सेक्स हमले के आरोप वाले राज्यपाल की बर्खास्तगी हो, और जांच के बाद सजा भी..

संपादकीय
27 जनवरी 2017


मेघालय के राजभवन से निकलकर जब वी. षणमुगनाथन कल गणतंत्र दिवस पर मेघालय और अरुणाचल दो राज्यों के राज्यपाल के नाते झंडा फहराने जा रहे थे, तब मेघालय के अखबार उनके सेक्स स्कैंडल की खबरों से भरे हुए थे। उन पर एक महिला ने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई है कि राजभवन में नौकरी के लिए इंटरव्यू लेते हुए राज्यपाल ने खुद उसे देर शाम अकेले में बुलाया, बाकी कर्मचारियों को छुट्टी दे दी, और बंद कमरे में उस पर झपट पड़े। इसके साथ ही राजभवन के करीब सौ कर्मचारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पांच पेज की एक लंबी शिकायत भेजी है जिसमें उन्होंने राज्यपाल के सनसनीखेज तौर-तरीकों को खुलासे से गिनाया है कि किस तरह वे रात में केवल महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाते हैं, और किस तरह राजभवन में उनका बेडरूम उनकी चुनिंदा महिलाओं के किसी भी समय आने-जाने की जगह हो गई है। इन कर्मचारियों ने एकमुश्त लिखकर यह मांग की है कि राजभवन की गरिमा को बचाने के लिए तुरंत ही राज्यपाल को बर्खास्त किया जाए। इसके चलते राज्यपाल ने अपना इस्तीफा केन्द्र को भेज दिया है।
राजभवन में अपने किस्म का यह एक अनोखा सेक्स स्कैंडल है जिसमें राज्यपाल खुद महिला कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए बंद कमरे में उनके अलग-अलग इंटरव्यू लेते हैं, अपने निवास से पुरूष कर्मचारियों को हटाकर दफ्तर तक सीमित कर देते हैं, और पूरी रात अपने निवास पर केवल महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाते हैं और किसी महिला को पुलिस थाने पहुंंचकर राज्यपाल पर सेक्स-हमले के रिपोर्ट लिखाना पड़ता है। इसके पहले भी आन्ध्र के राजभवन से नारायण दत्त तिवारी के सेक्स-टेप फैलने का मामला सामने आया था, और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन उन पर किसी ने देह शोषण का आरोप नहीं लगाया था, और उनके साथ सेक्स-टेप पर जो महिलाएं थीं, वे शायद उनकी परिचित थीं, या पेशेवर वेश्याएं थीं। देह शोषण का किसी राज्यपाल के खिलाफ यह पहला ही मामला हमें याद पड़ता है।
बड़े-बड़े संवैधानिक ओहदों पर पहुंचने वाले लोग जिनके पास यह सहूलियत रहती है कि वे किसी दूसरे देश जाकर सेक्स की अपनी जरूरतों को पूरी कर सकें, जिन्हें कि सरकार जनता के पैसों से इतनी तनख्वाह भी देती है कि वे आपसी सहमति से खरीदे जा सकने वाले सेक्स को खरीद लें, वे लोग भी जब बेरोजगारों का, या बहुत ही नीचे के ओहदों पर काम करने वाले बेबस कर्मचारियों का शोषण करने लगते हैं, और इतने खुले तरीके से राजभवन को बदनामी दिलाते हैं, तो इससे अधिक शर्मनाक और क्या बात हो सकती है? भारत के इतिहास में यह भी याद नहीं पड़ता कि किसी राजभवन के कर्मचारियों ने राज्यपाल पर इस तरह के सेक्स-आरोप लगाकर केन्द्र सरकार को शिकायत भेजी हो, और राजभवन की इज्जत के लिए उसकी बर्खास्तगी मांगी हो। केन्द्र सरकार को न सिर्फ तुरंत इस राज्यपाल को हटाना चाहिए, बल्कि राज्य की पुलिस को इस महिला की शिकायत पर कार्रवाई भी करनी चाहिए। जब मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले में वहां के तत्कालीन राज्यपाल का नाम आया था, तब भी हमने उस राज्यपाल की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की थी। ऐसा न होने पर लोकतंत्र तो वैसे भी जनता के बीच मखौल बना हुआ है, और राजभवनों को भ्रष्टाचार और सेक्स का ऐसा अड्डा बनाने पर लोग राजनीति से, और संवैधानिक-लोकतांत्रिक संस्थाओं से और अधिक नफरत करने लगेंगे। कोई एक राज्यपाल सेक्स-हमले के जुर्म में जेल चले जाए, तो हो सकता है कि उससे देश की और सैकड़ों-हजारों महिलाएं ऐसे हमलों से बच जाएं। 

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