कर्नाटक में मंत्री-नेता से मिले 162 करोड़ से उठे सवाल

संपादकीय
24 जनवरी 2017


कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और वहां पर लघु उद्योग मंत्री, और कांग्रेस की महिला शाखा की प्रदेश अध्यक्ष पर आयकर के छापे पड़े जिसमें 41 लाख रूपए नगद मिले, एक दर्जन किलो से अधिक सोना मिला, और करीब 162 करोड़ की संपत्ति मिली है। यह बात महज कांग्रेस तक सीमित नहीं है, और महज कर्नाटक तक सीमित नहीं है। अभी तो जितनी दौलत मिली है, इससे कई गुना अधिक खर्च कर्नाटक में भाजपा के मंत्री रहे हुए रेड्डी ने अपने घर की शादी में अभी पिछले महीनों में ही किया है, ऐसी खबरें हैं। और लोगों को याद होगा कि किस तरह कर्नाटक का सबसे बड़ा खनिज माफिया बने हुए रेड्डी बंधु, अपने सिर पर सुषमा स्वराज का हाथ रखे हुए तस्वीरें सहेजकर रखे हुए हैं, और एक वक्त वे कर्नाटक में भाजपा की सरकार को गिराने की हालत में थे। इसलिए इतनी बड़ी रकम और इतनी दौलत मिलना केवल कांग्रेस का कुकर्म नहीं है, राजनीति और सरकार में बहुत से लोग ऐसे हैं जो इस तरह सैकड़ों करोड़ के मालिक बने हुए हैं। लोगों को याद होगा कि मध्यप्रदेश में आईएएस अफसरों का एक जोड़ा इसी तरह से सैकड़ों करोड़ की रकम और पूंजी निवेश के साथ पकड़ाया था।
अब सवाल यह उठता है कि केन्द्र सरकार काले धन पर जिस मार और वार की बात करती है, क्या वह इसी रफ्तार से चलेगा कि लोग जब लाखों-करोड़ कमा लेंगे, तब जाकर सैकड़ों करोड़ जब्त किए जाएंगे, और जब्ती के ऐसे अधिकतर मामले इंकम टैक्स से आखिर में छूट जाएंगे। कालेधन पर कार्रवाई का नारा बड़ा सुहावना है, और इसके चलते जब नोटबंदी की कई-कई दिन-रात चलने वाली कतारें लगीं, तो भी लोगों को लगा कि कालेधन पर कार्रवाई देशद्रोहियों पर कार्रवाई है, और इसलिए लोगों ने कतार में लगने की तकलीफ को राष्ट्रप्रेम मान लिया, और तकलीफ बर्दाश्त कर ली। लेकिन बाजार के जानकारों का यह अंदाज है कि सैकड़ों काले-अरबपतियों में से दर्जन भर पर भी कार्रवाई नहीं होती है, और वह कार्रवाई ऐसे वक्त पर ऐसे अंदाज में होती है कि उसमें से अधिकतर लोग अपना अधिकतर कालाधन बचा लेते हैं।
भारत में टैक्स लगाने के तरीके, टैक्स चोरी पर निगरानी और उसे पकडऩे के तरीके, और पकडऩे के बाद उसे जुर्माने या सजा तक पहुंचाने के तरीके बहुत ही कमजोर है। हालत यह है कि तनख्वाह पाने वाले लोग एक पैसा भी टैक्स छुपा नहीं पाते, बचा नहीं पाते। दूसरी तरफ उनसे सैकड़ों गुना अधिक कमाने वाले लोग टैक्स देने से ही बच जाते हैं। भारत में टैक्स की पूरी प्रणाली को ऐसा बनाने की जरूरत है जिससे कि इस किस्म की सारी चोरी रूक सके जो कि कारखानों से आबकारी शुल्क की चोरी से शुरू होती है, और आयकर की चोरी तक लगातार जारी रहती है। ऐसे में कालेधन पर कार्रवाई का नारा महज चुनावी और राजनीतिक नारा अधिक रहता है, भारत की टैक्स व्यवस्था में कालेधन पर कोई कार्रवाई मुमकिन ही नहीं दिख रही है। आयकर विभाग का पूरा ढांचा इतना बड़ा नहीं है कि वह देश भर के टैक्स चोरों पर नजर भी रख सके, या कार्रवाई कर सके। इसलिए सरकार को एक बुनियादी फेरबदल के बारे में सोचना चाहिए जिससे कि टैक्स चोरी की शुरूआत ही न हो सके। ऐसे मामले में अमरीका जैसे देश से कुछ सीखा जा सकता है, जहां पर कि टैक्स चोरी आमतौर पर सुनाई नहीं देती है, और टैक्स चोरी पकड़ाने पर जहां कैद की सजा का इंतजाम है।
लेकिन कर्नाटक में जो मामला सामने आया है वह आयकर विभाग ने पकड़ा जरूर है, लेकिन वह राजनीति और सरकार में भ्रष्टाचार का एक सुबूत दिखता है। यह पूरा का पूरा मामला टैक्स चोरी से अलग सीधे भ्रष्टाचार का है, और ऐसे भ्रष्टाचार के बारे में हम बार-बार यह लिखते आए हैं कि इसके लिए कैद का इंतजाम जब तक सरकार नहीं करेगी, तब तक रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को थामना मुमकिन नहीं होगा। राजनीति की सत्ता वाली कुर्सियों पर बैठे हुए लोगों को ऐसे आर्थिक अपराधों के लिए, भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी के लिए अधिक और कड़ी सजा का इंतजाम करना होगा, तब जाकर कैद में बैठे हुए कुछ लोगों को सही अक्ल आ सकेगी। आज देश भर में वामपंथियों को छोड़कर बाकी तकरीबन तमाम पार्टियों में ऐसे दर्जे का भ्रष्टाचार आम बात है, और देश को लूट लिया जा रहा है। ऐसी राजनीति के चलते हुए देश में कालाधन कभी खत्म नहीं हो सकता, और कुछ लोगों का यह भी मानना है कि जब तक सत्ता को रिश्वत देना कारोबार की मजबूरी रहेगी, तब तक कारोबार बिना कालेधन के नहीं चल सकेगा। इसलिए भ्रष्टाचार को गोमुख पर ही रोकना होगा, वरना हुगली तक पहुंचते हुए पानी ऐसा हो चुका रहता है कि उसे वहां पर साफ नहीं किया जा सकेगा। 

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