21 जून 11
सुनील कुमार
कर्नाटक की कुटिल राजनीति का कोई इलाज नहीं दिखता कभी सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर कमल को झुलसा देने वाली घर की आग लगती है तो कभी मुख्यमंत्री को निपटाने में ऐसे जुट जाता है कि दिल्ली में उसके आका शर्मा जाते हैं। पैसों के नंगे नाच में कर्नाटक की राजनीति इतनी अश्लील है कि उसे धनबल के पैमाने पर 'एÓ सर्टिफिकेट मिलना चाहिए। लेकिन अब एक बिल्कुल ही नया नाटक वहां शुरू हो गया है ईश्वर के दरबार में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और उनके कट्टर विरोधी जनतादल-एस के एच.डी कुमारस्वामी के बीच आरोपों की सच्चाई के लिए वहां के एक मंदिर में कसमें खाई जाएंगी। वहां भक्तों के बीच इस भगवान के लिए मान्यता है कि उसके सामने झूठी कसम खाने वाला पूरे कुनबे सहित तबाह हो जाता है।
यह बड़े मजे की कुश्ती है। इसी मंदिर में नहीं, दुनिया के किसी भी धर्मस्थल में, ईश्वर में इंसाफ कर देने की इतनी ताकत होती, तो रोम में ईसा मसीह के रहते जर्मनी में हिटलर दस लाख बेकसूर यहूदियों को कैसे मार पाता? पंजाब में भिंडरावाले के हत्यारे स्वर्ण मंदिर से निकल-निकलकर बेकसूरों को मारकर दुबारा वहीं कैसे छुप जाते? कश्मीर की हजरत बल दरगाह पर आतंकी कैसे कब्जा कर पाते? बिरला मंदिर वाली दिल्ली में निठारी के बलात्कारी-हत्यारे इतने बच्चों को मारकर उन्हें खा कैसे पाते? जगन्नाथ मंदिर वाले उड़ीसा में ग्राहम स्टेन्स को उनके बच्चों सहित जिंदा कैसे जलाया जाता? प्रार्थना के लिए जाते गांधी को एक हिंदू उग्रवादी नाथूराम गोडसे कैसे गोली मार पाता? ओसामा बिन लादेन अल्लाह का नाम लेकर कैसे हजारों हत्याएं कर पाता? कैसे दक्षिण भारत के मंदिरों में देवदासी बनाने के नाम पर गरीब बेबस लड़कियों के बदन लूटे जाते? कैसे अल्लाह का नाम लेकर छोटी-छोटी नाबालिग लड़कियों की शादी कब्र में पांव टांगे बूढ़ों से हो पाती? कैसे राम-सीता को घर से निकाल पाते? कैसे अहिंसा की बात करने वाले बड़े पैमाने पर कन्या भू्रण हत्या कर पाते?
ऐसी मिसालों की फेहरिस्त का अंत नहीं है। ईश्वर की शपथ अनिवार्य रूप से लेकर ही जो अमरीकी राष्ट्रपति बन पाता है वह किस तरह वियतनाम में दसियों लाख की हत्या करवाता है इसे देखने वाला ईश्वर कहां है? अगर कर्नाटक में ईश्वर होता तो वह हजारों करोड़ की अवैध खुदाई करके खरबपति बने मंत्रियों से सब कुछ छीनकर इस देश के भूखे-नंगे लोगों में न बांट देता? जब इसी कर्नाटक में वेलेंटाईन डे पर प्रेम करने वाले साथ रहते हैं, तो इसी ईश्वर का नाम लेने वाले उन पर हमले करते हैं, तब क्या करता है ईश्वर? देश भर की जेलों में सजायाफ्ता मुजरिम अपने-अपने ईश्वर की उपासना करते दिखते हैं, अगर ऐसा ईश्वर सचमुच होता, और उसका असर होता तो अपने ऐसे भक्तों को अपराध से क्यों नहीं रोकता? क्यों मस्तान को हज जाने से खुदा नहीं रोकता? क्यों किसी हिंदू देवता ने गोडसे का हाथ नहीं थामा? क्यों पशुपति नाथ मुम्बई में हर बरस चकलाघरों में उतारी जाती दसियों हजार नाबालिग नेपाली लड़कियों को बचा पाते? क्यों अयोध्या वाले उत्तरप्रदेश में राम बलात्कारियों को नहीं रोक पाते? बलात्कार की शिकार लड़कियों को जलने से नहीं रोक पाते? उनकी आंखें फोड़ दी जाती हैं, और राम देखते रहते हैं?
कर्नाटक के नेताओं के नंगे नाच का यह आखिरी बेशर्मा आइटम है जब वो ईश्वर की एक धारणा का बेजा इस्तेमाल करके जनता को फिर बेवकूफ बना रही हैं। इस मंदिर के देवता के सामने झूठ बोलने पर वैसी ही तबाही की कहानियां प्रचलित हैं, जैसी कि चौथाई सदी पहले संतोषी मां के नाम से चलती थीं। संतोषी मां की पूजा न करने से साहूकार के बेटे का पूरा कुनबा किस तरह खत्म हो जाता है, यह डरावनी कहानी पर्चों के रास्ते देश भर में फैलाई गई थी। कर्नाटक के एक मंदिर को एक अदालत की तरह दो नेता बीच में ला रहे हैं। हम मजे से 27 जून का इंतजार कर रहे हैं कि इस दिन दोनों में से कम से कम एक तो झूठ बोलेगा ही, और फिर हम देखेंगे कि कौन तबाह होता है। सच की अग्निपरीक्षा का यह पूरा नाटक फर्जी है। अगर इन दोनों नेताओं में दम है तो दोनों नार्को टेस्ट के लिए जाएं और उन पर लगे तमाम आरोपों के बारे में उनसे बेहोशी की हालत में जवाब लिए जाएं। ऐसा ही नार्को टेस्ट बाबा रामदेव का होना चाहिए जो रामलीला मैदान में पुलिस पर बलात्कार की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। किसी पर इतना गंभीर आरोप लगे तो उसके सच को तो परख ही लेना चाहिए। और बाबा तो अपना जीवन खुली किताब बताते हैं, नार्को टेस्ट में उनके पास छिपाने को तो कुछ रहेगा नहीं!
इस देश में तो ईश्वर के नाम को लेकर जालसाजी कर रहा है, कोई गांधी का नाम लेकर तानाशाही कर रहा है और कोई योग के नाम पर अराजकता कर रहा है। यह सब लोकतंत्र के ढांचे को कमजोर करने की तरकीबें हैं। एक तरफ जंगलों में नक्सली-लोकतंत्र को बारूदी सुरंग से उड़ा रहे हैं, दूसरी तरफ शहरों में आस्था के नाम पर लोग लोकतंत्र को हाशिए पर धकेल रहे हैं। सार्वजनिक जीवन के सत्ताभोगी लोग भी लोकतांत्रिक जांच और जवाबदेही से बचकर अगर आस्था के आंगन में नंगा नाच रहे हैं तो यह इस देश की आस्थावान आबादी के साथ एक और धोखाधड़ी है। जनता के पैसों पर ऐश करने वाले और उसे लूटने वाले लोग अब ईश्वर का नाम लेकर उसे और छलने जा रहे हैं।
दूरसंचार घोटाले में जेल में बंद शाहिद बलावा पर हजारों करोड़ के घोटाले का आरोप है। वह इस देश का सबसे नौजवान खरबपति कहा जा रहा है। अब उसे बचाने के लिए उसका परिवार रोज दो बकरों को काटकर गरीबों में बांट रहा है। बताया गया है कि बलवा अपने 300 बकरों का इतना शौकीन था कि उन्हें फल, मेवे खिलाता था और कोल्ड ड्रिंक पिलाता था। देश में भूख और कुपोषण से हर बरस दसियों लाख बच्चे मारे जाते हैं, उनका हक खाने वाले ऐसे बलवे और उनके पावरफुल आका बकरों को मेवे खिला रहे हैं और अब गरीबों में बकरों का गोश्त बांट रहे हैं?
