ऐसा सुधार खतरनाक

28 जून 11
महाराष्ट्र में कल पुलिस ने छापा मारकर नशे की एक पार्टी में मौजूद सैकड़ों युवक-युवतियों को गिरफ्तार किया। इनके साथ-साथ वहां पुलिस की नशा विरोधी शाखा का एक इंस्पेक्टर भी मौजूद था जिसे निलंबित कर दिया गया है और माना जा रहा है कि उसी की देखरेख में यह पार्टी हो रही थी। इस पार्टी से पुलिस को कई किलो नशीले सामान मिले हैं। इसके पहले भी महाराष्ट्र के ही कुछ दूसरे शहरों में ऐसे छापों में सैकड़ों छात्र-छात्रा पकड़ाए हैं। इस घटना को महाराष्ट्र में अभी नए बने एक कानून के साथ जोड़कर देखना होगा जिसके तहत अब पच्चीस बरस से कम उम्र के लोग शराब नहीं पी सकते। इस कानून के आते ही इसके खिलाफ वे तमाम लोकतांत्रिक अधिकारवादी लोग खड़े हो गए हैं जो कि निजी जीवन के फैसलों में सरकार की अधिक दखल के खिलाफ हैं।
शराब पीने पर लगी रोक के खिलाफ तर्क यह है कि जब लोग अठारह और इक्कीस बरस की उम्र में शादी कर सकते हैं, अठारह बरस की उम्र में सरकार चुन सकते हैं, कर्ज ले सकते हैं तो वे शराब क्यों नहीं पी सकते? यह तर्क देने वाले लोगों में ऐसे लोग भी हैं जो कि शराब नहीं पीते या शराब पीने के बहुत खिलाफ हैं, लेकिन उसके बाद भी उनका यह मानना है कि जब सरकार जिंदगी के किसी एक मामले में दखल देती है तो फिर यह सिलसिला बढ़ते चलता है। आज सरकार एक महत्वहीन से लगते मामले में दखल दे रही है, कल हो सकता है कि किसी दूसरे मामले में दखल देने लगे। लेकिन इससे परे भी एक बड़ा तर्क और है जो शराब पर ऐसी, या किसी और तरह की रोक के खिलाफ जाता है। जहां-जहां कम नुकसानदेह नशा पाने में दिक्कत होती है वहां-वहां लोग कोई अधिक खतरनाक नशा पाल लेते हैं। कल के छापे में ही महाराष्ट्र में एक पार्टी में जितने किलो नशा मिला है, वह बताता है कि वहां पर नशा मिलना मुश्किल नहीं है। महाराष्ट्र की जिस समुद्री सीमा को पार करके पाकिस्तान के आतंकी थोक में पहुंच गए थे वहां से, और दूसरी सरहदों से नशा नहीं पहुंच पाएगा ऐसा कोई नासमझ ही मान सकता है। इसलिए हम शराब पर रोक को एक खतरनाक कदम मानते हैं कि इससे ड्रग्स का कारोबार पनपेगा।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में हमने करीब से देखा हुआ है कि शराब के व्यापारी बहुत चौकन्ना रहकर अपने इलाके में कोई नशीला सामान बिकने नहीं देते क्योंकि इससे उनके ग्राहक कम दाम वाले अधिक गहरे नशे की तरफ खिंच सकते हैं और इससे उनके पेट पर लात पड़ सकती है। कम नुकसानदेह नशे की जगह अगर महाराष्ट्र में अधिक नुकसानदेह नशा बढ़ जाता है तो सरकार की यह रोक उल्टी पड़ जाएगी। हमने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का भी विरोध किया जिसमें डांस बार बंद करवाए गए थे। वहां ऐसे बार में काम करने वाली दसियों हजार लड़कियां इसके बाद कुछ और अधिक बुरा पेशा करने के खतरे में पड़ गई थीं, और वयस्क मनोरंजन के लिए ऐसी जगहों पर जाने वाले लोग कुछ और खतरनाक बालिग तफरीह की तरफ मुड़ गए। यह सिलसिला इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसका सही-सही अंदाज लगना नामुमकिन है क्योंकि भारत में समाज और सरकार इस हकीकत को मानने से ही इंकार कर देते हैं कि इस देश में वेश्यावृत्ति मौजूद है। जब कभी वयस्क मनोरंजन को खत्म किया जाएगा, ऐसी जरूरत वाले वयस्क लोग किसी अधिक गंभीर बुराई की तरफ मुड़ेंगे। जब चकलाघरों पर पुलिस के छापे बढ़ जाते हैं या बाजार में शरीर का मिलना मुश्किल होने लगता है तो बलात्कार या छेडख़ानी, या देहशोषण के मामले बढऩे लगते हैं। शुद्धतावादियों की सोच जिस तरह के सामाजिक सुधार का दावा करती है वैसा सुधार होने के बजाय समाज का नुकसान अधिक होता है। महाराष्ट्र देश का सबसे विकसित और आधुनिक राज्य माना जाता है लेकिन उस राज्य में शिवसेना जैसी सोच के चलते कई राजनीतिक ताकतों के मन में शुद्धतावादी होने की बात उड़ान भरने लगती है। लेकिन यह सिलसिला खतरनाक है और निजी पसंद-नापसंद की आजादी के खिलाफ है ही।

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