाल अग्रवाल को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है, और उनपर यह आरोप है कि उन्होंने सीबीआई में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले को वहां से राज्य के एसीबी में भिजवाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए रिश्वत का सौदा किया था और शायद आधी रकम दे भी चुके थे।
यह अफसर भ्रष्टाचार को लेकर बरसों से कुख्यात था, और उसके बावजूद यह सचिव से प्रमुख सचिव पदोन्नत किया गया था। इसके खिलाफ नकली चिकित्सा-जांच मशीनों की खरीदी से लेकर कई तरह के आरोप लगते रहे, आयकर का छापा पड़ा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, और अभी उच्च शिक्षा सचिव रहते हुए ऐसे ही आरोपों का सिलसिला जारी था। अब यहां सोचने की एक बड़ी बात यह है कि इस भ्रष्ट अफसर ने सीबीआई के नाम पर दलाली करने वालों को डेढ़ करोड़ रुपए देना इसलिए तय किया कि उसका केस सीबीआई से राज्य के एसीबी को भेज दिया जाए। वैसे तो राज्य का एसीबी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाया गया है, लेकिन यहां पर अगर किसी रियायत की उम्मीद न होती तो एक भ्रष्ट अफसर अपने मामले को यहां लाने की ऐसी कोशिश क्यों करता कि आधा करोड़ से अधिक की रकम जा चुकी है, और खुद पत्नी के भाई के साथ जेल पहुंच चुका है। अभी हम राज्य की एसीबी या किसी दूसरी जांच एजेंसी की साख पर कुछ नहीं कह रहे हैं, लेकिन एक भ्रष्ट और जानकार, राज्य के एक प्रमुख सचिव की कैसी उम्मीदें थीं, यह तो सीबीआई ने अपनी जांच में पकड़ ही लिया है, और मीडिया के सामने घोषित भी किया है।
किसी भी सरकार के बजट का बहुत बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार में खत्म हो जाता है, और यह भ्रष्टाचार महज कमीशनखोरी के कमीशन जितना नहीं रहता है, बल्कि घटिया काम, घटिया सामान, घटिया सेवा से पूरा का पूरा बजट ही तबाह हो जाता है। बाबूलाल अग्रवाल राज्य में अपने भ्रष्टाचार के लिए हमेशा से कुख्यात रहा ऐसा अफसर है जो कि अब तक जेल के बाहर रहकर दूसरों को हैरान करता था, और ईमानदार लोगों को निराश करता था। जब यह घड़ा पूरा भर गया, तब अब जाकर यह फूटा है, और इसे लेकर राज्य सरकार को ऐसे बाकी लोगों के मामले में सबक लेना चाहिए। 

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