इसी दर्जे की जालसाजी मुम्बई में सबसे बड़ा एक गणेश बिठाने वाला कुख्यात तस्कर वरदराजन मुदलियार करता था। लेकिन वरदा के पंडाल से उठकर गणेश कभी नहीं गए। 27 जून को कर्नाटक में एक बार फिर जनता को धोखा दिया जाएगा, इस बार सत्ता और विपक्ष मिलाकर यह धोखा देंगे। अस्तित्वहीन ईश्वर पत्थर बने रहेगा, बस जतना धोखा खाएगी। इससे तो अच्छा रहता कि वह बकरा खाती।
सुनील कुमार
कर्नाटक की कुटिल राजनीति का कोई इलाज नहीं दिखता कभी सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर कमल को झुलसा देने वाली घर की आग लगती है तो कभी मुख्यमंत्री को निपटाने में ऐसे जुट जाता है कि दिल्ली में उसके आका शर्मा जाते हैं। पैसों के नंगे नाच में कर्नाटक की राजनीति इतनी अश्लील है कि उसे धनबल के पैमाने पर 'एÓ सर्टिफिकेट मिलना चाहिए। लेकिन अब एक बिल्कुल ही नया नाटक वहां शुरू हो गया है ईश्वर के दरबार में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और उनके कट्टर विरोधी जनतादल-एस के एच.डी कुमारस्वामी के बीच आरोपों की सच्चाई के लिए वहां के एक मंदिर में कसमें खाई जाएंगी। वहां भक्तों के बीच इस भगवान के लिए मान्यता है कि उसके सामने झूठी कसम खाने वाला पूरे कुनबे सहित तबाह हो जाता है।
यह बड़े मजे की कुश्ती है। इसी मंदिर में नहीं, दुनिया के किसी भी धर्मस्थल में, ईश्वर में इंसाफ कर देने की इतनी ताकत होती, तो रोम में ईसा मसीह के रहते जर्मनी में हिटलर दस लाख बेकसूर यहूदियों को कैसे मार पाता? पंजाब में भिंडरावाले के हत्यारे स्वर्ण मंदिर से निकल-निकलकर बेकसूरों को मारकर दुबारा वहीं कैसे छुप जाते? कश्मीर की हजरत बल दरगाह पर आतंकी कैसे कब्जा कर पाते? बिरला मंदिर वाली दिल्ली में निठारी के बलात्कारी-हत्यारे इतने बच्चों को मारकर उन्हें खा कैसे पाते? जगन्नाथ मंदिर वाले उड़ीसा में ग्राहम स्टेन्स को उनके बच्चों सहित जिंदा कैसे जलाया जाता? प्रार्थना के लिए जाते गांधी को एक हिंदू उग्रवादी नाथूराम गोडसे कैसे गोली मार पाता? ओसामा बिन लादेन अल्लाह का नाम लेकर कैसे हजारों हत्याएं कर पाता? कैसे दक्षिण भारत के मंदिरों में देवदासी बनाने के नाम पर गरीब बेबस लड़कियों के बदन लूटे जाते? कैसे अल्लाह का नाम लेकर छोटी-छोटी नाबालिग लड़कियों की शादी कब्र में पांव टांगे बूढ़ों से हो पाती? कैसे राम-सीता को घर से निकाल पाते? कैसे अहिंसा की बात करने वाले बड़े पैमाने पर कन्या भू्रण हत्या कर पाते?
ऐसी मिसालों की फेहरिस्त का अंत नहीं है। ईश्वर की शपथ अनिवार्य रूप से लेकर ही जो अमरीकी राष्ट्रपति बन पाता है वह किस तरह वियतनाम में दसियों लाख की हत्या करवाता है इसे देखने वाला ईश्वर कहां है? अगर कर्नाटक में ईश्वर होता तो वह हजारों करोड़ की अवैध खुदाई करके खरबपति बने मंत्रियों से सब कुछ छीनकर इस देश के भूखे-नंगे लोगों में न बांट देता? जब इसी कर्नाटक में वेलेंटाईन डे पर प्रेम करने वाले साथ रहते हैं, तो इसी ईश्वर का नाम लेने वाले उन पर हमले करते हैं, तब क्या करता है ईश्वर? देश भर की जेलों में सजायाफ्ता मुजरिम अपने-अपने ईश्वर की उपासना करते दिखते हैं, अगर ऐसा ईश्वर सचमुच होता, और उसका असर होता तो अपने ऐसे भक्तों को अपराध से क्यों नहीं रोकता? क्यों मस्तान को हज जाने से खुदा नहीं रोकता? क्यों किसी हिंदू देवता ने गोडसे का हाथ नहीं थामा? क्यों पशुपति नाथ मुम्बई में हर बरस चकलाघरों में उतारी जाती दसियों हजार नाबालिग नेपाली लड़कियों को बचा पाते? क्यों अयोध्या वाले उत्तरप्रदेश में राम बलात्कारियों को नहीं रोक पाते? बलात्कार की शिकार लड़कियों को जलने से नहीं रोक पाते? उनकी आंखें फोड़ दी जाती हैं, और राम देखते रहते हैं?
कर्नाटक के नेताओं के नंगे नाच का यह आखिरी बेशर्मा आइटम है जब वो ईश्वर की एक धारणा का बेजा इस्तेमाल करके जनता को फिर बेवकूफ बना रही हैं। इस मंदिर के देवता के सामने झूठ बोलने पर वैसी ही तबाही की कहानियां प्रचलित हैं, जैसी कि चौथाई सदी पहले संतोषी मां के नाम से चलती थीं। संतोषी मां की पूजा न करने से साहूकार के बेटे का पूरा कुनबा किस तरह खत्म हो जाता है, यह डरावनी कहानी पर्चों के रास्ते देश भर में फैलाई गई थी। कर्नाटक के एक मंदिर को एक अदालत की तरह दो नेता बीच में ला रहे हैं। हम मजे से 27 जून का इंतजार कर रहे हैं कि इस दिन दोनों में से कम से कम एक तो झूठ बोलेगा ही, और फिर हम देखेंगे कि कौन तबाह होता है। सच की अग्निपरीक्षा का यह पूरा नाटक फर्जी है। अगर इन दोनों नेताओं में दम है तो दोनों नार्को टेस्ट के लिए जाएं और उन पर लगे तमाम आरोपों के बारे में उनसे बेहोशी की हालत में जवाब लिए जाएं। ऐसा ही नार्को टेस्ट बाबा रामदेव का होना चाहिए जो रामलीला मैदान में पुलिस पर बलात्कार की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। किसी पर इतना गंभीर आरोप लगे तो उसके सच को तो परख ही लेना चाहिए। और बाबा तो अपना जीवन खुली किताब बताते हैं, नार्को टेस्ट में उनके पास छिपाने को तो कुछ रहेगा नहीं!
इस देश में तो ईश्वर के नाम को लेकर जालसाजी कर रहा है, कोई गांधी का नाम लेकर तानाशाही कर रहा है और कोई योग के नाम पर अराजकता कर रहा है। यह सब लोकतंत्र के ढांचे को कमजोर करने की तरकीबें हैं। एक तरफ जंगलों में नक्सली-लोकतंत्र को बारूदी सुरंग से उड़ा रहे हैं, दूसरी तरफ शहरों में आस्था के नाम पर लोग लोकतंत्र को हाशिए पर धकेल रहे हैं। सार्वजनिक जीवन के सत्ताभोगी लोग भी लोकतांत्रिक जांच और जवाबदेही से बचकर अगर आस्था के आंगन में नंगा नाच रहे हैं तो यह इस देश की आस्थावान आबादी के साथ एक और धोखाधड़ी है। जनता के पैसों पर ऐश करने वाले और उसे लूटने वाले लोग अब ईश्वर का नाम लेकर उसे और छलने जा रहे हैं।
दूरसंचार घोटाले में जेल में बंद शाहिद बलावा पर हजारों करोड़ के घोटाले का आरोप है। वह इस देश का सबसे नौजवान खरबपति कहा जा रहा है। अब उसे बचाने के लिए उसका परिवार रोज दो बकरों को काटकर गरीबों में बांट रहा है। बताया गया है कि बलवा अपने 300 बकरों का इतना शौकीन था कि उन्हें फल, मेवे खिलाता था और कोल्ड ड्रिंक पिलाता था। देश में भूख और कुपोषण से हर बरस दसियों लाख बच्चे मारे जाते हैं, उनका हक खाने वाले ऐसे बलवे और उनके पावरफुल आका बकरों को मेवे खिला रहे हैं और अब गरीबों में बकरों का गोश्त बांट रहे हैं?
इसी दर्जे की जालसाजी मुम्बई में सबसे बड़ा एक गणेश बिठाने वाला कुख्यात तस्कर वरदराजन मुदलियार करता था। लेकिन वरदा के पंडाल से उठकर गणेश कभी नहीं गए। 27 जून को कर्नाटक में एक बार फिर जनता को धोखा दिया जाएगा, इस बार सत्ता और विपक्ष मिलाकर यह धोखा देंगे। अस्तित्वहीन ईश्वर पत्थर बने रहेगा, बस जतना धोखा खाएगी। इससे तो अच्छा रहता कि वह बकरा खाती।
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