साइबर और परमाणु खतरे,दोनों के निशानों पर भारत


2 जून 2011
अमरीका ने कल ही यह नीति घोषित की है कि अगर उस पर साइबर हमला हुआ तो वह उसके जवाब में फौजी कार्रवाई भी कर सकता है। अब साइबर हमला तो किसी भी बात को कहा जा सकता है, और अमरीकी इंटरनेट वेबसाईटों में अगर कोई घुसपैठ हुई तो उसके बदले दुनिया बमबारी झेलने तैयार रहे। कल ही अमरीकी इंटरनेट सर्विस देने वाले जीमेल में चीनी हैकरों ने घुसपैठ कर ली और उसके बहुत से खातों के भीतर वे पहुंच गए। उन्होंने अमरीकी अफसरों के ईमेल बॉक्सों तक रास्ता बना लिया, जिसे अमरीका पर साइबर हमला कहा जा सकता है। खैर, अमरीका दुनिया का क्या करेगा इस पर अब किसी का रोक तो है नहीं इसलिए अब हम सिर्फ इस पर बात करें कि लोग अपने बचाव की तैयारी कैसे करें और भारत जैसे देश अपने बचाव की तैयारी में क्या करे?
कल जब दिल्ली में प्रधानमंत्री भारत के परमाणु संयंत्रों की हिफाजत के लिए एक लंबी और ऊंची बैठक ले रहे थे तब हमें यही लग रहा था कि भारत में परमाणु बिजलीघर आज लगना शुरू भी नहीं हुए हैं और जर्मनी ने यह घोषणा कर दी है कि अगले दस बरसों में वहां का आज का सबसे नया परमाणु बिजलीघर भी खत्म कर दिया जाएगा। वहां के बाकी बहुत से बिजलीघर तो उसके पहले ही खत्म किए जाएंगे। मतलब यह कि एक तरफ भारत में कुछ बरस बाद जो परमाणु बिजलीघर लगने जा रहे हैं, उनके कुछ बरस के भीतर ही जर्मनी उनसे हाथ धोना शुरू कर चुका रहेगा। दुनिया के बहुत से विकसित देशों में परमाणु बिजलीघरों को अच्छा नहीं माना जा रहा है और वहां उन्हें लगाने के खिलाफ फैसले हो चुके हैं। हम साइबर हमले के सिलसिले में इस बात की चर्चा कर रहे हैं और इन दोनों के साथ हम एक तीसरी चर्चा यह भी करना चाहते हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया ने पिछले दिनों यह कहा कि भारत के ठिकाने हमले के लिए छांटे जा चुके हैं। जाहिर है कि जब किसी देश पर कोई दूसरा देश पूरी तरह और बुरी तरह हमला करना चाहेगा तो वह उसके परमाणु ठिकानों पर भी हमला करने की सोचेगा। इस चर्चा के बीच हम यह भी कहना चाहेंगे कि आज अमरीका के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले जिन इंटरनेट कम्प्यूटरों में चीनी हैकरों ने घुसपैठ कर ली है, उनसे कम सुरक्षित भारतीय कम्प्यूटर ही भारत के परमाणु ठिकाने पर रहेंगे और पाकिस्तान के साथ चीन के गहरे दोस्ताना रिश्ते जगजाहिर हैं। हमारी यह बात एक पल के लिए किसी को चंडूखाने के अफीमची की उड़ान जैसी लग सकती है, लेकिन दुनिया के किसी भी समझदार देश जब अपनी बचाव-तैयारी करनी होती है तो उसे तमाम किस्म की मुमकिन साजिशों को सोचकर तैयारी करनी चाहिए। हम उस पाकिस्तान से हमले की बात कर रहे हैं जहां पर आज यह चर्चा है कि वहां की फौज के भीतर आतंकी और कट्टरपंथी घुसपैठ कर चुके हैं। यह चर्चा बाहर तो बरसों से है लेकिन वहां भीतर भी आज यह एक गंभीर चर्चा है। ऐसे में भारत पर एक ऐसा साइबर हमला भी हो सकता है जो यहां के न सिर्फ परमाणु कम्प्यूटरों में घुसपैठ कर सकता है, बल्कि पाकिस्तानी हमला भारत के परमाणु ठिकानों पर भी इसलिए हो सकता है क्योंकि जब आतंकी इस तरह के हमले तय करेंगे तो सरकार के तर्क धरे रह जाएंगे। न पाक सरकार का कोई काबू अपनी सेना और खुफिया एजेंसी पर रह जाएगा और न ही भारत सरकार के किसी स्तर पर ऐसी बात कर पाएगी।
यहां पर हम दो बातों पर आना चाहते हैं, सिर्फ पाकिस्तान नहीं, दुनिया के किसी और देश से भी भारत पर साइबर हमला हो सकता है जो यहां की ट्रेन, उड़ानें, बैंक, बीमा और तमाम किस्म के बाकी ऑनलाईन काम खत्म कर सकता है। दूसरी बात यह कि भारत में किसी परमाणु-हमले, परमाणु केंद्र पर हमले या परमाणु हादसे को लेकर बचाव की कोई तैयारी आज नहीं दिख रही है और इस बारे में पुख्ता इंतजाम किए बिना सरकार को किसी परमाणु बिजलीघर बनाने की इजाजत मिलनी ही नहीं चाहिए, मौजूदा खतरों से निपटने के लिए उसके इंतजाम भी काफी और पुख्ता होने चाहिए। ऐसे में भारत को एक इंतजाम यह भी रखना चाहिए कि अगर अंतरिक्ष से ही हमला करके भारत की सारी संचार व्यवस्था और सारी कम्प्यूटर जानकारी अगर खत्म कर दी जाएगी तो यहां की जिंदगी चलने के लिए वैकल्पिक इंतजाम क्या हैं? कल को यह भी हो सकता है कि कहीं बाहर के कोई आतंकी या भारत के भीतर के आतंकी अमरीका पर एक बड़ा साइबर हमला भारत की ही जमीन से करके भारत को अमरीकी फौज के निशाने पर लाकर खड़ा कर दें। ऐसे में भारत किस तरह से अपना बचाव करेगा? यह बात जाहिर है कि भारत जितने किस्म के आतंक अपनी जमीन पर देख रहा है उनमें से एक से अधिक किस्म की विचारधाराएं अमरीका पर ऐसा हमला करने की सोच रखती हैं। नक्सलियों से लेकर इस्लाम के नाम पर आतंक करने वाले तक बहुत से ऐसे लोग हैं जो अमरीका से नीतिगत नफरत करते हैं। भारत को अपने भीतर से हो सकने वाले ऐसे खतरे से लेकर बाहर से हो सकने वाले हमलों तक के बारे में सोचना चाहिए और हम साइबर हमले, साइबर खतरे, परमाणु हादसे और परमाणु केंद्रों पर हमले, परमाणु हमले तक की सभी किस्म की बातों के बारे में सोचते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि सरकार इन सबसे निपटने की पूरी तैयारी रखेगी। जनता के करने का यहां पर कुछ नहीं है और सब कुछ सरकार के पाले में है। जनता महज इतना कर सकती है कि साइबर हमलों के खतरों को देखते हुए ऐसे दिन की कल्पना करे जब उसके किसी कम्प्यूटर और किसी ईमेल बॉक्स पर कोई भी जानकारी नहीं बच जाएगी और उस दिन वह अपनी जरूरत की सूचना कहां से जुटाएगी? हर किसी को अपनी-अपनी वैकल्पिक व्यवस्था सोच लेनी चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें