नफरत को बढ़ावा देने का नतीजा अमरीका में सामने

संपादकीय
25 फरवरी 2017


अमरीका में कल एक भूतपूर्व फौजी ने एक भारतवंशी कामगार को गोली से मार दिया और यह नारा लगाया कि ये लोग देश छोड़कर निकल जाएं। बाद में यह सफाई सामने आई कि उसने इस हिन्दुस्तानी को अरब का निवासी समझ लिया था। अमरीका में बसा हुआ चाहे हिन्दुस्तानी हो, चाहे अरबी हो, अगर उसे जनता की तरफ से इस तरह की गोलियां खानी पड़ रही हैं, तो यह खुद अमरीका के लिए एक बहुत बड़ी फिक्र और बहुत बड़े खतरे की बात है क्योंकि वहां घर-घर में अनगिनत बंदूक-पिस्तौल है, और वहां के लोग आए दिन कहीं न कहीं गोली-बारी की वारदात देखते रहते हैं। इस मृतक की पत्नी ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से यह सवाल किया है कि वे अमरीका में नफरत से होने वाली हिंसा पर कैसे काबू पाएंगे? यह सवाल जायज इसलिए है कि ट्रंप ने पिछले एक बरस में अपने चुनाव अभियान के दौरान बाहर से आए हुए लोगों के खिलाफ, मुस्लिमों के खिलाफ, मुस्लिम देशों के खिलाफ, हर किस्म के अल्पसंख्यकों के खिलाफ जिस किस्म की नफरत फैलाई है, अब उसकी फसल खड़ी हो रही है। और ऐसा भी नहीं है कि ट्रंप चुनाव के बाद अब राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी से एक बेहतर इंसान हो गए हैं, आज भी वे मुंह खोलते हैं, और नफरत की आग निकलती है।
आज अमरीका की पूरी व्यवस्था, वहां की अर्थव्यवस्था, वहां की समाज व्यवस्था, ये सब कुछ एक उदार नस्ल-नीति के आधार पर बनी हुई हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह कि भारत एक उदार विविधतावादी संस्कृति पर बना हुआ देश है। ठीक ट्रंप के अमरीका की तरह भारत में लगातार नफरत को और बंटवारे को बढ़ावा देने में कई लोग लगे हुए हैं, जिनमें बड़े-बड़े लोग मोदी सरकार के बड़े-बड़े ओहदों पर कायम हैं। जिस तरह आज अमरीका में यह खतरा दिख रहा है, उस तरह भारत में भी धर्म के आधार पर बंटवारे का एक बड़ा खतरा कायम है, मंडरा रहा है, और कई लोगों का यह मानना है कि वह बढ़ते भी चल रहा है। यह सिलसिला चाहे किसी देश में हो, उस देश को तबाह करने की ताकत रखता है। कोई हैरानी नहीं होगी कि ट्रंप की नफरतकी नीतियां अमरीका की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दे। हम पड़ोस के पाकिस्तान में यह देख ही रहे हैं कि किस तरह साम्प्रदायिक नफरत और आतंक की वजह से वह देश धमाकों में सैकड़ों जिंदगियां खो रहा है, और लगातार झुलस रहा है। नफरत को बढ़ाना आसान रहता है, काबू करना लगभग नामुमकिन। अमरीका ने भारत के तजुर्बे से कुछ नहीं सीखा, और ट्रंप को चुन लिया। अब भारत को कम से कम अमरीका के तजुर्बे से सीखना चाहिए, और नफरत को बढ़ावा देना बंद करना चाहिए। ऐसा न होने पर मोदी के सारे आर्थिक सपने भी धरे रह जाएंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें